महिला आरक्षण पर भाजपा की ‘जुमलेबाज़ी’ बेनकाब: कुलदीप कुमार ने जनगणना में देरी पर घेरा

महिला आरक्षण पर भाजपा की 'जुमलेबाज़ी' बेनकाब: कुलदीप कुमार ने जनगणना में देरी पर घेरा

विधायक कुलदीप कुमार ने महिला आरक्षण बिल में देरी को लेकर भाजपा को घेरा। उन्होंने पूछा कि 2023 में पास हुआ बिल 2026 तक लागू क्यों नहीं हुआ।

आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता और विधायक कुलदीप कुमार ने महिला आरक्षण विधेयक (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) के कार्यान्वयन में हो रही देरी को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। कुलदीप कुमार ने भाजपा के दावों को ‘चुनावी जुमलेबाजी’ करार देते हुए कहा कि सत्ताधारी दल का इतिहास हमेशा से महिला विरोधी रहा है।

“2023 में पास बिल, 2026 में भी क्यों है अटका?”

विधायक कुलदीप कुमार ने भाजपा की नीयत पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “जब 2023 में महिला आरक्षण बिल संसद से पास हो गया था, तो 2026 में भी यह जुमला क्यों दिया जा रहा है कि बिल रोक दिया गया है? सच तो यह है कि भाजपा केवल चुनाव जीतने के लिए महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है।” उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि तीन साल बीत जाने के बाद भी महिलाएं अपने अधिकार के लिए आखिर और कितना इंतजार करेंगी?

जनगणना (Census) के नाम पर बहानेबाजी

AAP नेता ने केंद्र सरकार को याद दिलाया कि आरक्षण लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन की जो शर्त रखी गई थी, वह केवल देरी करने की एक चाल थी। उन्होंने कहा, “इन लोगों ने खुद कहा था कि जनगणना के बिना आरक्षण नहीं दिया जा सकता, लेकिन पिछले कई सालों में इन्होंने जनगणना क्यों नहीं कराई? यह स्पष्ट है कि भाजपा महिलाओं को वास्तव में सशक्त नहीं करना चाहती, बल्कि केवल तकनीकी बहाने बनाकर इस मुद्दे को लटकाए रखना चाहती है।”

“महिलाओं का विरोध करना भाजपा का इतिहास”

कुलदीप कुमार ने अपने संबोधन में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा की विचारधारा शुरू से ही महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया से दूर रखने की रही है। उन्होंने कहा कि आज जब देश की महिलाएं अपने अधिकारों के लिए जागरूक हैं, तो भाजपा केवल खोखले वादे कर रही है। ‘आप’ नेता ने मांग की कि जनगणना का इंतजार किए बिना महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए ताकि संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

भाजपा के ‘धनबल’ पर ‘जनबल’ भारी: बुनियादी मुद्दों की जीत

‘आप’ के प्रदेश नेतृत्व ने इस शानदार जीत को ‘लोकतंत्र की जीत’ करार दिया है। पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर साझा किया कि “बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।” जहाँ भाजपा ने इस क्षेत्र में अपने दिग्गज मंत्रियों की फौज और संसाधनों को प्रचार में झोंक दिया था, वहीं आम आदमी पार्टी ने स्थानीय मुद्दों, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के वादे पर भरोसा जताया। आदिवासियों ने भाजपा के बड़े दावों के मुकाबले ‘आप’ के काम की राजनीति को प्राथमिकता दी।

प्रमुख चुनावी आंकड़े: एक नजर में

डेडियापाड़ा क्षेत्र के चुनाव परिणाम बताते हैं कि यहाँ विपक्षी दलों का पूरी तरह सफाया हो गया है। चुनाव के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • कुल जिला पंचायत सीटें (डेडियापाड़ा क्षेत्र): 11
  • आम आदमी पार्टी की जीत: 11
  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): 0
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: खाता नहीं खुला

यह क्लीन स्वीप न केवल गुजरात की स्थानीय राजनीति में ‘आप’ के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी एक बड़ा संकेत है।

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