गुजरात मॉडल की शर्मनाक हकीकत”: आजादी के 78 साल बाद भी प्यासा है तुमडावाड़ी गाँव; चैतर वसावा की टीम ने किया दौरा।

गुजरात मॉडल की शर्मनाक हकीकत": आजादी के 78 साल बाद भी प्यासा है तुमडावाड़ी गाँव; चैतर वसावा की टीम ने किया दौरा।

 

नर्मदा जिले के तुमडावाड़ी गाँव में न पानी है, न सड़क और न ही स्कूल। आंबावाड़ी जिला पंचायत सदस्य घेमसिंगभाई वसावा और AAP कार्यकर्ताओं ने गाँव का दौरा कर ‘गुजरात मॉडल’ की पोल खोल दी है।

“न सड़क, न बिजली, न पानी”: नर्मदा के तुमडावाड़ी गाँव ने खोली ‘गुजरात मॉडल’ की पोल

नर्मदा, गुजरात: देश भर में ‘गुजरात मॉडल’ के नाम पर विकास का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। आज भी गुजरात के आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सांसद चैतर वसावा के निर्देश पर हाल ही में चुने गए आंबावाड़ी जिला पंचायत सदस्य घेमसिंगभाई वसावा, तालुका पंचायत सदस्य जयदीपभाई और AAP कार्यकर्ताओं ने नर्मदा जिले के चिकदा तालुका के तुमडावाड़ी गाँव का दौरा किया, जहाँ के हालात देखकर किसी की भी रूह कांप जाए।

आज़ादी के 78 साल बाद भी ‘अंधेरे’ में गाँव

तुमडावाड़ी गाँव की कुल आबादी लगभग 600 है और यहाँ करीब 130 घर हैं, लेकिन आज तक इस गाँव में बिजली का एक खंभा तक नहीं पहुँचा है। ग्रामीण आज भी नदी का गंदा पानी पीने को मजबूर हैं क्योंकि गाँव में पीने के पानी की कोई सरकारी सुविधा नहीं है। ‘नल से जल’ का वादा यहाँ के लोगों के लिए केवल एक सपना मात्र है।

शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का शून्य होना

AAP टीम ने पाया कि गाँव में 70 से 80 बच्चे स्कूल जाने की उम्र के हैं, लेकिन उनके लिए गाँव में कोई स्कूल नहीं है। वहीं 30 छोटे बच्चों के लिए कोई आंगनवाड़ी केंद्र भी नहीं है। सड़क न होने के कारण इमरजेंसी के समय ‘108 एम्बुलेंस’ भी गाँव तक नहीं पहुँच पाती, जिससे मरीजों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।

कागजों पर भी ‘लापता’ है गाँव वाले

हैरानी की बात यह है कि इस डिजिटल इंडिया के दौर में 600 की आबादी वाले इस गाँव में सिर्फ 71 लोगों के पास पहचान के दस्तावेज हैं। कई लोगों के पास राशन कार्ड तक नहीं है और मात्र 8 लोगों के पास इलेक्शन कार्ड (Voter ID) है। यह स्थिति दर्शाती है कि शासन और प्रशासन ने आदिवासी समुदायों को उनके मौलिक अधिकारों से पूरी तरह वंचित रखा है।

AAP का प्रहार: “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी जिस गुजरात मॉडल का गौरव लेते हैं, उसकी असलियत इन आदिवासी गाँवों की गलियों में दफन है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और पानी जैसी बुनियादी जरूरतें यहाँ विलासिता बन गई हैं। भाजपा सरकार सिर्फ रैलियों और विज्ञापनों में व्यस्त है, जबकि आदिवासी समाज आज भी आदिम युग में जीने को मजबूर है।”

मुख्य मांगें:

  • तुमडावाड़ी गाँव में तुरंत सड़क निर्माण और बिजली की व्यवस्था की जाए।
  • स्वच्छ पेयजल के लिए बोरवेल या पाइपलाइन सुविधा शुरू हो।
  • गाँव के बच्चों के लिए प्राथमिक विद्यालय और आंगनवाड़ी केंद्र खोले जाएं।
  • सभी ग्रामीणों के राशन कार्ड, चुनाव कार्ड और अन्य पहचान पत्र (Omitted ID) बनाने के लिए विशेष कैंप लगाया जाए।

आम आदमी पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन बुनियादी सुविधाओं पर काम शुरू नहीं हुआ, तो आदिवासी समाज सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ेगा। यह गाँव भाजपा के ‘विकास’ के दावों पर एक बड़ा तमाचा है।

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