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21 जुलाई 2026 का विस्तृत पंचांग जानें। मंगलवार को मासिक दुर्गाष्टमी के अवसर पर राहुकाल का सटीक समय, अभिजीत मुहूर्त और आचार्य इंदु प्रकाश के विशेष पूजा उपाय यहाँ देखें।
हिंदू सनातन धर्म में दैनिक पंचांग का विशेष महत्व है, जिसकी मदद से हम हर दिन के शुभ-अशुभ समय, ग्रहों की स्थिति और आने वाले व्रत-त्योहारों की सटीक जानकारी प्राप्त करते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, 21 जुलाई 2026, दिन मंगलवार को श्रावण (सावन) मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन बेहद पावन और फलदायी होने वाला है क्योंकि इस दिन मासिक दुर्गाष्टमी (Masik Durgashtami) का महाव्रत रखा जाएगा।
मंगलवार के दिन अष्टमी तिथि पड़ने के कारण इस दिन मां दुर्गा के साथ-साथ संकटमोचन हनुमान जी की कृपा भी श्रद्धालुओं को प्राप्त होगी। यदि आप इस दिन कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं, या किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए आज के शुभ और अशुभ मुहूर्तों को जानना बेहद जरूरी है। आइए आचार्य इंदु प्रकाश से जानते हैं 21 जुलाई 2026 का विस्तृत पंचांग, शुभ मुहूर्त और राहुकाल का सटीक समय।
21 जुलाई 2026 की पंचांग गणना और तिथि (Panchang Details)
मंगलवार को सूर्योदय और चंद्रोदय के समय ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी, जो इस दिन को आध्यात्मिक साधना के लिए अति उत्तम बनाती है:
- मास (महीना): श्रावण (सावन) मास, शुक्ल पक्ष
- तिथि: अष्टमी तिथि (यह तिथि दोपहर और संध्या के समय व्याप्त रहेगी, जिसमें मासिक दुर्गाष्टमी की पूजा संपन्न की जाएगी)
- दिन: मंगलवार (मंगला गौरी और हनुमान जी की आराधना का विशेष संयोग)
- नक्षत्र: चित्रा नक्षत्र (ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव हैं, जिससे आज के दिन की शक्ति और बढ़ जाती है)
- योग: सिद्ध योग (किसी भी कार्य में सफलता और सिद्धि प्राप्त करने के लिए यह योग अत्यंत शुभ माना जाता है)
- करण: विष्टि और बव करण
मासिक दुर्गाष्टमी का महत्व और पूजा विधि (Significance of Masik Durgashtami)
प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती है। सावन के पवित्र महीने में आने वाली इस दुर्गाष्टमी का महत्व दोगुना हो जाता है। इस दिन मां भगवती की सात्विक पूजा करने से घर के सभी वास्तु दोष, गृह क्लेश और आर्थिक तंगियां दूर हो जाती हैं।
पूजा की संक्षिप्त विधि: सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ लाल या पीले वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर में मां दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर के सामने घी का दीपक जलाएं। माता रानी को लाल चुनरी, श्रृंगार सामग्री, अक्षत, कुमकुम और लाल पुष्प अर्पित करें। इसके बाद अपनी समस्याओं के निवारण के लिए दुर्गा चालीसा या माता के सिद्ध मंत्रों का जप करें। अंत में हलवे और चने का भोग लगाकर आरती करें और व्रत का संकल्प पूरा करें।
21 जुलाई 2026 के शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat Timing)
यदि आप इस दिन गृह निर्माण, व्यापार की शुरुआत, सगाई, या कोई अन्य महत्वपूर्ण कार्य करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित शुभ समय का सदुपयोग कर सकते हैं:
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:14 से सुबह 04:55 तक (यह समय ईश्वर आराधना, ध्यान और योग के लिए सर्वोत्तम माना गया है)।
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से दोपहर 12:55 तक। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अभिजीत मुहूर्त दिन का सबसे शक्तिशाली शुभ समय होता है। इस दौरान शुरू किए गए कार्यों में विघ्न आने की संभावना न्यूनतम होती है।
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:44 से दोपहर 03:39 तक (कानूनी मामलों या किसी प्रतियोगिता में सफलता के लिए यह समय अनुकूल है)।
- गोधूलि मुहूर्त (संध्या काल): शाम 07:18 से शाम 07:39 तक (इस समय मां दुर्गा के सामने दीपदान करना अत्यंत लाभकारी होता है)।
अशुभ समय और राहुकाल का समय (Rahu Kaal & Ashubh Samay)
शास्त्रों में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि राहुकाल के दौरान कोई भी नया, मांगलिक या शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस समय किए गए कार्यों में रुकावटें आने और असफलता मिलने की आशंका सबसे ज्यादा होती है।
- राहुकाल (Rahu Kaal Time): दोपहर 03:52 से शाम 05:36 तक। ध्यान रखें कि 21 जुलाई को इस पौने दो घंटे की अवधि में किसी भी नए सौदे, यात्रा या पूजा की शुरुआत करने से बचें।
- यमगंड काल: सुबह 09:02 से सुबह 10:46 तक (यह भी एक अशुभ समय माना जाता है)।
- गुलिक काल: दोपहर 12:29 से दोपहर 02:11 तक।
- वर्ज्य काल: रात 09:15 से रात 10:50 तक।
- आज का विशेष सुझाव: यदि राहुकाल के दौरान कोई अत्यंत आवश्यक काम करना ही पड़े, तो घर से निकलने से पहले हनुमान चालीसा का पाठ करें या थोड़ा सा गुड़ खाकर और पानी पीकर ही बाहर कदम बढ़ाएं, इससे राहू का नकारात्मक प्रभाव कम हो जाता है।