अमरनाथ यात्रा 2026: जम्मू बेस कैंप से 3,632 श्रद्धालुओं का नया जत्था रवाना, अब तक 3.65 लाख ने किए

अमरनाथ यात्रा 2026: जम्मू बेस कैंप से 3,632 श्रद्धालुओं का नया जत्था रवाना, अब तक 3.65 लाख ने किए

 

अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से 3,632 तीर्थयात्रियों का नया जत्था कश्मीर रवाना हुआ। बर्फानी शिवलिंग पिघलने के बाद भी श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है।

बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पवित्र अमरनाथ यात्रा पूरी आस्था और उत्साह के साथ निरंतर जारी है। अधिकारियों के अनुसार, शनिवार की तड़के तीर्थयात्रियों का एक नया जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास आधार शिविर से कश्मीर घाटी के लिए रवाना हुआ। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच रवाना हुए इस 17वें जत्थे में कुल 3,632 तीर्थयात्री शामिल हैं, जिनमें 877 महिलाएं और 104 साधु भी बाबा के जयकारों के साथ अपनी यात्रा पर निकले हैं।

कड़ाके की सुरक्षा के बीच यह काफिला सुबह 2:40 बजे से 3:15 बजे के बीच अपने गंतव्य के लिए रवाना हुआ। इस जत्थे को सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी में एस्कॉर्ट वाहनों के साथ कश्मीर के जुड़वां आधार शिविरों—अनंतनाग जिले के पहलगाम और गांदरबल जिले के बालटाल के लिए भेजा गया है।

दोनों यात्रा मार्गों (बालटाल और पहलगाम) का विवरण

अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालु अपनी सुविधा और आस्था के अनुसार मार्ग का चयन करते हैं। शनिवार को रवाना हुए कुल श्रद्धालुओं में से:

बालटाल मार्ग: कुल 2,624 तीर्थयात्रियों ने बालटाल मार्ग से यात्रा करने का विकल्प चुना है। यह मार्ग थोड़ा कठिन और चढ़ाई वाला है, लेकिन दूरी कम होने के कारण जल्दी दर्शन चाहने वाले श्रद्धालु इसे पसंद करते हैं।

पारंपरिक पहलगाम मार्ग: वहीं, अन्य 1,008 तीर्थयात्रियों ने अनंतनाग जिले के पारंपरिक पहलगाम मार्ग को प्राथमिकता दी है। यह मार्ग थोड़ा लंबा और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है, जिसे पारंपरिक रूप से सबसे पवित्र माना जाता है।

बर्फानी शिवलिंग समय से पहले पिघला, फिर भी उत्साह बरकरार

इस वर्ष 57 दिनों तक चलने वाली यह वार्षिक तीर्थयात्रा बेहद सुचारू रूप से आगे बढ़ रही है। अब तक 3.65 लाख से अधिक श्रद्धालु 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा में मत्था टेक चुके हैं और बाबा बर्फानी का आशीर्वाद ले चुके हैं।

मौसम के बदलते मिजाज और तापमान में वृद्धि के कारण इस साल गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग (हिम शिवलिंग) सामान्य से थोड़ा पहले पिघल गया है। हालांकि, बाबा बर्फानी के अंतर्धान होने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई है। देश-विदेश से आने वाले भक्तों का तांता लगातार लगा हुआ है, और वे अटूट श्रद्धा के साथ पवित्र गुफा में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।

भगवती नगर बेस कैंप की भूमिका और यात्रा की स्थिति

पवित्र तीर्थस्थल का दौरा करने वाले कुल तीर्थयात्रियों में से 1.12 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से अपनी यात्रा की शुरुआत की है। जम्मू बेस कैंप का चयन करने वाले तीर्थयात्रियों को विशेष रूप से तैयार की गई सुरक्षा व्यवस्था और एस्कॉर्ट काफिलों के तहत कश्मीर घाटी तक पहुँचाया जाता है।

प्रशासन के अनुसार, इस साल पंजीकृत श्रद्धालुओं की एक बड़ी संख्या ने सीधे कश्मीर के जुड़वां आधार शिविरों (पहलगाम और बालटाल) में खुद यात्रा करने को प्राथमिकता दी है। यह दर्शाता है कि कश्मीर में कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाएं पहले से बेहतर हुई हैं।

चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था और उपराज्यपाल द्वारा शुरुआत

सुरक्षा के मोर्चे पर प्रशासन किसी भी तरह की ढील नहीं बरत रहा है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 44) और कश्मीर घाटी के दोनों यात्रा मार्गों पर सुरक्षा के बेहद पुख्ता और कड़े इंतजाम किए गए हैं। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवान पूरी मुस्तैदी के साथ चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं ताकि यात्रियों की आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध बनी रहे।

इस वार्षिक यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई को कश्मीर घाटी से हुई थी। इससे ठीक एक दिन पहले, 2 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भगवती नगर आधार शिविर से तीर्थयात्रियों के पहले आधिकारिक जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। 57 दिनों की यह पवित्र अमरनाथ यात्रा आगामी 28 अगस्त को रक्षा बंधन के पावन त्योहार के अवसर पर औपचारिक रूप से संपन्न होगी।

 

 

 

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