भारत में पहली मंजूर डेंगू वैक्सीन QDENGA 2027 की पहली छमाही में प्राइवेट बाजार में उपलब्ध हो सकती है। 4 से 60 साल के लोगों के लिए वैक्सीन को मंजूरी मिली है।
भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए एक बड़ी पहल होने जा रही है। देश को पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन QDENGA मिलने वाली है। जापानी फार्मास्युटिकल कंपनी ताकेदा द्वारा विकसित इस वैक्सीन को भारत के केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO से जुलाई 2026 में मार्केटिंग अथॉराइजेशन मिल चुका है। अब ताकेदा और डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के बीच हुए समझौते के बाद QDENGA को भारत के निजी बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। कंपनियों के अनुसार, यह वैक्सीन 2027 की पहली छमाही में निजी बाजार में उपलब्ध हो सकती है। हालांकि, इसके लिए जरूरी स्थानीय नियामकीय और गुणवत्ता संबंधी प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी है।
4 से 60 साल की उम्र के लोगों के लिए मंजूर हुई वैक्सीन
CDSCO ने QDENGA को भारत में 4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों में डेंगू से बचाव के लिए मंजूरी दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह एक लाइव अटेन्यूएटेड टेट्रावेलेंट डेंगू वैक्सीन है। इसका मतलब है कि इसे डेंगू वायरस के चारों प्रमुख सीरोटाइप के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित करने के लिए तैयार किया गया है। भारत में डेंगू वायरस के अलग-अलग सीरोटाइप मौजूद हैं, इसलिए ऐसी वैक्सीन का महत्व बढ़ जाता है।
सरकार के मुताबिक, QDENGA की मंजूरी से पहले इसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया। इसके क्लिनिकल विकास कार्यक्रम में अलग-अलग देशों के प्रतिभागियों को शामिल किया गया था। भारत में भी 4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों पर फेज-3 अध्ययन किया गया था।
वैक्सीन की दो खुराक दी जाएंगी
QDENGA के लिए दो खुराक का टीकाकरण कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्रत्येक खुराक 0.5 मिलीलीटर की होगी और पहली खुराक के तीन महीने बाद दूसरी खुराक दी जाएगी। यानी वैक्सीन का पूरा शेड्यूल दो डोज का होगा।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार QDENGA लगवाने से पहले व्यक्ति के डेंगू से संक्रमित होने की जांच जरूरी नहीं होगी। यह पहलू उन लोगों के लिए टीकाकरण प्रक्रिया को सरल बना सकता है, जिन्हें पहले डेंगू हुआ था या नहीं, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
डॉ. रेड्डीज संभालेगी निजी बाजार में वितरण
ताकेदा ने भारत में QDENGA की पहुंच बढ़ाने के लिए डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज के साथ विशेष वितरण समझौता किया है। समझौते के तहत डॉ. रेड्डीज भारत के निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में बच्चों और वयस्कों के लिए वैक्सीन का प्रचार और वितरण करेगी। इसके जरिए निजी अस्पतालों और टीकाकरण केंद्रों के माध्यम से पात्र लोगों तक वैक्सीन पहुंचाने की तैयारी है।
हालांकि, अभी यह वैक्सीन तुरंत बाजार में उपलब्ध नहीं होगी। कंपनियों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 2027 की पहली छमाही में इसके निजी बाजार में आने की उम्मीद है। QDENGA की भारत में कीमत अभी तय नहीं हुई है।
WHO की प्री-क्वालिफिकेशन भी हासिल कर चुकी है
भारत में मंजूरी मिलने से पहले QDENGA को कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नियामकीय स्वीकृति मिल चुकी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, जुलाई 2026 तक इसे 42 देशों में मंजूरी मिल चुकी थी और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO की प्री-क्वालिफिकेशन भी हासिल है। दुनिया भर में इसके 2.4 करोड़ से ज्यादा डोज वितरित किए जा चुके हैं।
भारत में मंजूरी मिलने के बाद QDENGA देश की डेंगू रोकथाम रणनीति में एक नया विकल्प जोड़ती है। हालांकि, वैक्सीन को डेंगू की रोकथाम के मौजूदा उपायों का विकल्प नहीं माना जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि मच्छर नियंत्रण, निगरानी, समय पर जांच और मरीजों के उचित उपचार जैसे उपाय आगे भी महत्वपूर्ण बने रहेंगे।
भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए क्यों महत्वपूर्ण है QDENGA?
डेंगू मच्छरों से फैलने वाली बीमारी है और भारत में हर साल इसके मामले सामने आते हैं। बीमारी से बचाव के लिए अभी तक मच्छरों की रोकथाम, घरों और आसपास पानी जमा न होने देना, मच्छरदानी या रिपेलेंट का इस्तेमाल और संक्रमित मरीजों की समय पर पहचान जैसे उपायों पर जोर दिया जाता रहा है।
ऐसे में देश में पहली स्वीकृत डेंगू वैक्सीन का उपलब्ध होना रोकथाम के प्रयासों में एक नया आयाम जोड़ सकता है। हालांकि, निजी बाजार में इसकी उपलब्धता के बाद वास्तविक पहुंच काफी हद तक कीमत, टीकाकरण केंद्रों की उपलब्धता और लोगों में जागरूकता पर निर्भर करेगी।
फिलहाल QDENGA के भारत में निजी बाजार में आने की संभावित समयसीमा 2027 की पहली छमाही बताई गई है। इसके बाद 4 से 60 वर्ष की उम्र के पात्र लोगों के लिए डेंगू से बचाव का एक नया टीकाकरण विकल्प उपलब्ध होगा। वहीं, भारत के सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में इसे शामिल करने का विषय भविष्य की नीति और संबंधित प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।