योगी सरकार ने अयोध्या में टाटा ग्रुप के सहयोग से विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय बनाने का ऐलान किया। संग्रहालय 52 एकड़ में बनेगा और 2 साल में तैयार होगा, जिससे पर्यटन और श्रद्धालु अनुभव बढ़ेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या के लिए एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में अयोध्या में विश्वस्तरीय मंदिर संग्रहालय बनाने का प्रस्ताव पास किया गया। यह संग्रहालय अयोध्या के मांझा जमथरा में 52.102 एकड़ भूमि में स्थापित होगा और इसे टाटा ग्रुप के सहयोग से तैयार किया जाएगा।
राज्य सरकार के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह संग्रहालय आधुनिक तकनीक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस होगा, जिसमें भगवान राम से जुड़ी सभी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक वस्तुएँ प्रदर्शित की जाएँगी।
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अयोध्या में संग्रहालय निर्माण के लिए टाटा ग्रुप के साथ अगले 10 दिनों में एमओयू साइन होगा। राज्य सरकार के मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि यह संग्रहालय अगले डेढ़ से दो साल के भीतर तैयार हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अयोध्या आने वाले श्रद्धालु सिर्फ मंदिर दर्शन करके एक दिन में लौट जाते हैं, लेकिन संग्रहालय के निर्माण के बाद अब लोग एक दिन से अधिक समय अयोध्या में व्यतीत करेंगे और राम से जुड़े विभिन्न पहलुओं को जान पाएंगे।
राज्य सरकार ने एमओयू की औपचारिक जानकारी देते हुए बताया कि अयोध्या के तहसील सदर, ग्राम मांझा जमथरा की नजूल भूमि गाटा-57 में 25 एकड़ क्षेत्रफल की भूमि टाटा संस प्रा. लि. को 90 वर्ष की अवधि के लिए सीएसआर फंड के माध्यम से विश्वस्तरीय संग्रहालय निर्माण और संचालन के लिए प्रदान की जाएगी। यह एमओयू 03 सितंबर 2024 को संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन विभाग, उत्तर प्रदेश शासन और टाटा संस के बीच त्रिपक्षीय रूप से हस्ताक्षरित किया गया था।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद अयोध्या पर्यटन और धार्मिक यात्रा के क्षेत्र में नया अध्याय शुरू होगा। संग्रहालय न केवल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी संरक्षित करेगा।