पंजाब सरकार ने मोहाली में विशेष ‘NRI मिलनी’ का आयोजन किया। कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने परवासियों की समस्याओं के त्वरित समाधान का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के कुशल नेतृत्व में पंजाब सरकार ने विदेशों में बसे पंजाबियों और अपनी मातृभूमि के बीच की दूरी को मिटाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। पंजाब के कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने बताया कि परवासी पंजाबियों की समस्याओं के समाधान और उनसे संवाद को और अधिक मजबूत बनाने के लिए आज मोहाली में एक विशेष ‘NRI मिलनी’ का आयोजन किया गया है।
समस्याओं का मौके पर ही समाधान
ਪਰਵਾਸੀ ਪੰਜਾਬੀਆਂ ਦੀਆਂ ਮੁਸ਼ਕਿਲਾਂ ਦੇ ਹੱਲ ਵਾਸਤੇ ਮਾਨ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ NRI ਮਿਲਣੀਆਂ!
ਦੁਨੀਆ ਭਰ ‘ਚ ਵੱਸਦੇ ਪਰਵਾਸੀ ਭਾਈਚਾਰੇ ਦੀ ਪੰਜਾਬ ਨਾਲ਼ ਸਾਂਝ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਨ ਅਤੇ ਉਹਨਾਂ ਦੀਆਂ ਮੁਸ਼ਕਿਲਾਂ ਦੇ ਹੱਲ ਵਾਸਤੇ CM ਭਗਵੰਤ ਮਾਨ ਦੇ ਨਿਰਦੇਸ਼ਾਂ ਹੇਠ ਆਨਲਾਈਨ ਮਿਲਣੀਆਂ ਤੋਂ ਇਕ ਕਦਮ ਹੋਰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਂਦੇ ਹੋਏ, ਅੱਜ ਮੋਹਾਲੀ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਖ਼ਾਸ… pic.twitter.com/dKE20kB9R8
— AAP Punjab (@AAPPunjab) June 24, 2026
इस विशेष कार्यक्रम में मोहाली, रूपनगर, श्री फतेहगढ़ साहिब और पटियाला क्षेत्र के उन परवासियों को आमंत्रित किया गया है जो अपनी मातृभूमि से जुड़े मुद्दों को लेकर चिंतित हैं। डॉ. रवजोत सिंह ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक बैठक नहीं, बल्कि शिकायतों के निवारण का एक सशक्त माध्यम है। इस मिलनी के दौरान प्राप्त होने वाली समस्याओं पर तुरंत संज्ञान लिया जाएगा और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही समाधान के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
“परवासियों की चिंताओं को सरकार की प्राथमिकता”
कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देशों के तहत हमारी सरकार परवासियों की शिकायतों के प्रति बेहद गंभीर है। ऑनलाइन मिलनियों की सफलता के बाद अब हम जमीनी स्तर पर भी उनसे संवाद कर रहे हैं ताकि उनकी संपत्ति, कानूनी और अन्य प्रशासनिक उलझनों को बिना किसी देरी के हल किया जा सके।”
सरकार की प्रतिबद्धता
पंजाब सरकार द्वारा समय-समय पर आयोजित की जाने वाली ‘NRI मिलनी’ का उद्देश्य परवासियों के पंजाब के साथ भावनात्मक और आर्थिक संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करना है। सरकार ने इसके लिए एक पारदर्शी प्रक्रिया तैयार की है, जिसमें ऑनलाइन पंजीकरण से लेकर शिकायतों के निपटारे तक की निगरानी खुद मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जाती है। इस पहल से पंजाब के उन हजारों परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो विदेशों में रहते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहते हैं।