ASEAN Day 2026: जयशंकर ने ASEAN देशों को दी बधाई, कुतुब मीनार ASEAN के रंगों में हुआ रोशन

ASEAN Day 2026: जयशंकर ने ASEAN देशों को दी बधाई, कुतुब मीनार ASEAN के रंगों में हुआ रोशन

 

ASEAN Day 2026 पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 11 सदस्य देशों को शुभकामनाएं दीं। दिल्ली में कुतुब मीनार ASEAN के रंगों में रोशन हुआ। जानिए भारत-ASEAN संबंधों की पूरी जानकारी।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 59वें ASEAN Day के अवसर पर शनिवार को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन ASEAN के सदस्य देशों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत और ASEAN के बीच लगातार मजबूत होते संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों पक्ष कनेक्टिविटी, व्यापार, डिजिटल संपर्क, मजबूत सप्लाई चेन, रक्षा, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत की Act East Policy और India-ASEAN Comprehensive Strategic Partnership के मार्गदर्शन में दोनों पक्षों के संबंध लगातार गहरे हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-ASEAN संबंध आने वाले समय में और व्यापक तथा महत्वाकांक्षी होंगे और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देंगे।

जयशंकर ने ASEAN देशों को दी शुभकामनाएं

एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए ASEAN देशों को 59वें ASEAN Day की बधाई दी। उन्होंने लिखा कि भारत की Act East Policy के तहत Comprehensive Strategic Partnership के जरिए ASEAN के साथ भारत के संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। उन्होंने कनेक्टिविटी, व्यापार और डिजिटल लिंक के साथ-साथ सप्लाई चेन की मजबूती, रक्षा, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग को दोनों पक्षों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार बताया।

जयशंकर ने विश्वास जताया कि भारत और ASEAN के बीच साझेदारी आने वाले वर्षों में और मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बढ़ता सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मनीला में भारत-ASEAN सहयोग पर हुई थी चर्चा

इससे पहले जुलाई 2026 में जयशंकर ने मनीला में आयोजित ‘ASEAN Post-Ministerial Conference with India 2026’ की सह-अध्यक्षता की थी। बैठक में भारत और ASEAN देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसमें कनेक्टिविटी, आर्थिक सहयोग, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय प्रमुख रहे।

भारत के लिए ASEAN का महत्व केवल व्यापार और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ भारत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और समुद्री संबंध भी रहे हैं। ऐसे में Act East Policy के तहत ASEAN के साथ मजबूत साझेदारी भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

जकार्ता में मनाया गया 59वां ASEAN Day

ASEAN Day के अवसर पर इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता स्थित ASEAN मुख्यालय में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। ASEAN के महासचिव काओ किम हौर्न ने ASEAN Day समारोह का नेतृत्व किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने ASEAN की यात्रा में इस वर्ष को तीन महत्वपूर्ण उपलब्धियों वाला बताया।

इनमें सबसे महत्वपूर्ण है तिमोर-लेस्ते का ASEAN के 11वें सदस्य देश के रूप में शामिल होना। इसके अलावा Southeast Asia में Treaty of Amity and Cooperation यानी TAC की 50वीं वर्षगांठ और ‘ASEAN Vision 2045: Our Shared Future’ के क्रियान्वयन का पहला वर्ष भी इस वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। इस साल ASEAN Day का आयोजन ‘Navigating Our Future, Together’ थीम के तहत किया गया।

11 देशों का संगठन बन चुका है ASEAN

ASEAN की स्थापना 8 अगस्त 1967 को पांच देशों—इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड—ने मिलकर की थी। आज यह संगठन दक्षिण-पूर्व एशिया के सभी 11 देशों को एक मंच पर लाता है। इसमें ब्रुनेई दारुस्सलाम, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, तिमोर-लेस्ते और वियतनाम शामिल हैं।

ASEAN देशों की संयुक्त आबादी 700 मिलियन से अधिक है और इनकी संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा बताया जाता है। अगर ASEAN को एक इकाई के रूप में देखा जाए तो यह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा। यही वजह है कि भारत सहित दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए ASEAN का रणनीतिक और आर्थिक महत्व काफी ज्यादा है।

कुतुब मीनार ASEAN के रंगों में हुआ रोशन

59वें ASEAN Day के अवसर पर भारत में भी खास कार्यक्रम आयोजित किया गया। नई दिल्ली की ऐतिहासिक और विश्व प्रसिद्ध कुतुब मीनार को शुक्रवार शाम ASEAN के रंगों से रोशन किया गया। स्मारक पर ASEAN का प्रसिद्ध चावल की बालियों वाला प्रतीक दिखाई दिया और इसे संगठन के नीले, लाल और पीले रंगों से सजाया गया। इस दौरान ASEAN का राष्ट्रगान भी बजाया गया।

कार्यक्रम में ASEAN देशों के राजनयिकों के अलावा बड़ी संख्या में कुतुब मीनार देखने पहुंचे पर्यटक और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। यह पहली बार बताया गया कि ASEAN के प्रतीकों को दुनिया के किसी प्रमुख राष्ट्रीय स्मारक पर इस तरह प्रदर्शित किया गया। इस कार्यक्रम की परिकल्पना और आयोजन भारत में फिलीपींस के दूतावास ने किया था। फिलीपींस इस समय ASEAN New Delhi Committee की रोटेशनल छह महीने की अध्यक्षता कर रहा है।

भारत-ASEAN संबंधों का बढ़ता दायरा

भारत और ASEAN के बीच सेक्टोरल डायलॉग संबंधों की शुरुआत 1992 में हुई थी। तीन दशक बाद 2022 में दोनों पक्षों के रिश्तों को Comprehensive Strategic Partnership के स्तर तक बढ़ाया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ा है।

भारत और ASEAN व्यापार एवं निवेश, पर्यटन, कनेक्टिविटी, कृषि, ऊर्जा, संस्कृति, तकनीक, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग करते हैं। समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता के लिहाज से भी दोनों पक्षों की साझेदारी महत्वपूर्ण है।

भारत के लिए ASEAN क्यों है महत्वपूर्ण?

ASEAN भारत की Act East Policy का एक प्रमुख आधार है। दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ मजबूत आर्थिक और रणनीतिक संबंध भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद करते हैं। व्यापार मार्गों, डिजिटल कनेक्टिविटी, सप्लाई चेन और समुद्री सहयोग के साथ-साथ शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में बढ़ती साझेदारी दोनों पक्षों के लिए लाभकारी है।

59वें ASEAN Day के अवसर पर कुतुब मीनार का ASEAN के रंगों में रोशन होना भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच बढ़ती नजदीकी का प्रतीक भी माना जा रहा है। जयशंकर की शुभकामनाओं और दोनों पक्षों के बीच बढ़ते सहयोग से साफ है कि भारत-ASEAN साझेदारी आने वाले वर्षों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

 

 

 

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