एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार उछाल, AI शेयरों की वापसी से लौटा निवेशकों का भरोसा

एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार उछाल, AI शेयरों की वापसी से लौटा निवेशकों का भरोसा

 

वॉल स्ट्रीट की मजबूती और माइक्रोसॉफ्ट-अमेजन के बेहतर नतीजों के बाद एशियाई शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की गई। कोस्पी और निक्केई में बड़ी बढ़त, जबकि मध्य पूर्व तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल देखा गया।

शुक्रवार को एशियाई शेयर बाजारों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट में आई मजबूती का असर एशिया के प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। खासकर दक्षिण कोरिया का शेयर बाजार रिकॉर्ड वापसी करने में सफल रहा, जिससे यह संकेत मिला कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े शेयरों में हाल के दिनों की भारी बिकवाली अब थमती नजर आ रही है।

दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सूचकांक कारोबार शुरू होने के कुछ ही समय बाद करीब 14 प्रतिशत तक उछल गया। इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में इसी बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं जापान का निक्केई (Nikkei) सूचकांक लगभग 5 प्रतिशत चढ़ा, जबकि जापान को छोड़कर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शेयरों का MSCI सूचकांक भी करीब 3 प्रतिशत मजबूत हुआ।

माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन के बेहतर नतीजों से बढ़ा भरोसा

बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनियों माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन के मजबूत तिमाही नतीजे और भविष्य को लेकर सकारात्मक अनुमान रहे। दोनों कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन से निवेशकों को भरोसा मिला कि AI सेक्टर में निवेश और मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।

हाल के दिनों में बाजार में यह आशंका बढ़ गई थी कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंपनियों का भारी पूंजीगत खर्च (Capex) भविष्य में मुनाफे पर दबाव डाल सकता है। लेकिन ताजा नतीजों ने इन चिंताओं को काफी हद तक कम कर दिया। इसके बाद चिप निर्माण से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

मार्केट विश्लेषकों का मानना है कि सप्ताह की शुरुआत में AI शेयरों में जो तेज गिरावट आई थी, वह जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया (Overreaction) थी और अब बाजार धीरे-धीरे संतुलन की ओर लौट रहा है।

जुलाई में भारी नुकसान के बावजूद कोस्पी की मजबूत वापसी

हालांकि शुक्रवार की तेजी के बावजूद दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक जुलाई महीने में अब भी लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। यह 1997 के एशियाई वित्तीय संकट के बाद उसका सबसे खराब मासिक प्रदर्शन माना जा रहा है।

हाल के दिनों में अत्यधिक लीवरेज वाले निवेश उत्पादों के कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, जिससे कई खुदरा निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। स्थिति को देखते हुए दक्षिण कोरियाई नियामकों ने जोखिम वाले निवेश साधनों पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि AI सेक्टर से जुड़े बाजारों में अब भी अस्थिरता बनी हुई है, लेकिन हालिया सुधार इस बात का संकेत है कि लंबे समय से जारी गिरावट अपने अंतिम चरण में पहुंच सकती है।

येन और डॉलर पर निवेशकों की नजर

शेयर बाजार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा बाजार भी निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। जापानी मुद्रा येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कुछ मजबूत बनी रही। इससे पहले जापान के केंद्रीय बैंक और अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा संभावित हस्तक्षेप के बाद येन को 40 वर्षों के निचले स्तर से ऊपर लाने की कोशिश की गई थी।

बाजार की नजर बैंक ऑफ जापान (BOJ) की मौद्रिक नीति बैठक पर भी रही। निवेशकों को उम्मीद है कि यदि बैंक ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करता है तो विदेशी मुद्रा बाजार में फिर से उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर पर दबाव बना रहा, जिससे यूरो एक महीने के उच्च स्तर के करीब पहुंच गया। ब्रिटिश पाउंड भी डॉलर के मुकाबले मजबूत बना रहा।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और महंगाई की चिंता

अमेरिका में लंबी अवधि के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड करीब 19 वर्षों के उच्च स्तर के आसपास बनी हुई है। वहीं छोटी अवधि की यील्ड में कुछ नरमी देखने को मिली, जिससे यील्ड कर्व और अधिक ढलान वाला हो गया।

विश्लेषकों का मानना है कि निवेशकों के बीच यह चिंता बढ़ रही है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व महंगाई को नियंत्रित रखने में कितनी सफलता हासिल कर पाएगा। यही कारण है कि बॉन्ड बाजार में भी अस्थिरता बनी हुई है।

यूरोप और अमेरिकी वायदा बाजार भी रहे मजबूत

एशियाई बाजारों की तेजी का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला। अमेरिकी नैस्डैक फ्यूचर्स में लगभग 0.87 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि एसएंडपी 500 फ्यूचर्स भी मजबूत रहे।

यूरोप में यूरो स्टॉक्स 50, एफटीएसई और डैक्स फ्यूचर्स में भी अच्छी तेजी देखी गई, जिससे यह संकेत मिला कि वैश्विक निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान फिर से बढ़ रहा है।

मध्य पूर्व तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त

इस बीच मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा। ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 89 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी मजबूत हुआ।

मिस्र के भूमध्यसागरीय बंदरगाह दमियाता में गैस जहाजों पर ड्रोन हमले की खबरों ने तेल आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो स्वेज नहर से होने वाले तेल परिवहन पर असर पड़ सकता है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतें और बढ़ सकती हैं।

कुल मिलाकर, शुक्रवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। AI सेक्टर में निवेशकों का भरोसा लौटने, अमेरिकी टेक कंपनियों के बेहतर नतीजों और एशियाई बाजारों की मजबूत रिकवरी ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया है। हालांकि, मध्य पूर्व का तनाव, केंद्रीय बैंकों की नीतियां और वैश्विक महंगाई आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक बने रहेंगे।

 

 

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