दिल्ली के गुलमोहर पार्क, पंचशील पार्क और हौजखास जैसे इलाकों में नलों से आ रहा गंदा और बदबूदार पानी। दूषित पानी से फैल रही बीमारियाँ, क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रही है सरकार?
दिल्ली की राजधानी के कई पॉश इलाकों में इस समय नलों से आ रहा बदबूदार और दूषित पानी एक गंभीर स्वास्थ्य आपदा की चेतावनी दे रहा है। साउथ दिल्ली के गुलमोहर पार्क, पंचशील पार्क और हौजखास जैसे इलाकों में निवासियों को सीवर मिश्रित पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे लोगों के बीमार पड़ने की खबरें लगातार आ रही हैं।
जनता की सेहत पर भारी संकट
डायरिया, पेट की बीमारियां और इन्फेक्शन – क्या किसी हादसे का इंतजार कर रही है भाजपा सरकार?
राजधानी के कई इलाकों में नलों से गंदा और बदबूदार पानी आने के शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
साउथ दिल्ली के कई पॉश इलाकों में निवासी सीवर वाले बदबूदार पानी से परेशान हैं, जिसमें गुलमोहर… pic.twitter.com/7JIgjczvoL
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) May 28, 2026
दूषित पानी के कारण बच्चों और बुजुर्गों में डायरिया, पेट के इन्फेक्शन और बुखार के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पानी का रंग पीला, मटमैला और काला हो चुका है, जो सीधे तौर पर स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। कई परिवारों को मजबूरी में अब टैंकरों और बोतलबंद पानी पर निर्भर होना पड़ रहा है।
‘आप’ का बड़ा हमला: भाजपा सरकार की नाकामी
आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस जल संकट के लिए सीधे तौर पर दिल्ली में सत्ताधारी भाजपा पर निशाना साधा है। AAP नेताओं ने आरोप लगाया है कि:
- DJB में खाली पद: दिल्ली जल बोर्ड (DJB) में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद एक महीने से अधिक समय से खाली है, जिससे नीतिगत फैसले लेने में देरी हो रही है और पानी का प्रबंधन पूरी तरह चरमरा गया है।
- तैयारी का अभाव: पार्टी का आरोप है कि भाजपा सरकार भीषण गर्मी और बढ़ती पानी की मांग को देखते हुए किसी भी तरह की पूर्व-तैयारी करने में विफल रही है।
- जिम्मेदारी से पलायन: AAP का दावा है कि जहाँ एक तरफ हजारों परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं सरकार जनता की समस्याओं को सुलझाने के बजाय केवल आरोप-प्रत्यारोप में व्यस्त है।
क्या किसी बड़ी दुर्घटना का है इंतजार?
साउथ दिल्ली के पॉश इलाकों में पानी की यह बदहाल स्थिति यह दर्शाती है कि बुनियादी ढांचे का रखरखाव पूरी तरह उपेक्षित है। विशेषज्ञों और निवासियों का कहना है कि पुरानी पाइपलाइनों के क्षरण और सीवर लाइनों के साथ उनके जुड़ाव की समस्या को समय रहते ठीक नहीं किया गया, तो यह संकट किसी बड़ी महामारी का रूप ले सकता है।