दिल्ली में दिवाली से पहले वायु प्रदूषण बढ़ने लगा है। आनंद विहार और विवेक विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक खराब श्रेणी में दर्ज हुआ। जानें प्रदूषण के कारण, सेहत पर असर और बचाव के उपाय।
दिल्ली में सर्दियों की शुरुआत से पहले ही वायु प्रदूषण का असर दिखने लगा है। राजधानी के कई इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है और लोगों को आने वाले दिनों में प्रदूषण बढ़ने की चिंता सताने लगी है। 14 अक्टूबर 2026 की सुबह 6 बजे आनंद विहार और विवेक विहार के वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) क्रमशः 268 और 272 दर्ज किया गया। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के दिल्ली वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी तंत्र के आंकड़ों के अनुसार, इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई थी। चिंता की बात यह है कि दिवाली का त्योहार अभी आया भी नहीं है और प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में मौसम की परिस्थितियां और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत दिल्ली-एनसीआर की हवा को और खराब कर सकते हैं। प्रदूषित हवा केवल आंखों में जलन या गले में खराश तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर फेफड़ों, सांस लेने की क्षमता और लंबे समय में संपूर्ण स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
दिवाली से पहले ही क्यों बढ़ने लगा दिल्ली का प्रदूषण?
दिल्ली में अक्टूबर के महीने से वायु प्रदूषण की समस्या धीरे-धीरे गंभीर होने लगती है। गर्मियों और मानसून के दौरान हवा की गति, बारिश और वातावरण की अन्य परिस्थितियां प्रदूषकों को फैलाने या कम करने में मदद कर सकती हैं। लेकिन मौसम ठंडा होने के साथ परिस्थितियां बदलने लगती हैं। तापमान में गिरावट, हवा की कमजोर गति और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव में कमी के कारण धूल, धुआं और अन्य हानिकारक कण जमीन के नजदीक जमा हो सकते हैं। इससे लोगों के लिए प्रदूषित हवा में सांस लेना अधिक मुश्किल हो सकता है। दिवाली के आसपास पटाखों से निकलने वाला धुआं भी कुछ समय के लिए प्रदूषण बढ़ा सकता है। हालांकि, राजधानी की खराब होती हवा के पीछे केवल पटाखे ही जिम्मेदार नहीं होते। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और आसपास के राज्यों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी प्रदूषण की समस्या को बढ़ा सकता है।
आनंद विहार और विवेक विहार में AQI 270 के आसपास
14 अक्टूबर की सुबह आनंद विहार में AQI 268 और विवेक विहार में 272 दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक के सामान्य वर्गीकरण के अनुसार, 201 से 300 के बीच का AQI खराब श्रेणी में आता है। इस स्तर की हवा में लंबे समय तक रहने से लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। खासकर अस्थमा, एलर्जी या सांस की अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से हृदय या फेफड़ों की समस्या वाले लोगों पर भी प्रदूषण का अधिक असर पड़ सकता है। हालांकि, अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर अलग हो सकता है और हवा की गुणवत्ता दिनभर मौसम तथा उत्सर्जन की परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। इसलिए किसी एक निगरानी केंद्र के आंकड़े को पूरी दिल्ली की हवा की स्थिति नहीं माना जाना चाहिए।
प्रदूषित हवा से फेफड़ों पर क्या असर पड़ता है?
वायु प्रदूषण में मौजूद सूक्ष्म कण, खासकर PM2.5, सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इन कणों का आकार बेहद छोटा होता है, इसलिए शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली के लिए इन्हें पूरी तरह रोक पाना मुश्किल हो सकता है। लगातार प्रदूषित हवा में सांस लेने से खांसी, गले में जलन, सांस फूलना और सीने में असहजता जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) है, उनमें इसके लक्षण ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित होने और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ने की आशंका भी रहती है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर इसका कितना असर होगा, यह प्रदूषण के स्तर, संपर्क की अवधि, उम्र और उसकी मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
आंखों में जलन से लेकर सांस की परेशानी तक, दिख सकते हैं ये लक्षण
प्रदूषित हवा के संपर्क में आने पर कई लोगों को आंखों में जलन, पानी आना, नाक में खुजली, गले में खराश और लगातार खांसी जैसी परेशानियां महसूस हो सकती हैं। कुछ लोगों को सिरदर्द या सामान्य से ज्यादा थकान भी हो सकती है। जिन लोगों को सांस की बीमारी है, उन्हें घरघराहट, सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी बढ़ने का अनुभव हो सकता है। अगर सांस लेने में गंभीर कठिनाई हो, सीने में दर्द हो या होंठ नीले पड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बच्चों में लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या असामान्य सुस्ती जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि प्रदूषण का असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं दिखता और कुछ लोगों को शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते।
दिल्ली में प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?
हवा की गुणवत्ता खराब होने पर कुछ सावधानियां अपनाकर प्रदूषण के संपर्क को कम किया जा सकता है। सबसे पहले, बाहर निकलने से पहले अपने इलाके का ताजा AQI जांचें। प्रदूषण ज्यादा होने पर लंबे समय तक बाहर व्यायाम करने, दौड़ने या तेज शारीरिक गतिविधि से बचें। जरूरी काम से बाहर जाना हो, तो अच्छी तरह फिट होने वाला N95 या उसके समकक्ष प्रमाणित मास्क उपयोगी हो सकता है। कपड़े या सामान्य सर्जिकल मास्क सूक्ष्म प्रदूषक कणों से पर्याप्त सुरक्षा नहीं देते। घर के अंदर खिड़कियां बंद रखना तब मददगार हो सकता है, जब बाहर की हवा ज्यादा प्रदूषित हो। उपलब्ध होने पर सही क्षमता वाला एयर प्यूरीफायर भी घर के भीतर कणों का स्तर कम करने में सहायता कर सकता है। अस्थमा या दूसरी सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी दवाएं लेते रहें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लें।
आने वाले दिनों में दिल्लीवासियों को रहना होगा सतर्क
दिवाली से पहले ही दिल्ली के कुछ इलाकों में हवा की गुणवत्ता खराब होने लगी है। सर्दियों में तापमान, हवा की गति और वातावरण की परिस्थितियां प्रदूषण को बढ़ा सकती हैं, इसलिए आने वाले दिनों में निगरानी और सावधानी दोनों महत्वपूर्ण होंगे। प्रदूषण से बचाव के लिए लोगों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने के साथ-साथ कचरा या पत्तियां जलाने से बचना चाहिए और निजी वाहनों के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने जैसे कदम भी अपनाने चाहिए। वहीं, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, वाहनों के उत्सर्जन पर निगरानी और औद्योगिक प्रदूषण को सीमित करने के लिए प्रभावी कदम उठाना भी जरूरी है। दिल्ली में प्रदूषण केवल मौसम की समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौती है। समय रहते सावधानी बरतने और प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण से इसके असर को कम करने में मदद मिल सकती है।