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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कच्चा तेल $100 के पार पहुँचा। डॉलर की मजबूती से भारतीय रुपया 95.31 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिरा। भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने की संभावना।
वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्ताव विफल होने और संभावित सैन्य कार्रवाई की खबरों ने ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार और मुद्रा बाजार पर भी देखने को मिल रहा है, जहाँ रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में आग: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संकट
मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रुख जारी रहा। रिपोर्टों के अनुसार, शांति प्रस्तावों के विफल होने के बाद अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार करने की संभावना ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है। सबसे बड़ा डर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने को लेकर है, जो वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग है।
इस तनाव के चलते WTI फ्यूचर्स 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ $100 प्रति बैरल के आसपास पहुँच गया है, जबकि ब्रेंट क्रूड (Brent) $105 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है, तो कीमतों में और भी इजाफा हो सकता है।
डॉलर में मजबूती और ऐतिहासिक निचले स्तर पर रुपया
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक जोखिम के कारण ‘सेफ हेवन’ निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ गई है। मंगलवार को डॉलर इंडेक्स फिर से 98 के स्तर को पार कर गया। डॉलर के मजबूत होने का सीधा नकारात्मक असर भारतीय रुपये पर पड़ा है। रुपया मंगलवार को अपने सर्वकालिक निचले स्तर 95.31 पर गिर गया। रुपये की इस कमजोरी से भारत के आयात बिल में बढ़ोतरी होगी, जो अंततः घरेलू महंगाई को बढ़ावा दे सकता है।
शेयर बाजारों में मंदी का साया: एशियाई और घरेलू बाजार
एशियाई बाजारों में मंगलवार को मिला-जुला रुख रहा। जापान का निक्केई 225 मामूली बढ़त के साथ 62,443 पर ट्रेड कर रहा था। वहीं, दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) 2.20 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 7,642 पर आ गया।
भारतीय शेयर बाजार के लिए गिफ्ट निफ्टी (Gift Nifty) ने नकारात्मक शुरुआत के संकेत दिए हैं। शाम 7:30 बजे के करीब गिफ्ट निफ्टी लगभग 130 अंक या आधा प्रतिशत गिरकर 23,656 के स्तर पर था। विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार की भारी बिकवाली (करीब 1.5-1.7%) के बाद बाजार में सतर्कता बनी रहेगी। ‘लिवलॉन्ग वेल्थ’ के संस्थापक हरिप्रसाद के. के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें घरेलू सूचकांकों पर दबाव बनाए रखेंगी।
भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव की आहट
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की चिंता बढ़ा दी है। सरकार के आदेश पर 2022 से ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। हालांकि, अब परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के $100 के पार जाने से तेल कंपनियों को भारी दैनिक घाटा उठाना पड़ रहा है।
‘एनरिच मनी’ के सीईओ पोनमुडी आर. के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के जल्द सुलझने के आसार नहीं दिख रहे हैं। ऐसे में तेल कंपनियां अधिक समय तक घाटे को वहन नहीं कर पाएंगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहती हैं, तो कंपनियों को जल्द ही इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालना पड़ सकता है, जिसका अर्थ है कि लंबे समय से स्थिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।