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भारतीय स्टेट बैंक ने ईबीएलआर को 7.90 से बढ़ाकर 8.15 प्रतिशत और आरएलएलआर को 7.50 से बढ़ाकर 7.75 प्रतिशत कर दिया है। नई दरें 15 अक्टूबर 2026 से लागू हैं। जानें इसका होम लोन की ईएमआई पर क्या असर पड़ सकता है।
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी कुछ लेंडिंग ब्याज दरों में बदलाव किया है। बैंक ने एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट (EBLR), रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) और कुछ अवधि वाली मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में बढ़ोतरी की है। नई दरें 15 अक्टूबर 2026 से लागू हो गई हैं। इस बदलाव का असर उन ग्राहकों पर पड़ सकता है, जिनके लोन की ब्याज दर इन बेंचमार्क दरों से जुड़ी हुई है। खासकर होम लोन लेने वाले ग्राहकों को अपनी मासिक किस्त यानी ईएमआई और लोन चुकाने की अवधि पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को समझना जरूरी है। हालांकि, ब्याज दर बढ़ने का वास्तविक असर ग्राहक के लोन समझौते, ब्याज दर के प्रकार और बैंक की रीसेट व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
SBI ने EBLR और RLLR में की बढ़ोतरी
भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट (EBLR) को 7.90 प्रतिशत से बढ़ाकर 8.15 प्रतिशत कर दिया है। यानी इसमें 0.25 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही बैंक ने रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट (RLLR) को 7.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.75 प्रतिशत कर दिया है। इस दर में भी 0.25 प्रतिशत अंक का इजाफा किया गया है।
ये नई दरें 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हैं। इन दरों से जुड़े लोन लेने वाले ग्राहकों को अपने मौजूदा ब्याज दर संबंधी नियमों की जांच करनी चाहिए। यदि किसी ग्राहक के होम लोन की ब्याज दर EBLR या RLLR से जुड़ी है, तो नई दर लागू होने पर उसके लोन की ब्याज दर में भी बदलाव हो सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी ग्राहकों की ईएमआई तत्काल बढ़ जाएगी। ब्याज दर में बदलाव का असर इस बात पर निर्भर करता है कि लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा है और उसकी ब्याज दर कब रीसेट होनी है।
क्या महंगी हो जाएगी होम लोन की EMI?
SBI की लेंडिंग दरों में बढ़ोतरी का असर होम लोन की ईएमआई पर पड़ सकता है। जब किसी फ्लोटिंग रेट लोन की ब्याज दर बढ़ती है, तो बैंक आमतौर पर ग्राहक के सामने दो विकल्पों में से किसी एक के अनुसार बदलाव कर सकता है। पहला, मासिक किस्त बढ़ाई जा सकती है। दूसरा, ईएमआई को पहले जैसा रखते हुए लोन चुकाने की अवधि बढ़ाई जा सकती है। यह व्यवस्था संबंधित लोन की शर्तों और बैंक की नीति पर निर्भर करती है।
उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ग्राहक ने लंबी अवधि के लिए होम लोन लिया है और उसकी ब्याज दर बढ़ जाती है, तो उसे कुल मिलाकर पहले से अधिक ब्याज चुकाना पड़ सकता है। यदि ईएमआई में बदलाव नहीं होता, तो लोन का भुगतान पूरा होने में अधिक समय लग सकता है। वहीं, यदि बैंक ईएमआई बढ़ाता है, तो ग्राहक के मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
इसलिए होम लोन ग्राहकों को अपने लोन खाते में लागू ब्याज दर, अगली रीसेट तारीख और बकाया मूलधन की जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। इससे वे अपने वित्तीय खर्चों की बेहतर योजना बना सकेंगे।
MCLR की दरों में भी 0.15 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी
SBI ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) की कुछ अवधि वाली दरों में भी 0.15 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। MCLR वह आंतरिक बेंचमार्क दर है, जिसका इस्तेमाल बैंक कुछ प्रकार के लोन की ब्याज दर तय करने के लिए करते हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि MCLR से जुड़े सभी लोन पर ब्याज दर में बदलाव एक ही समय पर लागू होना जरूरी नहीं है। इसका असर लोन की रीसेट तारीख और समझौते की शर्तों के अनुसार हो सकता है। इसके अलावा, बैंक की अलग-अलग अवधि वाली MCLR दरें अलग हो सकती हैं।
जिन ग्राहकों के लोन की ब्याज दर MCLR से जुड़ी है, उन्हें बैंक से अपनी संबंधित अवधि की नई दर की जानकारी लेनी चाहिए। केवल एक अवधि की दर में बदलाव के आधार पर यह मान लेना सही नहीं होगा कि सभी MCLR आधारित लोन महंगे हो जाएंगे।
EBLR, RLLR और MCLR में क्या है अंतर?
EBLR, RLLR और MCLR तीनों का इस्तेमाल लोन की ब्याज दर निर्धारित करने के लिए किया जाता है, लेकिन इनके आधार अलग हैं।
EBLR यानी एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी होती है। RLLR यानी रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट का संबंध भारतीय रिजर्व बैंक की रेपो दर से होता है। वहीं, MCLR बैंक की धन जुटाने की लागत और उससे संबंधित अन्य कारकों के आधार पर निर्धारित की जाती है।
इन बेंचमार्क दरों के अलावा ग्राहक के लोन पर लागू अंतिम ब्याज दर में बैंक द्वारा निर्धारित स्प्रेड भी
शामिल हो सकता है। स्प्रेड ग्राहक की पात्रता, जोखिम और लोन की शर्तों जैसे कारकों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए एक ही बैंक से लोन लेने वाले दो ग्राहकों की अंतिम ब्याज दर अलग-अलग हो सकती है।
SBI के ग्राहक अब क्या करें?
ब्याज दरों में बदलाव के बाद ग्राहकों को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि उनका लोन किस बेंचमार्क से जुड़ा हुआ है। इसके लिए वे अपने लोन दस्तावेज, बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, इंटरनेट बैंकिंग या संबंधित शाखा से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
होम लोन की ईएमआई में संभावित बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए मासिक बजट की समीक्षा करना भी उपयोगी रहेगा। यदि ईएमआई बढ़ती है, तो गैर-जरूरी खर्चों को नियंत्रित करके अतिरिक्त वित्तीय बोझ को संभाला जा सकता है। ग्राहक चाहें तो बैंक से यह भी पूछ सकते हैं कि ब्याज दर बढ़ने पर उनकी ईएमआई में बदलाव होगा या लोन की अवधि में।
कुल मिलाकर, SBI ने EBLR को 8.15 प्रतिशत, RLLR को 7.75 प्रतिशत और कुछ अवधि वाली MCLR दरों को बढ़ाया है। नई दरें 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हैं। इससे संबंधित बेंचमार्क से जुड़े लोन की लागत बढ़ सकती है, लेकिन प्रत्येक ग्राहक पर इसका असर उसकी लोन शर्तों और रीसेट व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग होगा।