FCRA Amendment Bill 2026: विदेशी फंडिंग पर नहीं लगेगी रोक? विनय मोहन क्वात्रा ने बताई अफवाहों की सच्चाई

FCRA Amendment Bill 2026: विदेशी फंडिंग पर नहीं लगेगी रोक? विनय मोहन क्वात्रा ने बताई अफवाहों की सच्चाई

 

 

FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर चल रही अफवाहों पर राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सफाई दी। जानिए विदेशी फंडिंग, NGO और धार्मिक संस्थाओं से जुड़े प्रस्तावित नियमों की पूरी जानकारी।

भारत सरकार संसद में फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 पेश करने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून को लेकर देश और विदेश में कई तरह की चर्चाएं और आशंकाएं सामने आ रही हैं। कुछ संगठनों और सिविल सोसाइटी समूहों ने इसके संभावित प्रावधानों पर सवाल भी उठाए हैं। इसी बीच अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने बिल को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही कई कथित गलतफहमियों और अफवाहों को स्पष्ट करने की कोशिश की है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट की एक श्रृंखला में ‘मिथक बनाम हकीकत’ के जरिए प्रस्तावित FCRA संशोधन से जुड़े विभिन्न दावों पर भारत का पक्ष रखा।

क्या किसी खास धर्म या समुदाय को निशाना बनाएगा बिल?

FCRA Amendment Bill को लेकर एक प्रमुख आशंका यह जताई जा रही है कि प्रस्तावित कानून किसी खास धर्म या समुदाय को निशाना बना सकता है। विनय मोहन क्वात्रा के अनुसार, यह धारणा सही नहीं है। उन्होंने कहा कि FCRA का प्रस्तावित ढांचा सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होगा और इसका आधार किसी संगठन का धर्म, समुदाय या विचारधारा नहीं होगा।

उनके मुताबिक धार्मिक शिक्षा, पूजा स्थलों के रखरखाव और विभिन्न धर्मों से जुड़े संगठनों द्वारा किए जाने वाले चैरिटेबल और वेलफेयर कार्यों के लिए विदेशी फंडिंग की पात्रता बनी रहेगी। यानी किसी संस्था की धार्मिक पहचान अपने आप में विदेशी योगदान प्राप्त करने पर रोक का आधार नहीं होगी। हालांकि, विदेशी फंड हासिल करने के लिए संबंधित कानून और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन करना जरूरी होगा।

क्या दूसरे देशों में भी विदेशी फंडिंग को लेकर कानून हैं?

क्वात्रा ने यह भी कहा कि भारत विदेशी फंडिंग और विदेशी प्रभाव से संबंधित नियम बनाने वाला अकेला देश नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका में 1938 से Foreign Agents Registration Act यानी FARA और 2010 से FATCA जैसे कानून मौजूद हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 2018 में संबंधित कानून बनाया, जबकि कनाडा ने 2024 में ऐसा कानून लागू किया। ब्रिटेन की विदेशी प्रभाव से संबंधित योजना जुलाई 2025 में लागू हुई और यूरोपीय संघ में भी इस दिशा में कानून बनाने की प्रक्रिया चल रही है।

भारत में भी विदेशी योगदान को नियंत्रित करने का कानूनी ढांचा नया नहीं है। देश में पहला FCRA वर्ष 1976 में लागू किया गया था। इसके बाद 2010 में इसे नए कानूनी ढांचे से बदला गया और बाद के वर्षों में इसमें कई संशोधन किए गए। प्रस्तावित 2026 का संशोधन इसी नियामक व्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया जा रहा है।

क्या NGO और धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति जब्त होगी?

