मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया। 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ भूमि का पंजीकरण कराया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला में किसानों से संवाद करते हुए प्राकृतिक खेती को प्रदेश के कृषि विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेती को अधिक टिकाऊ, लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने वर्ष 2022 में प्राकृतिक खेती योजना की शुरुआत की थी। इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता को संरक्षित करना, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ कृषि व्यवस्था तैयार करना है।
also read: कृष्ण कुमार बेदी: हरियाणा की खेल नीति बनी देश के लिए…
2 लाख किसानों ने कराया पंजीकरण
नायब सिंह सैनी ने बताया कि प्रदेश में प्राकृतिक खेती को लेकर किसानों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। अब तक लगभग 2 लाख किसानों ने 3 लाख एकड़ भूमि का प्राकृतिक खेती योजना के तहत पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ता हुआ सहभागिता स्तर सरकार की नीतियों पर किसानों के विश्वास को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP ने पंचकूला में आयोजित प्राकृतिक खेती कार्यशाला में किसानों से संवाद किया।
“हरियाणा सरकार ने वर्ष 2022 में प्राकृतिक खेती योजना की शुरुआत की थी। यह योजना किसान, प्रकृति और भविष्य को जोड़ने वाला एक नया विकास मॉडल है। प्रदेश में प्राकृतिक खेती को…
— DPR Haryana (@DiprHaryana) July 8, 2026
2025-26 में 20,727 एकड़ में हुई प्राकृतिक खेती
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक 20,727 एकड़ भूमि पर प्राकृतिक खेती की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग प्रदान कर रही है ताकि अधिक से अधिक किसान इस खेती पद्धति को अपनाएं।
किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने किसानों से अपनी मिट्टी को स्वस्थ बनाने और प्राकृतिक खेती को अपनाने का संकल्प लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही बेहतर उत्पादन, सुरक्षित खाद्य प्रणाली और पर्यावरण संरक्षण का आधार है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि पद्धति नहीं, बल्कि किसान, प्रकृति और भविष्य को जोड़ने वाला विकास का एक सशक्त मॉडल है। हरियाणा सरकार इस दिशा में निरंतर कार्य कर रही है ताकि प्रदेश के किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनें और कृषि क्षेत्र टिकाऊ विकास की ओर आगे बढ़े।