भारतीय क्रिकेट टीम में बढ़ती चोटों के बीच BCCI ने फिजियो कमलेश जैन को खिलाड़ियों की फिटनेस पर सख्त रुख अपनाने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब किसी भी खिलाड़ी को फिटनेस मानकों में रियायत नहीं मिलेगी और ब्रोंको टेस्ट को प्राथमिकता दी जाएगी।
भारतीय क्रिकेट टीम में लगातार बढ़ रही चोटों और खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर उठ रहे सवालों के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने बड़ा कदम उठाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोर्ड ने भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के फिजियो कमलेश जैन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी खिलाड़ी की प्रतिष्ठा या वरिष्ठता की परवाह किए बिना फिटनेस को लेकर पूरी पारदर्शिता बरतें। यदि किसी खिलाड़ी की फिटनेस संतोषजनक नहीं है, तो उसे तुरंत रिपोर्ट किया जाए। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय टीम लगातार चोटों से जूझ रही है और कई महत्वपूर्ण मुकाबलों में उसे अपने प्रमुख खिलाड़ियों के बिना मैदान पर उतरना पड़ा है।
लगातार चोटों से बढ़ी BCCI की चिंता
पिछले कुछ समय में भारतीय टीम के कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल हुए हैं। खासकर तेज गेंदबाजों की फिटनेस लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। जसप्रीत बुमराह, हर्षित राणा और अन्य खिलाड़ियों की चोटों के कारण टीम संयोजन प्रभावित हुआ है।
इन्हीं घटनाओं के बाद BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने भारतीय टीम के फिजियो कमलेश जैन से खिलाड़ियों की फिटनेस और मेडिकल मॉनिटरिंग को लेकर सवाल किए। बोर्ड अब यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में किसी भी खिलाड़ी को पूरी तरह फिट हुए बिना टीम में शामिल न किया जाए।
‘खिलाड़ी की पहचान नहीं, फिटनेस सबसे जरूरी’
रिपोर्ट के अनुसार, BCCI ने कमलेश जैन को साफ संदेश दिया है कि उन्हें किसी खिलाड़ी के नाम, अनुभव या स्टार दर्जे से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है।
यदि किसी खिलाड़ी की फिटनेस निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, तो उसकी जानकारी सीधे बोर्ड और टीम प्रबंधन को दी जानी चाहिए। बोर्ड का मानना है कि फिटनेस के मामले में सभी खिलाड़ियों के लिए एक समान नियम लागू होने चाहिए।
ब्रोंको टेस्ट बना नया फिटनेस पैमाना
भारतीय टीम में हाल ही में नियुक्त स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन लेरॉक्स के आने के बाद फिटनेस मूल्यांकन की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है।
अब पहले इस्तेमाल होने वाला यो-यो टेस्ट हटाकर ब्रोंको टेस्ट को खिलाड़ियों की फिटनेस जांच का प्रमुख आधार बनाया गया है। यह टेस्ट खिलाड़ियों की गति, सहनशक्ति और रिकवरी क्षमता को अलग तरीके से परखता है।
हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय खिलाड़ी अभी इस नए टेस्ट के पूरी तरह अभ्यस्त नहीं हैं और कई खिलाड़ियों को इसकी तैयारी में कठिनाई हो रही है।
सीनियर खिलाड़ियों को मिले आसान लक्ष्य?
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पिछले एक वर्ष के दौरान सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में अलग-अलग खिलाड़ियों के लिए अलग-अलग फिटनेस मानक तय किए गए थे।
बताया गया कि कुछ वरिष्ठ खिलाड़ियों को फिटनेस टेस्ट पास करने के लिए अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य दिए गए, ताकि वे आसानी से चयन के लिए उपलब्ध हो सकें। इस दावे ने फिटनेस मूल्यांकन प्रणाली की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
हालांकि BCCI की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
हर्षित राणा और नितीश रेड्डी का भी जिक्र
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ खिलाड़ियों, जैसे हर्षित राणा और नितीश कुमार रेड्डी, को टीम प्रबंधन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए फिट घोषित किया गया।
यदि यह दावा सही है, तो इससे यह संकेत मिलता है कि कई बार चयन की आवश्यकता के कारण फिटनेस मूल्यांकन में लचीलापन बरता गया। यही कारण है कि अब BCCI इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा कर रहा है।
फील्डिंग और रनिंग पर भी चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टीम के कुछ खिलाड़ियों की मैदान पर मूवमेंट (Mobility) और फील्डिंग को लेकर भी चिंता जताई गई है।
विशेष रूप से वरिष्ठ बल्लेबाजों के बारे में कहा गया है कि लंबी बल्लेबाजी करने के बाद उनके लिए विकेटों के बीच तेज दौड़ना मुश्किल हो रहा है। इसके अलावा टीम में धीमे फील्डरों की संख्या बढ़ने की बात भी सामने आई है।
आधुनिक क्रिकेट में तेज फील्डिंग और चुस्त फिटनेस को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी माना जाता है। ऐसे में बोर्ड इस पहलू पर भी विशेष ध्यान देना चाहता है।
नई फिटनेस ड्रिल से खिलाड़ी हैरान
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारतीय टेस्ट टीम के कई नियमित खिलाड़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में शुरू किए गए नए फिटनेस कार्यक्रम से पूरी तरह परिचित नहीं हैं।
बताया गया कि कई खिलाड़ी नई ट्रेनिंग और फिटनेस ड्रिल को देखकर हैरान रह गए। इससे यह संकेत मिलता है कि खिलाड़ियों को नए फिटनेस मानकों के अनुरूप ढलने के लिए समय और अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता होगी।
फिटनेस संस्कृति को मजबूत करने की कोशिश
BCCI अब भारतीय क्रिकेट में फिटनेस को और अधिक पेशेवर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। बोर्ड चाहता है कि खिलाड़ियों की फिटनेस जांच पूरी तरह वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से हो तथा किसी भी स्तर पर समझौता न किया जाए।
यदि सभी खिलाड़ियों के लिए समान फिटनेस मानक लागू किए जाते हैं और मेडिकल टीम को स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की छूट मिलती है, तो इससे भविष्य में चोटों की संख्या कम हो सकती है। साथ ही भारतीय टीम बड़े टूर्नामेंटों में अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों के साथ मैदान पर उतर सकेगी। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि BCCI की नई फिटनेस नीति भारतीय क्रिकेट टीम के प्रदर्शन और खिलाड़ियों की उपलब्धता पर कितना सकारात्मक प्रभाव डालती है।