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चंडीगढ़ के लोक भवन में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
चंडीगढ़ स्थित लोक भवन में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने महान कवि, साहित्यकार और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राज्यपाल ने टैगोर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय साहित्य और कला के क्षेत्र में रवींद्रनाथ टैगोर के अमूल्य योगदान को नमन किया।
रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष चंडीगढ़ स्थित लोक भवन में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित महान कवि एवं साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित करते हुए।#Haryana #DIPRHaryana pic.twitter.com/C7Pklq6NRH
— DPR Haryana (@DiprHaryana) August 7, 2026
रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि के अवसर पर लोक भवन में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने हिस्सा लिया। उन्होंने टैगोर के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। टैगोर भारतीय साहित्य के ऐसे महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारत की संस्कृति, मानवीय मूल्यों और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई।
साहित्य और संस्कृति में टैगोर का योगदान
रवींद्रनाथ टैगोर को वर्ष 1913 में उनकी कृति ‘गीतांजलि’ के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। वे नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले एशियाई साहित्यकार बने। कविता, कहानी, उपन्यास, नाटक, संगीत और चित्रकला सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनका योगदान भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
टैगोर की विरासत को किया याद
राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने रवींद्रनाथ टैगोर के योगदान को याद करते हुए उनके साहित्य और विचारों की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। टैगोर की रचनाओं में मानवता, स्वतंत्र विचार, प्रकृति और सामाजिक चेतना जैसे विषयों को प्रमुख स्थान मिला। उनकी साहित्यिक विरासत आज भी देश और दुनिया के पाठकों को प्रभावित करती है।
लोक भवन में अर्पित किए पुष्प
चंडीगढ़ के लोक भवन में आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने रवींद्रनाथ टैगोर को पुष्पांजलि अर्पित की। पुण्यतिथि के अवसर पर महान साहित्यकार को याद करते हुए उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाएं भारतीय साहित्य और संस्कृति की समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।