चिप्स की कमी और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के कारण ऐपल ने अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ाईं। जानिए क्या है मैकबुक और आईपैड महंगा होने का कारण।
दुनिया की सबसे बड़ी और तकनीकी रूप से सक्षम कंपनी ‘ऐपल’ ने हाल ही में अपने मैकबुक (MacBook) और आईपैड (iPad) के मॉडल्स की कीमतों में वैश्विक स्तर पर भारी बढ़ोतरी की है। भारत सहित पूरी दुनिया में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। यह पिछले कुछ वर्षों में कंपनी द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा मूल्य संशोधन है। इस बढ़ोतरी का दायरा काफी बड़ा है—मैकबुक के कुछ मॉडल्स पर 20% तक, तो कुछ आईपैड वेरिएंट्स पर 40% से भी ज्यादा की वृद्धि की गई है। ऐपल का कहना है कि यह निर्णय किसी मर्जी से नहीं, बल्कि मजबूरी में लिया गया है। इस कदम के पीछे का मुख्य कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप्स की कीमतों में आई अप्रत्याशित तेजी है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के कारण हुई है।
क्यों बढ़ानी पड़ी कीमतें? चिप संकट का असली कारण
ऐपल के अनुसार, दुनिया भर में बन रहे एआई डेटा सेंटरों के कारण मेमोरी और स्टोरेज चिप्स (जैसे DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी) की मांग में अभूतपूर्व उछाल आया है। ये कंपोनेंट्स न केवल एआई सर्वर्स के लिए रीढ़ की हड्डी हैं, बल्कि लैपटॉप, टैबलेट और स्मार्टफोन्स जैसे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स (Consumer Electronics) के निर्माण के लिए भी अनिवार्य हैं। ऐपल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है, “एआई डेटा सेंटरों के तीव्र विस्तार ने मेमोरी और स्टोरेज की मांग में एक असाधारण उछाल पैदा किया है। हमने घटक (component) की कीमतों में इतनी तेजी से और इतनी बड़ी बढ़ोतरी कभी नहीं देखी।”
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने अपने ग्राहकों को महंगाई की मार से बचाने के लिए कई तिमाहियों तक इन बढ़े हुए खर्चों को खुद वहन किया (Absorbed), लेकिन अब स्थिति उस बिंदु पर पहुंच गई है जहां कीमतों में वृद्धि अनिवार्य हो गई है।
एआई का सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर असर
एआई के दौर में तकनीक कंपनियां बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बना रही हैं। इसका सीधा असर यह हुआ है कि मेमोरी निर्माताओं ने अपने उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा एंटरप्राइज ग्राहकों (बड़ी टेक कंपनियां) की ओर मोड़ दिया है। इस कारण आम उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार के लिए चिप्स की उपलब्धता काफी कम हो गई है। काउंटरपॉइंट रिसर्च के सह-संस्थापक और उपाध्यक्ष नील शाह का मानना है कि वैश्विक पीसी और टैबलेट उद्योग का कॉस्ट स्ट्रक्चर पिछले कई वर्षों में सबसे बड़े बदलाव से गुजर रहा है।
नील शाह के अनुसार, “अभूतपूर्व एआई इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को पूरी तरह से बदल दिया है। DRAM, NAND और कंप्यूट चिप्स की मांग इतनी अधिक है कि उत्पादन क्षमता उसका मुकाबला नहीं कर पा रही है। चूंकि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को प्राथमिकता दी जा रही है, इसलिए अन्य बाजारों के लिए आपूर्ति कम हो गई है।” उनके अनुसार, यह आपूर्ति बाधा (supply constraints) कम से कम अगले दो वर्षों तक जारी रह सकती है।
क्या ऐपल भी अब मजबूर है?
ऐपल को व्यापक रूप से तकनीक उद्योग के सबसे मजबूत सप्लाई चेन प्रबंधकों में से एक माना जाता है। कंपनी की कुशलता इसी में रही है कि वह बड़े पैमाने पर खरीदारी करके लागत को नियंत्रित रखती है। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि इस बार सेमीकंडक्टर लागत में हुई वृद्धि उस स्तर पर पहुंच गई है, जिसे ऐपल भी अब पूरी तरह से बेअसर (offset) नहीं कर पा रहा है।
ऐपल ने दो तिमाहियों तक कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की, ताकि उसके उपभोक्ता इस मुद्रास्फीति से बचे रहें। लेकिन अब कंपनी उस सीमा पर आ गई है, जहां से लागत का भार उठाए रखना व्यापारिक दृष्टि से संभव नहीं था। यह स्थिति दर्शाती है कि एआई का प्रभाव केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हार्डवेयर की कीमतों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर भी सीधा असर डाल रहा है।
आम उपभोक्ता पर क्या होगा असर?
इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर उन छात्रों, पेशेवरों और रचनात्मक कलाकारों पर पड़ेगा जो मैकबुक और आईपैड को अपने काम का मुख्य आधार मानते हैं। यदि आप आने वाले समय में नया डिवाइस खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपको इस बढ़ी हुई कीमतों के साथ सामंजस्य बिठाना होगा। जानकारों का कहना है कि एआई की दौड़ में जब तक चिप्स की आपूर्ति और मांग का संतुलन नहीं बनता, तब तक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में नरमी की उम्मीद करना मुश्किल है।