MCD स्कूलों को ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ में बदलने पर बढ़ा सियासी घमासान: भाजपा पर शिक्षा के निजीकरण का आरोप

MCD स्कूलों को 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' में बदलने पर बढ़ा सियासी घमासान: भाजपा पर शिक्षा के निजीकरण का आरोप

MCD स्कूलों को ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ में बदलने और स्कूलों के विलय को लेकर AAP ने भाजपा पर साधा निशाना। जानिए क्यों शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा शासित MCD सवालों के घेरे में है।

दिल्ली की सियासत में एक बार फिर शिक्षा का मुद्दा गरमा गया है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा शासित MCD पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि दिल्ली नगर निगम के स्कूलों को व्यवस्थित रूप से बंद करने की साजिश रची जा रही है। आरोप है कि MCD ने दिल्ली हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों को दरकिनार करते हुए 48 स्कूलों को ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ में तब्दील कर दिया है।

शिक्षा बनाम स्वास्थ्य: स्कूलों के विलय पर उठे सवाल

आरोप है कि MCD केवल स्कूलों को स्वास्थ्य केंद्रों में ही नहीं बदल रही, बल्कि कई स्कूलों के विलय (Merge) की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। विशेषज्ञों और पार्टी नेताओं का मानना है कि विलय की यह नीति स्कूलों को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का एक जरिया है। इससे स्थानीय स्तर पर बच्चों की शिक्षा की पहुंच सीमित होगी और शिक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

आम आदमी पार्टी का कहना है कि एक तरफ दिल्ली सरकार विश्वस्तरीय शिक्षा मॉडल पर काम कर रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा शासित MCD दिल्ली के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।

क्या बच्चों की शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है भाजपा?

AAP का सीधा सवाल है कि यदि MCD प्रशासन शिक्षा को लेकर गंभीर है, तो स्कूलों को ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ में क्यों बदला जा रहा है? पार्टी का तर्क है कि अस्पताल और स्कूल दोनों ही जनहित के महत्वपूर्ण संस्थान हैं, लेकिन एक को दूसरे की कीमत पर चलाना पूरी तरह अनुचित है। MCD स्कूलों के इन फैसलों को ‘शिक्षा के प्रति भाजपा की उपेक्षा’ का परिणाम बताया जा रहा है।

हाई कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी?

सबसे बड़ा सवाल दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर है। यदि अदालत ने स्कूलों के उपयोग को लेकर कोई दिशा-निर्देश दिए थे, तो उनका उल्लंघन करना प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़ा करता है। आम आदमी पार्टी ने मांग की है कि इस मामले में तत्काल स्पष्टीकरण दिया जाए और स्कूलों को बंद करने या उनका स्वरूप बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा दिल्ली नगर निगम के सदन में भी जोर-शोर से उठने के आसार हैं। दिल्ली की जनता अब यह देखना चाहती है कि क्या शिक्षा जैसे मूलभूत अधिकार के साथ हो रहे इस कथित ‘खिलवाड़’ को रोकने के लिए प्रशासन कोई कदम उठाएगा या फिर दिल्ली के ये 48 स्कूल इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाएंगे।

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