FCRA Amendment Bill को लेकर एक और बड़ी आशंका यह है कि विदेशी फंड लेने वाले NGO, धार्मिक चैरिटी, अस्पताल, स्कूल या पूजा स्थलों की संपत्ति जब्त की जा सकती है। क्वात्रा ने इस दावे को भी गलत बताया है। उनके अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द या सरेंडर होने की स्थिति में विदेशी योगदान और उससे बनाई गई संपत्तियों के प्रबंधन के लिए पहले से प्रावधान मौजूद हैं।

उनका कहना है कि प्रस्तावित बिल इन संपत्तियों की सुरक्षा और प्रबंधन के लिए एक निर्धारित अथॉरिटी और प्रक्रिया उपलब्ध कराने का प्रयास करता है। यदि संबंधित संगठन दोबारा FCRA के तहत पंजीकृत हो जाता है, तो इस्तेमाल न किए गए फंड और संबंधित संपत्तियों की वापसी का प्रावधान भी बताया गया है।

पूजा स्थलों को लेकर भी उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी धार्मिक प्रकृति को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की जा सकती है। यदि किसी रद्द किए गए संगठन द्वारा पूजा स्थल से संबंधित संपत्ति बनाई गई है, तो वहां धार्मिक गतिविधियां जारी रखने के लिए उसे उसी धर्म की किसी अन्य FCRA-पंजीकृत संस्था को सौंपे जाने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।

NGO के कामकाज पर कितना पड़ेगा असर?

एक अन्य सवाल यह है कि क्या नए संशोधन से भारत में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों और चैरिटेबल संस्थाओं की गतिविधियां प्रभावित होंगी। क्वात्रा के अनुसार, FCRA का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल को नियमन और पारदर्शिता के दायरे में रखना है।

उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि FCRA-पंजीकृत संगठनों को मिलने वाला विदेशी योगदान समय के साथ बढ़ा है। उनके मुताबिक, 2010-11 में करीब 1.2 अरब डॉलर का विदेशी फंड प्राप्त हुआ था, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 2.67 अरब डॉलर हो गया। भारत में तीन मिलियन से अधिक NGO होने का अनुमान है, लेकिन इनमें से करीब 14,450 संस्थाओं के पास FCRA रजिस्ट्रेशन है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में सिविल सोसाइटी संगठन FCRA के दायरे में सीधे नहीं आते।

विदेशी चैरिटी और मानवीय मदद पर नहीं है पूरी रोक

क्वात्रा ने कहा कि FCRA विदेशी चैरिटी, रिसर्च ग्रांट या मानवीय सहायता प्राप्त करने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाता। इसके तहत मुख्य रूप से संगठनों को पंजीकरण, निर्धारित प्रक्रिया के जरिए विदेशी योगदान प्राप्त करने और उसके इस्तेमाल की रिपोर्टिंग जैसी आवश्यकताओं का पालन करना होता है।

FCRA के तहत पंजीकृत कई संस्थाएं स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा राहत, शोध और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं और विदेशी योगदान प्राप्त करती हैं। सरकार का तर्क है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य ऐसी गतिविधियों को खत्म करना नहीं, बल्कि विदेशी वित्तीय प्रवाह में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और पारदर्शिता पर सरकार का जोर

क्वात्रा के अनुसार, विदेशी वित्तीय प्रवाह का नियमन केवल भारत तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि कई लोकतांत्रिक देशों में इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और बेहतर प्रशासन से जोड़ा जाता है। भारत सरकार भी विदेशी योगदान के इस्तेमाल को स्पष्ट नियमों और निगरानी व्यवस्था के तहत रखना चाहती है।

हालांकि, प्रस्तावित FCRA Amendment Bill को लेकर विभिन्न संगठनों की अपनी चिंताएं और आपत्तियां हैं। इसलिए बिल संसद में पेश होने और उसकी संसदीय प्रक्रिया के दौरान इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल सरकार की ओर से यह संदेश दिया जा रहा है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य विदेशी फंडिंग को पूरी तरह रोकना नहीं, बल्कि उसके इस्तेमाल में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर नियमन सुनिश्चित करना है।

 

 

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