दिल्ली बन रही ‘हादसों का शहर’, ‘फोर-इंजन’ सरकार के दावों के बीच सिस्टम की विफलता पर आप (AAP) का हमला

दिल्ली बन रही 'हादसों का शहर', 'फोर-इंजन' सरकार के दावों के बीच सिस्टम की विफलता पर आप (AAP) का हमला

 

दिल्ली में लगातार बढ़ते अग्निकांड और हादसों पर आम आदमी पार्टी का बड़ा हमला। ‘फोर-इंजन’ सरकार की विफलता पर आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने उठाए सवाल।

देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों लगातार हो रही आगजनी और इमारतों के गिरने की घटनाओं के कारण एक असुरक्षित शहर में तब्दील हो गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली में भाजपा की ‘फोर-इंजन’ सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही और जवाबदेही की कमी का नतीजा करार दिया है।

हादसों का सिलसिला: क्या भाजपा को जनता की जान की परवाह नहीं?

बीते कुछ दिनों में दिल्ली ने एक के बाद एक कई त्रासदियां देखी हैं, जिसने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिए हैं:

  • मालवीय नगर अग्निकांड: साकेत के पास स्थित ‘फ्लोरिश स्टेस’ बी एंड बी (B&B) गेस्ट हाउस में लगी भीषण आग में 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जांच में खुलासा हुआ कि इमारत बिना फायर एनओसी (NOC) के चल रही थी और वहां अनुमत 6 कमरों के बजाय 26 कमरे अवैध रूप से संचालित थे।
  • सैदुलजाब इमारत हादसा: इससे ठीक चार दिन पहले सैदुलजाब में एक निर्माणाधीन इमारत गिरने से 6 लोगों की मौत हो गई, जिनमें कई युवा छात्र शामिल थे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध निर्माण की शिकायत के बावजूद नगर निगम (MCD) ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
  • पलाम और विवेक विहार: आप (AAP) नेताओं ने याद दिलाया कि फरवरी में पलाम और विवेक विहार में हुई आगजनी की घटनाओं में भी कई जानें गई थीं, लेकिन उन घटनाओं की जांच रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

आप (AAP) का आरोप: सरकार केवल ‘टूलकिट’ और झूठे वादों में माहिर

आम आदमी पार्टी के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार का मतलब विकास नहीं, बल्कि केवल आपदाओं का प्रबंधन बनकर रह गया है। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि:

  • जवाबदेही का अभाव: सरकार हर बड़े हादसे के बाद जांच का वादा करती है, लेकिन रिपोर्ट कभी सामने नहीं आती।
  • देरी से राहत: फायर ब्रिगेड की प्रतिक्रिया में औसतन 45 मिनट से डेढ़ घंटे तक की देरी हो रही है, जो मौतों की संख्या बढ़ने का एक बड़ा कारण है।
  • पीड़ितों को दोष देना: सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए पीड़ितों को ही जिम्मेदार ठहरा रही है, जबकि असली कसूर उन अधिकारियों का है जिन्होंने अवैध निर्माणों को संरक्षण दिया है।

सुधार की मांग और भविष्य पर संकट

दिल्ली में पिछले कुछ समय के दौरान इमारतें गिरने की कई घटनाएं दर्ज की गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अनधिकृत कॉलोनियों में घटिया निर्माण सामग्री और नियमों की अनदेखी एक बड़े “संस्थागत संकट” की ओर इशारा करती है। आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए और दिल्ली की अग्निशमन सेवा के बुनियादी ढांचे को तत्काल दुरुस्त किया जाए।

भाजपा सरकार की ओर से हालांकि यह आश्वासन दिया गया है कि अवैध इमारतों के खिलाफ ‘क्रैकडाउन’ शुरू किया गया है और दोषियों की गिरफ्तारी हो रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह महज एक तात्कालिक प्रतिक्रिया है या वाकई में सिस्टम में कोई ठोस बदलाव आएगा? फिलहाल, दिल्ली की जनता के लिए यह सवाल अनुत्तरित है कि आखिर कब तक उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर इन असुरक्षित परिस्थितियों में रहना पड़ेगा।

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