केजरीवाल का पीएम मोदी पर तीखा हमला: ‘गलती से प्रधानमंत्री बन गए, उन्हें थानेदार होना चाहिए था’

केजरीवाल का पीएम मोदी पर तीखा हमला: 'गलती से प्रधानमंत्री बन गए, उन्हें थानेदार होना चाहिए था'

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट द्वारा आप विधायक मेहराज मलिक की PSA हिरासत रद्द किए जाने के बाद अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी पर ‘थानेदार’ वाला तंज कसा। जानें क्या है पूरा मामला और कोर्ट का फैसला।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय द्वारा आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मेहराज मलिक की जन सुरक्षा अधिनियम (PSA) के तहत हिरासत को रद्द किए जाने के बाद, राजनीति गरमा गई है। आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए उनकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने मलिक की हिरासत को “कानूनी रूप से अस्थिर” और “दिमाग का उपयोग न करने” (non-application of mind) पर आधारित बताया है।

केजरीवाल का तीखा प्रहार और ‘थानेदार’ वाला बयान

अदालत के फैसले के तुरंत बाद अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर प्रधानमंत्री की आलोचना की। केजरीवाल ने मलिक की हिरासत को “अवैध आदेशों” का परिणाम बताया और कड़े शब्दों में लिखा, “वो गलती से पीएम बन गए। उनको थानेदार होना चाहिए था।” केजरीवाल का यह बयान केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग के खिलाफ उनके कड़े रुख को दर्शाता है। मेहराज मलिक जम्मू-कश्मीर में आम आदमी पार्टी के इकाई प्रमुख और एक निर्वाचित प्रतिनिधि हैं।

उमर अब्दुल्ला और विपक्षी नेताओं ने जताई आपत्ति

इस मामले पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और माकपा नेता एमवाई तारिगामी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मलिक को कभी भी पीएसए के तहत हिरासत में नहीं लिया जाना चाहिए था। उन्होंने इसे कानून का घोर दुरुपयोग करार देते हुए उम्मीद जताई कि इस फैसले से प्रशासन सबक लेगा। पीएसए एक ऐसा सख्त कानून है जो कुछ मामलों में बिना किसी आरोप या मुकदमे के दो साल तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है, जिसकी विपक्षी दल लगातार आलोचना करते रहे हैं।

क्या था पूरा मामला और अदालत का फैसला?

मेहराज मलिक को पिछले साल 8 सितंबर को डोडा जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया था और कठुआ जेल में रखा गया था। न्यायमूर्ति मोहम्मद यूसुफ वानी ने हिरासत के आदेश को दरकिनार करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि मलिक को तुरंत रिहा किया जाए। मलिक के वकील जुल्करनैन चौधरी के अनुसार, यह मामला पहले जम्मू पीठ में था और बाद में कश्मीर स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां अंततः सच्चाई की जीत हुई।

जमीनी स्तर पर जश्न और भविष्य की रणनीति

अदालत के फैसले के बाद मेहराज मलिक के गृह निर्वाचन क्षेत्र डोडा में उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा गया। समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर फैसले का स्वागत किया। यह घटनाक्रम न केवल जम्मू-कश्मीर की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह सीधे तौर पर निर्वाचित प्रतिनिधियों की स्वतंत्रता और निवारक नजरबंदी कानूनों (Preventive Detention Laws) की वैधता से जुड़ा है। आम आदमी पार्टी इस जीत को आगामी चुनावों और क्षेत्रीय विस्तार के लिए एक नैतिक बल के रूप में देख रही है।

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