BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर उठे सवाल, बुमराह-हर्षित राणा की फिटनेस ने बढ़ाई बोर्ड की चिंता

BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर उठे सवाल, बुमराह-हर्षित राणा की फिटनेस ने बढ़ाई बोर्ड की चिंता

 

जसप्रीत बुमराह और हर्षित राणा की फिटनेस समस्याओं के बाद BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बोर्ड ने खिलाड़ियों की फिटनेस, वर्कलोड और मेडिकल मॉनिटरिंग की समीक्षा शुरू कर दी है।

भारतीय क्रिकेट टीम में लगातार बढ़ रही चोटों की समस्या ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की चिंता बढ़ा दी है। हाल के महीनों में कई प्रमुख खिलाड़ी फिटनेस समस्याओं के कारण टीम से बाहर हुए हैं, जिससे महत्वपूर्ण सीरीज और टूर्नामेंटों में भारत को अपनी सर्वश्रेष्ठ प्लेइंग इलेवन उतारने में मुश्किल हुई है। खासतौर पर तेज गेंदबाजों की चोटें बोर्ड के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन गई हैं। जसप्रीत बुमराह और हर्षित राणा की हालिया फिटनेस समस्याओं के बाद अब BCCI के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बोर्ड ने खिलाड़ियों की फिटनेस मॉनिटरिंग और मेडिकल प्रबंधन को लेकर गंभीर समीक्षा शुरू कर दी है।

तेज गेंदबाजों की चोटों ने बढ़ाई मुश्किलें

भारतीय टीम लंबे समय से अपने तेज गेंदबाजों की फिटनेस को लेकर संघर्ष कर रही है। जसप्रीत बुमराह हाल ही में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के दौरान प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटे थे, लेकिन दूसरे मैच में उन्हें चोट लग गई। इस चोट के कारण उनका इंग्लैंड दौरा बीच में ही समाप्त हो गया और वह श्रीलंका के आगामी दौरे से भी बाहर हो गए।

दूसरी ओर, युवा तेज गेंदबाज हर्षित राणा भी फिटनेस समस्याओं से जूझ रहे हैं। वह घुटने की चोट और सर्जरी के बाद वापसी कर रहे थे, लेकिन वापसी के दौरान उन्हें हैमस्ट्रिंग की समस्या का सामना करना पड़ा। लगातार हो रही इन चोटों ने भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की मजबूती पर असर डाला है।

BCCI ने फिटनेस मानकों पर जताई नाराजगी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, BCCI सचिव देवजीत सैकिया ने भारतीय टीम के फिजियो कमलेश जैन से खिलाड़ियों की बार-बार होने वाली चोटों और फिटनेस स्तर में गिरावट को लेकर जवाब मांगा है।

बोर्ड का मानना है कि यदि खिलाड़ियों की फिटनेस पर बेहतर निगरानी रखी जाए तो कई चोटों से बचा जा सकता है। इसी वजह से अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की कार्यप्रणाली और खिलाड़ियों की फिटनेस क्लियरेंस प्रक्रिया की भी समीक्षा की जा रही है।

हर्षित राणा को लेकर सामने आई रिपोर्ट

एक रिपोर्ट के अनुसार, हर्षित राणा को इंग्लैंड दौरे से चोट के कारण नहीं, बल्कि गंभीर मांसपेशियों में ऐंठन (क्रैम्प्स) के चलते बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भेजा गया था।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि राणा का वजन तय सीमा से अधिक था। बताया गया कि चयन से पहले उनका वजन लगभग 97 किलोग्राम था, जबकि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की ओर से उन्हें निर्देश दिया गया है कि उनका वजन 96 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।

बताया जा रहा है कि फिलहाल उन्होंने अपना वजन घटाकर लगभग 94 किलोग्राम कर लिया है और जल्द ही फिटनेस क्लियरेंस मिलने की उम्मीद है।

वर्कलोड और फिटनेस पर बढ़ा फोकस

भारतीय क्रिकेट में पिछले कुछ वर्षों से खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। खासकर तेज गेंदबाजों को लगातार मैच खिलाने के बजाय बीच-बीच में आराम दिया जाता है ताकि उनकी फिटनेस बनी रहे।

इसके बावजूद बार-बार होने वाली चोटों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या मौजूदा फिटनेस प्रबंधन प्रणाली पूरी तरह प्रभावी है। बोर्ड अब इस बात का आकलन कर रहा है कि खिलाड़ियों की फिटनेस जांच, रिकवरी और चयन प्रक्रिया में किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

बुमराह की चोट से टीम को बड़ा झटका

जसप्रीत बुमराह भारतीय टीम के सबसे महत्वपूर्ण तेज गेंदबाजों में गिने जाते हैं। आईपीएल 2026 के बाद उन्होंने इंग्लैंड दौरे से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी की थी, लेकिन दुर्भाग्यवश एक प्रभावजनित (Impact) चोट के कारण उन्हें मैदान छोड़ना पड़ा।

इस चोट के चलते वह न केवल इंग्लैंड दौरे से बाहर हुए बल्कि श्रीलंका के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज में भी हिस्सा नहीं ले पाएंगे। बुमराह की गैरमौजूदगी भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है।

औकिब नबी को मिला मौका

बुमराह की अनुपस्थिति में चयनकर्ताओं ने जम्मू-कश्मीर के युवा तेज गेंदबाज औकिब नबी को भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किया है। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का पहला मौका होगा।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि युवा खिलाड़ियों के लिए यह खुद को साबित करने का अच्छा अवसर है, लेकिन बुमराह जैसे अनुभवी गेंदबाज की कमी को पूरा करना आसान नहीं होगा।

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से अहम सीरीज

भारत और श्रीलंका के बीच शुरू होने वाली टेस्ट सीरीज आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) का हिस्सा है। ऐसे में इस सीरीज का महत्व और भी बढ़ जाता है।

भारतीय टीम चाहेगी कि प्रमुख खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी के बावजूद वह अच्छा प्रदर्शन करे और WTC अंकतालिका में अपनी स्थिति मजबूत बनाए। वहीं, टीम प्रबंधन के सामने यह चुनौती भी होगी कि खिलाड़ियों की फिटनेस और प्रदर्शन के बीच सही संतुलन बनाया जाए।

फिटनेस सिस्टम की समीक्षा जरूरी

भारतीय क्रिकेट में लगातार बढ़ती चोटों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल खिलाड़ियों को आराम देना ही पर्याप्त नहीं है। फिटनेस की निगरानी, वजन नियंत्रण, रिकवरी प्रक्रिया और मेडिकल मूल्यांकन को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। यदि BCCI और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इस दिशा में आवश्यक सुधार करते हैं, तो भविष्य में भारतीय टीम अपने प्रमुख खिलाड़ियों को लंबे समय तक फिट रख सकती है और बड़े टूर्नामेंटों में मजबूत संयोजन के साथ उतर सकती है। फिलहाल सभी की नजर श्रीलंका दौरे और खिलाड़ियों की फिटनेस पर बनी हुई है।

 

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