अयोध्या श्रीराम यंत्र 2026: 19 मार्च को अयोध्या में ऐतिहासिक स्थापना और इसका महत्व

अयोध्या श्रीराम यंत्र 2026: 19 मार्च को अयोध्या में ऐतिहासिक स्थापना और इसका महत्व

अयोध्या श्रीराम यंत्र 2026: अयोध्या में 19 मार्च 2026 को होगी श्रीराम यंत्र की ऐतिहासिक स्थापना, जानें इसका महत्व, विशेषताएं और राम जन्मभूमि मंदिर में होने वाले अनुष्ठान की पूरी जानकारी।

अयोध्या श्रीराम यंत्र 2026: आस्था और भक्ति की नगरी अयोध्या 19 मार्च 2026 को एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बनेगी। इस दिन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्री राम यंत्र की स्थापना होगी। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन होने वाले इस आयोजन को लेकर मंदिर परिसर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।

19 मार्च को होगी श्रीराम यंत्र की स्थापना

इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के तृतीय तल (तीसरे फ्लोर) में श्री राम यंत्र की स्थापना होगी। यह वैदिक और पवित्र अनुष्ठान नौ दिन तक चलेगा, जिसमें 51 वैदिक विद्वान भारत भर से आमंत्रित किए गए हैं। इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी शामिल होंगी।

इस दिन को हिंदू नववर्ष की शुरुआत माना जाता है, इसलिए यह स्थापना धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ने वाली मानी जा रही है। हजारों श्रद्धालु और सैकड़ों संत-महात्मा इस ऐतिहासिक अवसर में भाग लेंगे। आयोजन का सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर भी किया जाएगा।

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श्रीराम यंत्र क्या है

श्री राम यंत्र भगवान श्रीराम की दिव्य ऊर्जा और मर्यादा का प्रतीक है। यह एक पवित्र तांत्रिक-वैदिक यंत्र होता है, जो ज्यामितीय आकृतियों, बीज मंत्रों और पवित्र रेखाओं से निर्मित होता है।

  • इस यंत्र में राम नाम के मंत्र अंकित होते हैं, जो राम की शक्ति को स्थिर करते हैं।

  • जहां भी यह यंत्र स्थापित होता है, वहां सकारात्मक ऊर्जा और शांति का वातावरण बनता है।

  • यह यंत्र धर्म, मर्यादा, सत्य और आदर्श जीवन का प्रतीक है।

  • मान्यता है कि श्रीराम यंत्र के सानिध्य में आने से भक्तों के भीतर नकारात्मकता समाप्त होती है और उन्हें एकाग्रता व मानसिक शांति मिलती है।

श्रीराम यंत्र की विशेषताएं

  • मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, यंत्र धातु की आयताकार प्लेट पर बना है, जिसकी लंबाई लगभग चार फीट और चौड़ाई तीन फीट है।

  • यंत्र पर भगवान श्रीराम सहित अन्य देवी-देवताओं से जुड़े बीज मंत्र अंकित हैं।

  • यह यंत्र धार्मिक और वैदिक अनुष्ठानों में स्थापित किया जाता है ताकि उस स्थान की आध्यात्मिक शक्ति और पवित्रता बढ़ सके।

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