दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विधानसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में प्रदर्शन किया। उन्होंने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए सत्याग्रह की चेतावनी दी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा परिसर में भाजपा विधायकों के साथ मिलकर विपक्ष के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। एक दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत से ठीक पहले हुए इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य संसद में महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पारित होने में आ रही बाधाओं के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराना था। मुख्यमंत्री और भाजपा विधायकों ने काले कपड़े पहनकर अपना विरोध दर्ज कराया और ‘नारी शक्ति’ के सम्मान में नारे लगाए।
विपक्ष पर ‘विश्वासघात’ का आरोप और निंदा प्रस्ताव
विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने महिलाओं के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने सदन में एक निंदा प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि 16-18 अप्रैल के दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक “दुखद अध्याय” के रूप में याद किए जाएंगे, क्योंकि इन दिनों करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को संसद में धराशायी कर दिया गया। रेखा गुप्ता ने तीखे शब्दों में कहा, “अब याचना नहीं, रण होगा। देश की आधी आबादी के सम्मान और अधिकारों के साथ खिलवाड़ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
विधायिका में महिलाओं की कम भागीदारी पर चिंता
मुख्यमंत्री ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि स्थानीय निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व मजबूत है, लेकिन विधानसभाओं और संसद में यह अभी भी बेहद कम है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विधायकों में केवल 10% और संसद में मात्र 13-14% महिलाएं हैं। सीएम गुप्ता ने जोर देकर कहा कि सामाजिक बाधाओं को देखते हुए महिलाओं को 33% आरक्षण देना अनिवार्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के बाद से शुरू हुई विभिन्न महिला सशक्तिकरण योजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के माध्यम से महिलाओं को उनका हक देने के लिए प्रतिबद्ध है।
ऐतिहासिक पहल: विधायक शिखा राय ने संभाली सदन की कमान
महिला सशक्तिकरण के संदेश को और मजबूती देने के लिए विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सत्र के दौरान एक नई मिसाल पेश की। उन्होंने भाजपा विधायक शिखा राय को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता करने के लिए आमंत्रित किया। शिखा राय ने ‘चेयरपर्सन-इन-चेयर’ के रूप में कार्यवाही का संचालन किया, जिसे मुख्यमंत्री ने प्रतीकात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और सशक्त कदम बताया।