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त्योहारी सीजन से पहले कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू उपकरणों की कीमतों में 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है। AC, टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन खरीदना अब महंगा हो सकता है।
अगर आप इस त्योहारी सीजन में नया एयर कंडीशनर, टेलीविजन, फ्रिज या वॉशिंग मशीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपका बजट पहले के मुकाबले बढ़ सकता है। 1 अक्टूबर से कई कंज्यूमर ड्यूरेबल और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। कीमतों में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब देश में फेस्टिव शॉपिंग सीजन शुरू होने वाला है। उद्योग से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक, कंपनियां बढ़ती इनपुट और लॉजिस्टिक्स लागत के दबाव के बीच अपने उत्पादों की कीमतों को संशोधित कर रही हैं। इससे एयर कंडीशनर, एलईडी टीवी, वॉशिंग मशीन और दूसरे घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खरीदने वाले ग्राहकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ सकता है।
5 से 8 फीसदी तक बढ़ सकती हैं कीमतें
प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, प्रमुख कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और अप्लायंस कंपनियों ने अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों में कीमतें करीब 5 से 8 प्रतिशत तक बढ़ानी शुरू की हैं। कीमतों में बढ़ोतरी सभी उत्पादों या सभी ब्रांडों पर एक समान हो, यह जरूरी नहीं है। कंपनी, मॉडल, फीचर्स और बाजार की स्थिति के आधार पर वास्तविक कीमत में अलग-अलग बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, कुल मिलाकर उद्योग में कीमतों को ऊपर ले जाने का दबाव दिखाई दे रहा है।
इसका असर खास तौर पर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है जो त्योहारी ऑफर के दौरान बड़े घरेलू उपकरण खरीदने की योजना बना रहे हैं। आम तौर पर अक्टूबर से लेकर साल के अंत तक टीवी, रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसे उत्पादों की बिक्री में तेजी आती है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी कंपनियों और ग्राहकों दोनों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
2026 में तीसरी बार कीमतों में बढ़ोतरी
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में कंज्यूमर ड्यूरेबल उद्योग में यह कीमत बढ़ाने का तीसरा दौर है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियों पर लागत से जुड़ा दबाव लगातार बना हुआ है। इससे पहले भी साल के दौरान अलग-अलग चरणों में उत्पादों की कीमतों में बदलाव किए गए थे। अब त्योहारी सीजन से ठीक पहले एक और बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाने का रास्ता खुल सकता है।
किसी भी कंपनी के लिए कीमत बढ़ाने का फैसला कई कारकों पर निर्भर करता है। उत्पादन लागत, कच्चे माल की कीमत, परिवहन खर्च, आयातित कंपोनेंट्स की लागत और वितरण से जुड़ा खर्च इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन लागतों में लगातार वृद्धि होने पर कंपनियां उत्पादों की कीमतों में संशोधन कर सकती हैं।
इनपुट लागत बनी बड़ी वजह
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले कई कंपोनेंट्स और कच्चे माल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर उत्पादन लागत पर पड़ता है। इसके अलावा, वैश्विक सप्लाई चेन में होने वाले बदलाव भी कंपनियों के खर्च को प्रभावित कर सकते हैं। लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने पर फैक्ट्री से डीलर और फिर ग्राहक तक उत्पाद पहुंचाने का खर्च बढ़ जाता है।
एयर कंडीशनर, टीवी, फ्रिज और वॉशिंग मशीन जैसे बड़े उत्पादों के मामले में परिवहन लागत भी महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में इनपुट और लॉजिस्टिक्स दोनों लागत बढ़ने पर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है। इस स्थिति में कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी के जरिए अतिरिक्त लागत का कुछ हिस्सा समायोजित करने की कोशिश करती हैं।
फेस्टिव सीजन में ग्राहकों पर क्या असर होगा?
त्योहारी सीजन भारत में कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बिक्री अवधि होती है। इस दौरान ग्राहक घर के लिए नए उपकरण खरीदने के साथ-साथ पुराने उत्पादों को अपग्रेड करने पर भी खर्च करते हैं। कंपनियां आम तौर पर इस अवधि में एक्सचेंज ऑफर, कैशबैक, बैंक डिस्काउंट और नो-कॉस्ट ईएमआई जैसी योजनाएं पेश करती हैं।
कीमतों में 5 से 8 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने के बावजूद ग्राहकों को कुछ ऑफर्स से राहत मिल सकती है। हालांकि, अंतिम कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनी की कीमत बढ़ोतरी कितनी है और खुदरा विक्रेता या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म किस तरह की छूट दे रहे हैं। इसलिए किसी उत्पाद को खरीदने से पहले अलग-अलग विक्रेताओं की कीमत और ऑफर की तुलना करना उपयोगी हो सकता है।
किन उत्पादों पर पड़ेगा असर?
कीमतों में बढ़ोतरी का असर कई प्रमुख कंज्यूमर ड्यूरेबल श्रेणियों पर पड़ सकता है। इनमें एयर कंडीशनर, एलईडी टीवी, रेफ्रिजरेटर और वॉशिंग मशीन प्रमुख हैं। इसके अलावा अन्य घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी लागत दबाव के कारण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, हर मॉडल की कीमत में एक जैसा बदलाव जरूरी नहीं है।
विशेष रूप से प्रीमियम फीचर्स वाले उत्पादों में कीमत का असर अलग हो सकता है, जबकि बजट सेगमेंट में कंपनियां प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए कीमतों में बदलाव को सीमित रखने की कोशिश कर सकती हैं। इसका अंतिम प्रभाव आने वाले हफ्तों में बाजार में उत्पादों की नई कीमतों और त्योहारी ऑफर्स के सामने आने के बाद अधिक स्पष्ट होगा।
खरीदारी से पहले कीमतों की तुलना जरूरी
फेस्टिव सीजन में बड़ी खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए नई कीमतों और उपलब्ध ऑफर्स की तुलना करना महत्वपूर्ण हो सकता है। केवल एमआरपी देखने के बजाय एक्सचेंज बोनस, बैंक ऑफर, कैशबैक, ईएमआई और डिलीवरी चार्ज को जोड़कर वास्तविक भुगतान राशि की तुलना करनी चाहिए। साथ ही, अलग-अलग ऑनलाइन और ऑफलाइन विक्रेताओं पर एक ही मॉडल की कीमत भी देखी जा सकती है।
कुल मिलाकर, 1 अक्टूबर से शुरू हुई कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में बढ़ोतरी त्योहारी खरीदारी के समय ग्राहकों के बजट को प्रभावित कर सकती है। PTI के मुताबिक करीब 5 से 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी और 2026 में यह तीसरा मूल्य संशोधन उद्योग पर बढ़ती लागत के दबाव को दर्शाता है। हालांकि, त्योहारी सीजन में कंपनियों और खुदरा विक्रेताओं की ओर से मिलने वाले ऑफर्स अंतिम खरीद कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।