केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के तहत किसानों से सीधे संवाद किया गया।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने देश के किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से जमीन की उर्वरता घट रही है और यह अगली पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे में किसानों को अपनी भूमि का एक हिस्सा प्राकृतिक खेती के लिए जरूर समर्पित करना चाहिए।
श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह गहरी चिंता है कि रसायनों की अधिकता से धरती की सेहत बिगड़ रही है, और इसी उद्देश्य से सरकार ने प्राकृतिक खेती मिशन की शुरुआत की है ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण को संरक्षित रखा जा सके।
नवाचारी किसानों की सराहना, प्राकृतिक खेती को बताया भविष्य की जरूरत
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नवाचार करने वाले प्रगतिशील किसानों के अनुभवों को सराहा और उन्हें नई खेती प्रणाली के अग्रदूत बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल उत्पादन का तरीका नहीं, बल्कि एक आंदोलन है जो मिट्टी की उर्वरता, मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ता है।
इस अवसर पर कुछ किसानों ने कीटनाशकों के दुष्प्रभाव, प्राकृतिक खेती में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और सुधार के सुझाव भी साझा किए। कृषि मंत्री ने किसानों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए वैज्ञानिक समाधान का आश्वासन दिया।
विकसित कृषि संकल्प अभियान: किसानों से सीधे संवाद
‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’, जो 29 मई को ओडिशा से शुरू हुआ था, के अंतर्गत कृषि मंत्री ने देश के कई राज्यों में किसानों से सीधा संवाद किया। इन राज्यों में ओडिशा, जम्मू, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, पंजाब, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और दिल्ली शामिल हैं।
इस अभियान के तहत वैज्ञानिकों की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याएं सुन रही हैं और उन्हें प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, कीट नियंत्रण के वैकल्पिक उपायों और आधुनिक तकनीकों के बारे में जागरूक कर रही हैं।
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