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रामायण की अभिनेत्री दीपिका चिखलिया ने आगामी ‘रामायण’ फिल्म के लिए रणबीर कपूर और साई पल्लवी की तारीफ की। कहा- दोनों कलाकार अपने किरदारों को खूबसूरती से निभाएंगे।
रामानंद सागर की ‘रामायण’ में माता सीता का अमर किरदार निभाने वाली अभिनेत्री दीपिका चिखलिया आज भी लाखों लोगों के लिए श्रद्धा का केंद्र हैं। दशकों बाद भी, जब लोग उन्हें देखते हैं, तो वे दीपिका को नहीं, बल्कि माता सीता को देखते हैं। हाल ही में अपनी आगामी फिल्म ‘तेरा मेरा नाता’ के प्रमोशन के दौरान, दीपिका ने न केवल अपने पुराने दिनों को याद किया, बल्कि नितेश तिवारी की आगामी फिल्म में भगवान राम और माता सीता की भूमिका निभाने जा रहे रणबीर कपूर और साई पल्लवी पर भी अपना भरोसा जताया है।
रणबीर-साई पल्लवी पर जताया विश्वास
आगामी फिल्म ‘रामायण’ को लेकर दर्शकों में भारी उत्सुकता है। इस पर बात करते हुए दीपिका चिखलिया ने कहा कि वह रणबीर कपूर और साई पल्लवी के काम से पूरी तरह आश्वस्त हैं। उन्होंने कहा, “दोनों ही बेहतरीन अभिनेता हैं। मैंने साई पल्लवी का काम देखा है और वह एक असाधारण अभिनेत्री हैं। रणबीर कपूर भी एक उत्कृष्ट कलाकार हैं। मुझे पूरा यकीन है कि वे दोनों अपने किरदारों को बेहद खूबसूरती और गरिमा के साथ पर्दे पर उतारेंगे।”
दीपिका का मानना है कि रामायण एक ऐसी कहानी है जिसे हर युग में नए तरीके से सुनाया जा सकता है। यह महाकाव्य आस्था और मूल्यों पर टिका है, इसलिए इसका महत्व कभी कम नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यह पहले भी बनी है और आगे भी बनती रहेगी क्योंकि इसकी नींव ही मानवीय मूल्यों और विश्वास पर आधारित है।
‘दीपिका नहीं, सीता माता के प्रति है भक्तों का सम्मान’
दीपिका ने उन भावुक क्षणों को भी याद किया जब लोग आज भी उन्हें देखकर उनके पैर छूने लगते हैं। उन्होंने साझा किया कि शुरुआत में उनके लिए यह समझना मुश्किल था कि लोग उन्हें इतनी श्रद्धा क्यों देते हैं। बाद में उन्हें अहसास हुआ कि वे दीपिका को नहीं, बल्कि उनके द्वारा निभाए गए सीता माता के स्वरूप को सम्मान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं लोगों की भावनाओं का सम्मान करती हूँ। यह उनका प्यार और विश्वास है जो उन्हें ऐसा करने के लिए प्रेरित करता है।”
एक युग का अंत और रामायण का जादू
वर्ष 1987 में दूरदर्शन पर प्रसारित हुई ‘रामायण’ भारतीय टेलीविजन के इतिहास की एक ऐसी घटना थी जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उस दौर में, जब टेलीविजन हर घर में नहीं हुआ करते थे, लोग रविवार की सुबह अपने काम-काज छोड़कर टीवी सेट के सामने बैठ जाते थे। सड़कें सुनसान हो जाती थीं। अरुण गोविल (राम), सुनील लहरी (लक्ष्मण), अरविंद त्रिवेदी (रावण) और दारा सिंह (हनुमान) के साथ दीपिका चिखलिया का यह सफर 1988 तक चला और इसने सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।
साल 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जब इसे दोबारा प्रसारित किया गया, तो आज की पीढ़ी ने भी इसे उतना ही प्यार दिया, जितना 80 के दशक में मिला था। यह इस महाकाव्य की शाश्वत अपील को सिद्ध करता है।
नई फिल्म ‘तेरा मेरा नाता’ के लिए अपील
अपनी नई फिल्म ‘तेरा मेरा नाता’ के बारे में बात करते हुए दीपिका ने दर्शकों से सिनेमाघरों में आकर दिल से बनी फिल्मों को समर्थन देने की अपील की। उन्होंने कहा, “इस फिल्म को बहुत मेहनत और सच्चाई के साथ बनाया गया है। हर कलाकार और तकनीशियन ने इसमें अपना सब कुछ लगा दिया है। मैं चाहती हूँ कि लोग इसे अपने परिवार के साथ देखें। यह फिल्म लोगों के इस विश्वास को मजबूत करेगी कि छोटी फिल्में भी अपने कंटेंट के दम पर लोगों का दिल जीत सकती हैं और सफल हो सकती हैं।”
भारतीय सिनेमा और मूल्यों का संगम
दीपिका चिखलिया का करियर इस बात का प्रमाण है कि एक सही चुनाव और एक सशक्त किरदार अभिनेता को अमर बना देता है। जहाँ एक ओर वे आज की रामायण के कलाकारों का हौसला बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर वे नई फिल्मों के जरिए दर्शकों को एक बार फिर से सार्थक सिनेमा की ओर ले जाने की कोशिश कर रही हैं। उनका यह दृष्टिकोण कि ‘सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भावनाओं का एक माध्यम है’, उन्हें आज के दौर के अन्य अभिनेताओं से अलग खड़ा करता है। दीपिका की बातें यह स्पष्ट करती हैं कि चाहे युग कोई भी हो, रामायण जैसे महाकाव्य और अच्छे सिनेमा के प्रति लोगों का प्रेम हमेशा बरकरार रहेगा।