परीक्षा सुधार के लिए नंदन नीलेकणी टास्क फोर्स पर कांग्रेस ने साधा निशाना। जयराम रमेश ने कहा- ‘कमेटी बनाओ, ध्यान भटकाओ’, राधाकृष्णन कमेटी की सिफारिशें अब तक अधूरी।
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन और उनमें बार-बार सामने आ रही पेपर लीक जैसी गंभीर गड़बड़ियों को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा एक नई उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स के गठन पर राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी ने इस घोषणा को लेकर मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है और इसे महज एक छलावा तथा ध्यान भटकाने की रणनीति करार दिया है। कांग्रेस महासचिव जयंत रमेश ने सरकार के इस कदम पर करारा तंज कसते हुए इसे ‘कमेटी बनाओ, ध्यान भटकाओ’ (Committee banao, dhyaan bhatkao) का नाम दिया है। उनका आरोप है कि सरकार परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार लाने के बजाय केवल कमेटियों के जाल में उलझकर अपनी राजनीतिक छवि को बचाने का प्रयास कर रही है।
कांग्रेस का तीखा हमला: ‘हवाबाजी और जुमलेबाजी
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कांग्रेस नेता जयंत रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर दो पुराने और नए वीडियो क्लिप साझा करते हुए सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। पहला वीडियो वर्ष 2024 का है, जिसमें तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यह घोषणा की थी कि सरकार परीक्षाओं के पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन को सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करेगी। वहीं, दूसरा वीडियो हालिया है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं में व्यापक सुधार लाने के लिए नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक उच्च-सशक्त टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। रमेश ने पहले वीडियो को “हाई-लेवल हवाबाजी” और प्रधानमंत्री के हालिया वीडियो को “हाई-पावर्ड जुमलेबाजी” की संज्ञा दी है। उनका कहना है कि सरकार हर बार जनता और छात्रों की आंखों में धूल झोंकने के लिए नए आयोग और कमेटियों का शिगूफा छोड़ देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं आता।
के. राधाकृष्णन कमेटी की 101 सिफारिशें अब तक लागू नहीं
कांग्रेस पार्टी का मुख्य तर्क यह है कि जून 2024 में जब NEET-UG और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधलियाँ और पेपर लीक हुए थे, तब मोदी सरकार ने इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। इस समिति ने देश की परीक्षा प्रणाली को सुधारने के लिए 101 महत्वपूर्ण सिफारिशें सौंपी थीं। कांग्रेस का दावा है कि सरकार ने आज तक उन 101 सिफारिशों को पूरी तरह से लागू नहीं किया है। जयंत रमेश ने कटाक्ष करते हुए कहा कि 2024 से 2026 के बीच हुए पेपर लीक के इस दो साल के लंबे अंतराल में सरकार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के लिए एक नियमित और पूर्णकालिक महानिदेशक (DG) तक नियुक्त करने में विफल रही है। ऐसे में एक और नई टास्क फोर्स का गठन करना केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनता के बीच से धूमिल हो चुकी छवि को बचाने का एक हताशा भरा प्रयास मात्र है।
नंदन नीलेकणी के नेतृत्व में गठित नई उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स
विपक्ष के इन तीखे हमलों के बीच, केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में संरचनात्मक और तकनीकी सुधार लाने के लिए एक बहु-विषयक (multidisciplinary) टास्क फोर्स का गठन किया है। देश के प्रमुख तकनीकी दिग्गजों और अधिकारियों को इस समिति में जगह दी गई है। इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता वाली इस उच्च-सशक्त टास्क फोर्स में कई प्रतिष्ठित हस्तियों को शामिल किया गया है। इनमें इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, खुफिया ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक तपन डेका, आईआईटी चेन्नई के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक विशेषज्ञ अमृत लाल मीना शामिल हैं। सरकार का आधिकारिक रुख यह है कि यह टास्क फोर्स टेक्नोलॉजी के अधिकतम उपयोग पर जोर देगी ताकि भविष्य में एक ऐसा मजबूत, पारदर्शी और फूलप्रूफ परीक्षा तंत्र विकसित किया जा सके जिसमें सेंध लगाना असंभव हो।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और व्यापक छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम और टास्क फोर्स का गठन देश में चल रहे व्यापक छात्र आंदोलनों और प्रशासनिक फेरबदल की पृष्ठभूमि में हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस टास्क फोर्स की घोषणा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चले 36 दिनों के लंबे और देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के ठीक एक दिन बाद की गई है। इस तीव्र आंदोलन के परिणामस्वरूप अंततः तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। देश भर के छात्रों और युवा वर्ग में परीक्षाओं की शुचिता को लेकर भारी आक्रोश देखा गया था। प्रधानमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में भरोसा दिलाया है कि सरकार इस टास्क फोर्स के प्रत्येक सुझाव पर पूरी गंभीरता से काम करेगी ताकि NTA की परीक्षाओं को तकनीकी और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके।