डेडियापाड़ा में ‘झाड़ू’ का जादू: आम आदमी पार्टी का क्लीन स्वीप, भाजपा का सूपड़ा साफ

डेडियापाड़ा में 'झाड़ू' का जादू: आम आदमी पार्टी का क्लीन स्वीप, भाजपा का सूपड़ा साफ

डेडियापाड़ा में आम आदमी पार्टी की ऐतिहासिक जीत। विधायक चैतर वसावा के नेतृत्व में AAP ने सभी 11 जिला पंचायत सीटों पर कब्जा किया, भाजपा को मिली शून्य सीटें।

डेडियापाड़ा/नर्मदा: गुजरात की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। वर्ष 2026 के स्थानीय निकाय चुनाव परिणामों में नर्मदा जिले की डेडियापाड़ा विधानसभा के अंतर्गत आने वाली सभी 11 जिला पंचायत सीटों पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने जीत का परचम लहराया है। इस चुनाव परिणाम ने सत्ताधारी दल भाजपा को बड़ा झटका दिया है, जिसे यहाँ ‘शून्य’ सीटों पर संतोष करना पड़ा। इस जीत के साथ ही क्षेत्र में ‘आप’ ने अपनी जड़ों को और मजबूत कर लिया है।

चैतर वसावा का गढ़ बरकरार: आदिवासियों का अटूट विश्वास

आम आदमी पार्टी की इस प्रचंड जीत का मुख्य चेहरा डेडियापाड़ा के लोकप्रिय विधायक और दिग्गज आदिवासी नेता चैतर वसावा रहे। वसावा के जमीनी संघर्ष और आदिवासियों के हक की लड़ाई का ही यह परिणाम है कि नर्मदा जिला पंचायत के साथ-साथ डेडियापाड़ा और सागबारा तालुका पंचायत में भी ‘आप’ ने भारी बहुमत हासिल किया है। मतदाताओं ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वे स्थानीय नेतृत्व और जल-जंगल-ज़मीन की लड़ाई लड़ने वालों के साथ खड़े हैं।

भाजपा के ‘धनबल’ पर ‘जनबल’ भारी: बुनियादी मुद्दों की जीत

‘आप’ के प्रदेश नेतृत्व ने इस शानदार जीत को ‘लोकतंत्र की जीत’ करार दिया है। पार्टी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल (X) पर साझा किया कि “बदलाव की शुरुआत हो चुकी है।” जहाँ भाजपा ने इस क्षेत्र में अपने दिग्गज मंत्रियों की फौज और संसाधनों को प्रचार में झोंक दिया था, वहीं आम आदमी पार्टी ने स्थानीय मुद्दों, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के वादे पर भरोसा जताया। आदिवासियों ने भाजपा के बड़े दावों के मुकाबले ‘आप’ के काम की राजनीति को प्राथमिकता दी।

प्रमुख चुनावी आंकड़े: एक नजर में

डेडियापाड़ा क्षेत्र के चुनाव परिणाम बताते हैं कि यहाँ विपक्षी दलों का पूरी तरह सफाया हो गया है। चुनाव के मुख्य आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • कुल जिला पंचायत सीटें (डेडियापाड़ा क्षेत्र): 11
  • आम आदमी पार्टी की जीत: 11
  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): 0
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस: खाता नहीं खुला

यह क्लीन स्वीप न केवल गुजरात की स्थानीय राजनीति में ‘आप’ के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भी एक बड़ा संकेत है।

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