दिल्ली का ‘एक्स-रे’ घोटाला: 45 करोड़ की मशीनें 148 करोड़ में खरीदीं! आखिर किसकी जेब में गए 103 करोड़?

दिल्ली का 'एक्स-रे' घोटाला: 45 करोड़ की मशीनें 148 करोड़ में खरीदीं! आखिर किसकी जेब में गए 103 करोड़?

 

स्वास्थ्य विभाग में 103 करोड़ का बड़ा घोटाला! सौरभ भारद्वाज ने बीजेपी सरकार पर एक्स-रे मशीन खरीद में धांधली का आरोप लगाया।

दिल्ली में बीजेपी सरकार के भ्रष्टाचार का एक और स्याह अध्याय सामने आया है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर आम आदमी की गाढ़ी कमाई को कैसे लूटा जाता है, इसका जीता-जागता उदाहरण ‘एक्स-रे मशीन घोटाला’ है। बीजेपी सरकार और उनके चहेते ‘राजीव रंगीला’ की मिलीभगत से हुए इस 103 करोड़ के घोटाले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

10 लाख की मशीन के लिए 33 लाख क्यों दिए?

मामला बेहद सीधा है। बाजार में और अन्य सरकारी विभागों में जो एक्स-रे मशीनें 10 लाख रुपये प्रति यूनिट की दर से उपलब्ध हैं, उन्हें बीजेपी की रेखा गुप्ता सरकार ने 33 लाख रुपये प्रति यूनिट के भाव से खरीदा। कुल 448 मशीनों की खरीद के नाम पर 148 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि इन मशीनों की वास्तविक कीमत मात्र 45 करोड़ रुपये थी।

सीधा गणित है—45 करोड़ की चीज के लिए 148 करोड़ रुपये का भुगतान करना, यह किसी को भी समझ आ सकता है कि बाकी के 103 करोड़ रुपये सीधे तौर पर कमीशन के रूप में लूटे गए हैं।

टेंडर में धांधली: बीजेपी का ‘राजीव रंगीला’ कौन?

इस पूरे घोटाले के पीछे के ‘मास्टरमाइंड’ के रूप में राजीव रंगीला का नाम सामने आया है। आरोप है कि टेंडर की शर्तों को इस तरह से ‘मैनिपुलेट’ (हेरफेर) किया गया ताकि सिर्फ चुनिंदा कंपनियों को ही फायदा पहुँचाया जा सके। यह घोटाला तब तक संभव नहीं था जब तक कि सरकार में बैठे उच्च पदों पर बैठे लोगों का संरक्षण न हो।

  • आखिर किसके इशारे पर टेंडर की शर्तों को बदला गया?
  • बाजार मूल्य से तीन गुना अधिक कीमत पर मशीनें खरीदने का आदेश किसने दिया?
  • 103 करोड़ के इस महाघोटाले में शामिल बीजेपी के बड़े नेता कौन हैं?

दिल्ली की जनता जवाब मांगती है

बीजेपी सरकार ने दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘भ्रष्टाचार का अड्डा’ बना दिया है। जब स्कूलों और अस्पतालों में सुधार की बात आती है, तो ये लोग टेंडर के नाम पर घोटाला करते हैं। हम इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हैं। 103 करोड़ रुपये जनता का पैसा है, जो किसी की जेब में नहीं जाने दिया जाएगा।

दिल्ली की जनता अब यह समझ चुकी है कि ‘डबल इंजन’ सरकार का मतलब ‘डबल भ्रष्टाचार’ है। इस घोटाले में शामिल हर एक चेहरे को बेनकाब किया जाएगा।

 

 

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