AAP नेता संजीव ने दिल्ली की छात्राओं की साइकिल योजना में कथित अनियमितता का आरोप लगाया। उन्होंने महंगी साइकिल दिखाकर सस्ती साइकिल देने और टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
दिल्ली की राजनीति में साइकिल वितरण योजना को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है। AAP नेता संजीव ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दिल्ली की छात्राओं को महंगी साइकिल देने का दावा दिखाकर उन्हें सस्ती साइकिलें दी गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में टेंडर को निर्माता कंपनी को देने के बजाय किसी दुकानदार को सौंप दिया गया।
संजीव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए बीजेपी पर निशाना साधते हुए इसे कथित घोटाला बताया। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से नहीं होती है। ऐसे में पूरे मामले में संबंधित विभाग और दिल्ली सरकार का पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
AAP नेता संजीव ने लगाए गंभीर आरोप
AAP नेता संजीव ने अपने बयान में बीजेपी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी से जुड़ा एक और कथित घोटाला सामने आया है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली की महिला छात्रों के लिए साइकिल खरीदने की प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं हुई हैं।
संजीव के मुताबिक, छात्राओं को महंगी साइकिलें उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन वास्तविक तौर पर उन्हें कम कीमत वाली साइकिलें दी गईं। उन्होंने इस पूरे मामले में खरीद प्रक्रिया और टेंडर आवंटन को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
AAP नेता का आरोप है कि साइकिलों की खरीद का टेंडर सीधे किसी निर्माता को देने के बजाय एक दुकानदार को दिया गया। उनका कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया से सरकारी खरीद में पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
महंगी और सस्ती साइकिल के अंतर को लेकर सवाल
बीजेपी घोटालेबाज़ों की पार्टी है।
इनके एक और नए घोटाले का हमने आज पर्दाफाश किया जिसमें इन्होंने महंगी साइकिल की खरीद दिखाकर दिल्ली की छात्राओं को सस्ती साइकिल पकड़ा दी।
हैरानी तो इस बात की है कि निर्माता को टेंडर न देकर किसी दुकान वाले को टेंडर दे दिया।@Sanjeev_aap pic.twitter.com/J9pulrXLbR
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 10, 2026
संजीव ने जिस मुद्दे को उठाया है, उसका मुख्य केंद्र साइकिलों की कीमत और गुणवत्ता से जुड़ा है। उनका दावा है कि सरकारी स्तर पर महंगी साइकिलों की खरीद का प्रदर्शन या प्रस्ताव दिखाया गया, जबकि छात्राओं को कथित तौर पर सस्ती साइकिलें उपलब्ध कराई गईं।
यदि खरीद दस्तावेजों में दर्ज कीमत और छात्राओं को उपलब्ध कराई गई साइकिल की वास्तविक बाजार कीमत के बीच बड़ा अंतर साबित होता है, तो इससे सरकारी खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि, इस अंतर को साबित करने के लिए टेंडर दस्तावेज, सप्लाई ऑर्डर, साइकिलों के मॉडल और भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।
निर्माता के बजाय दुकानदार को टेंडर देने का आरोप
AAP नेता संजीव ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया है। उनके अनुसार, छात्राओं के लिए साइकिल खरीदने का काम निर्माता कंपनी को देने के बजाय किसी दुकानदार को दिया गया।
सरकारी खरीद में आम तौर पर टेंडर की शर्तों, पात्रता, तकनीकी मानकों, कीमत और प्रतिस्पर्धी बोली के आधार पर आपूर्तिकर्ता का चयन किया जाता है। ऐसे में यदि किसी योजना में निर्माता के बजाय किसी विक्रेता या दुकानदार को ठेका दिया गया है, तो उसके पीछे अपनाई गई प्रक्रिया और पात्रता की जानकारी सार्वजनिक होना महत्वपूर्ण है।
हालांकि, केवल दुकानदार को टेंडर दिए जाने से अपने आप में अनियमितता साबित नहीं होती। यदि टेंडर की शर्तों के तहत संबंधित विक्रेता पात्र था और उसने निर्धारित प्रक्रिया के तहत बोली लगाकर ठेका हासिल किया, तो यह नियमों के अनुरूप भी हो सकता है। इसलिए इस मामले में दस्तावेजों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
छात्राओं को साइकिल देने की योजना क्यों अहम?
दिल्ली में छात्राओं को साइकिल उपलब्ध कराने जैसी योजनाओं का उद्देश्य शिक्षा तक उनकी पहुंच को आसान बनाना और स्कूल या शिक्षण संस्थान तक आने-जाने में मदद करना होता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की छात्राओं के लिए परिवहन की सुविधा शिक्षा जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
ऐसे में यदि किसी सरकारी योजना में खरीद की कीमत, साइकिल की गुणवत्ता या वितरण प्रक्रिया को लेकर सवाल उठते हैं, तो इसका सीधा असर लाभार्थी छात्राओं पर पड़ सकता है। यही वजह है कि ऐसी योजनाओं में पारदर्शी खरीद प्रक्रिया और गुणवत्तापूर्ण सामग्री की आपूर्ति महत्वपूर्ण मानी जाती है।
AAP ने BJP सरकार पर साधा निशाना
संजीव के आरोप के बाद AAP ने इस मुद्दे को दिल्ली की BJP सरकार के खिलाफ राजनीतिक हमले के तौर पर उठाया है। उन्होंने दावा किया कि यह BJP सरकार से जुड़ा एक और कथित घोटाला है। AAP नेता ने सरकार से इस मामले में जवाब देने और खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
वहीं, यदि सरकार या संबंधित विभाग इन आरोपों का जवाब देता है, तो टेंडर की प्रक्रिया, साइकिलों की वास्तविक कीमत, निर्माता या आपूर्तिकर्ता की जानकारी और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।
जांच और दस्तावेजों से साफ होगी तस्वीर
फिलहाल यह मामला AAP नेता संजीव द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर सामने आया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि साइकिल खरीद से संबंधित टेंडर दस्तावेजों में क्या शर्तें थीं, किस कंपनी या विक्रेता को काम दिया गया, प्रति साइकिल कितनी कीमत तय की गई और छात्राओं को वास्तव में कौन-सा मॉडल उपलब्ध कराया गया।
अगर जांच में खरीद प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन, कीमत में अनियमितता या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है। फिलहाल AAP ने इन सवालों को उठाकर दिल्ली की राजनीति में एक नया मुद्दा सामने रख दिया है।