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राघव चड्ढा ने उज्बेकिस्तान में IPU सम्मेलन में डिजिटल पहुंच, अधिकार और ऑनलाइन सुरक्षा पर भारत का पक्ष रखा। उन्होंने यूपीआई और डिजिटल समावेशन की उपलब्धियां गिनाईं।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित 12वें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियन्स में डिजिटल अधिकारों और डिजिटल पहुंच को लेकर भारत का पक्ष रखा। सम्मेलन में ‘डिजिटल युग में डिजिटल पहुंच और अधिकार’ विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य समाज के हर वर्ग को जोड़ना और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने भारत के डिजिटल परिवर्तन का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में एक अरब से अधिक लोग डिजिटल रूप से जुड़े हैं और यूपीआई के जरिए तत्काल भुगतान अब रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। भारत ने यह दिखाया है कि बड़े पैमाने पर डिजिटल विस्तार और समावेशन एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
तकनीक ऐसी हो जो किसी को पीछे न छोड़े
राघव चड्ढा ने अपने संबोधन में डिजिटल तकनीक के सामाजिक प्रभाव पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक ऐसी होनी चाहिए जो किसी व्यक्ति को व्यवस्था से बाहर किए बिना लोगों को जोड़े। इसके साथ ही नवाचार ऐसा होना चाहिए जिसमें किसी तरह का शोषण न हो और सुरक्षा ऐसी हो जिसमें अनावश्यक नियंत्रण की गुंजाइश न बने। उनके मुताबिक, डिजिटल दुनिया में विकास का आकलन केवल नई तकनीकों और स्मार्ट मशीनों की संख्या से नहीं किया जा सकता, बल्कि यह देखना जरूरी है कि इन तकनीकों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर की असली परीक्षा यह नहीं है कि हमारी मशीनें कितनी स्मार्ट हो गई हैं। असली सवाल यह है कि क्या देश के सबसे गरीब जिले में सबसे सस्ता फोन इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति भी उसी तरह डिजिटल सेवाओं तक पहुंच, सुरक्षा और अवसर प्राप्त कर सकता है, जैसे समाज के दूसरे वर्गों को मिलते हैं। उनके इस बयान में डिजिटल समानता और समावेशन को लेकर भारत के दृष्टिकोण की झलक देखने को मिली।
यूपीआई और डिजिटल समावेशन का दिया उदाहरण
राघव चड्ढा ने भारत के डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे का उल्लेख करते हुए यूपीआई को एक महत्वपूर्ण उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा बना है। स्मार्टफोन और इंटरनेट के विस्तार ने बैंकिंग तथा भुगतान सेवाओं को बड़ी आबादी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, भारत का अनुभव यह बताता है कि डिजिटल तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाते हुए भी समावेशन को प्राथमिकता दी जा सकती है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि डिजिटल क्रांति का लाभ केवल शहरों और आर्थिक रूप से मजबूत वर्गों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों, कम आय वाले परिवारों और तकनीकी संसाधनों से अपेक्षाकृत दूर रहने वाले लोगों को भी डिजिटल सेवाओं तक सुरक्षित और आसान पहुंच मिलनी चाहिए। डिजिटल अधिकारों की चर्चा के केंद्र में यही समानता होनी चाहिए।
भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामित हुए राघव चड्ढा
राघव चड्ढा को 12वें इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ यंग पार्लियामेंटेरियन्स में भारतीय संसद का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामित किया गया था। यह सम्मेलन 4 से 6 सितंबर तक उज्बेकिस्तान के समरकंद में आयोजित किया गया। नामांकन पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताया और भारतीय संसद की ओर से इस वैश्विक मंच पर हिस्सा लेने का अवसर देने के लिए उपराष्ट्रपति का आभार जताया।
इस सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न देशों के युवा सांसदों को वैश्विक चुनौतियों और उनसे जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिला। डिजिटल अधिकार, ऑनलाइन सुरक्षा, युवाओं के अधिकार, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक अवसर जैसे विषय सम्मेलन की चर्चाओं के प्रमुख हिस्से रहे।
IPU की भूमिका और सम्मेलन का महत्व
राघव चड्ढा ने अपने संबोधन में इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन के महत्व का भी उल्लेख किया। वर्ष 1889 में स्थापित IPU का मुख्यालय जिनेवा में है और यह दुनिया की राष्ट्रीय संसदों का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन है। इसमें बड़ी संख्या में सदस्य संसदें और एसोसिएट सदस्य शामिल हैं। संगठन का उद्देश्य विभिन्न देशों की संसदों के बीच संवाद, सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।
इस वर्ष सम्मेलन की थीम अशांत समय में सभी के लिए मानवाधिकार, न्याय और गरिमा को फिर से स्थापित करने पर केंद्रित रही। सम्मेलन में युवा सांसदों ने संघर्ष की परिस्थितियों में युवाओं के अधिकार, डिजिटल अधिकार एवं ऑनलाइन सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और न्याय तथा युवाओं के लिए आर्थिक अवसर जैसे विषयों पर चर्चा की।
भारत की युवा आबादी और लोकतंत्र का किया उल्लेख
राघव चड्ढा ने वैश्विक मंच पर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और युवा आबादी को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। ऐसे में भारत के पास वैश्विक स्तर पर इन मुद्दों पर अपने अनुभव साझा करने के साथ-साथ दूसरे देशों से सीखने का भी अवसर है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल अधिकार और तकनीकी बदलाव आने वाले समय में लोकतंत्र और मानवाधिकारों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इसलिए जरूरी है कि डिजिटल विकास के साथ नागरिकों की निजता, सुरक्षा, समान पहुंच और अवसरों का भी ध्यान रखा जाए।
डिजिटल भविष्य में समानता सबसे बड़ी चुनौती
राघव चड्ढा के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि डिजिटल प्रगति का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उसका लाभ समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक कितनी आसानी से पहुंच रहा है। भारत में डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के बीच डिजिटल विभाजन को कम करना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इंटरनेट, स्मार्टफोन, डिजिटल साक्षरता और सुरक्षित ऑनलाइन सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित करना डिजिटल समावेशन की दिशा में अहम कदम हो सकता है। वैश्विक मंच पर भारत के डिजिटल अनुभव को रखते हुए राघव चड्ढा ने इसी बात पर जोर दिया कि तकनीक का भविष्य तभी सार्थक होगा, जब वह हर व्यक्ति के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान को केंद्र में रखे।