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AAP विधायक संजीव झा ने दिल्ली विधानसभा में कथित चावल घोटाले पर चर्चा की मांग की। आरोप है कि गरीबों के लिए मिलने वाला सब्सिडी वाला चावल निजी कंपनी को ऊंची कीमत पर देने की तैयारी थी।
दिल्ली विधानसभा में कथित चावल घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने बुधवार को BJP सरकार पर तीखा हमला बोला। AAP विधायक संजीव झा ने आरोप लगाया कि गरीबों के लिए मिलने वाले सब्सिडी वाले चावल को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के बजाय हरियाणा की एक निजी कंपनी तक पहुंचाने की तैयारी की गई। उन्होंने इस पूरे मामले पर विधानसभा में तत्काल चर्चा कराने की मांग की। संजीव झा का दावा है कि यदि कथित अनियमितता समय रहते सामने नहीं आती, तो यह मामला हजारों करोड़ रुपये के घोटाले में बदल सकता था।
AAP नेता ने अपने बयान में कहा कि गरीबों के अधिकार के लिए निर्धारित चावल को कथित तौर पर अधिक कीमत पर निजी कंपनी को देने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि आखिर गरीबों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले खाद्यान्न की व्यवस्था में निजी कंपनी को क्यों शामिल किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में कीमतों को लेकर क्या व्यवस्था अपनाई गई।
‘गरीबों के हक का चावल निजी कंपनी को देने की कोशिश’
संजीव झा ने आरोप लगाया कि दिल्ली के गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए निर्धारित सब्सिडी वाले चावल को उनके बीच वितरित करने के बजाय हरियाणा स्थित एक निजी कंपनी को दिए जाने की योजना बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में चावल की खरीद और बिक्री की कीमत के बीच कथित अंतर को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, AAP ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार और असम स्थित एक कॉरपोरेशन की ओर से भारतीय खाद्य निगम (FCI) से सब्सिडी वाले चावल की मांग की गई थी। AAP का दावा है कि प्रति सप्ताह करीब 31,000 मीट्रिक टन चावल की मांग की गई और आरोप लगाया गया कि यह खाद्यान्न इच्छित लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय हरियाणा की एक निजी कंपनी को बेचे जाने की व्यवस्था थी।
AAP ने लगाया हजारों करोड़ की योजना का आरोप
इस मामले को लेकर AAP दिल्ली सरकार पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की योजना बनाने का आरोप लगा रही है। AAP के नेताओं ने दावा किया है कि अगर यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रहती तो कथित घोटाले की रकम हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच सकती थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, AAP दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इससे पहले दावा किया था कि कथित व्यवस्था तीन साल तक चलने वाली थी और इसमें लगभग 22,000 करोड़ रुपये के लेनदेन का आरोप लगाया गया। AAP ने यह भी दावा किया कि सब्सिडी वाले चावल की कीमत और कथित बिक्री कीमत के बीच अंतर से बड़ी रकम का नुकसान हो सकता था।
हालांकि, इन आरोपों को फिलहाल राजनीतिक दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी कथित घोटाले की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच, सरकारी दस्तावेज और सक्षम एजेंसियों के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
विधानसभा में चर्चा की मांग, AAP विधायकों को मार्शल आउट किया गया
बीजेपी सरकार का कहना है कि उनका इसमें कोई रोल नहीं है। सवाल ये है कि अगर ऐसा है तो एडिशनल कमिश्नर को सस्पेंड क्यों किया गया।
हैरानी की बात है कि असम की कंपनी मंत्री जी को लिखती है और मंत्री जी मामले को CS या ACS की बजाय एडिशनल कमिश्नर को रेफर करते हैं।@Sanjeev_aap pic.twitter.com/iL8eU2O9he
— Aam Aadmi Party Delhi (@AAPDelhi) August 11, 2026
चावल मामले को लेकर दिल्ली विधानसभा में विपक्ष ने तत्काल चर्चा की मांग की। रिपोर्टों के मुताबिक, चर्चा की मांग को लेकर हुए हंगामे के बीच दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने आठ विपक्षी विधायकों को सदन से मार्शल आउट कराया। विपक्षी विधायक कथित सब्सिडी वाले चावल के वितरण को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे थे।
इस कार्रवाई ने पहले से चल रहे राजनीतिक विवाद को और तेज कर दिया। AAP का आरोप है कि सरकार विपक्ष को इस मामले पर सवाल उठाने और चर्चा करने का अवसर नहीं देना चाहती। वहीं सत्ता पक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्ष के आचरण पर आपत्ति जताई है।
BJP सरकार ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
चावल मामले पर दिल्ली सरकार की ओर से AAP के आरोपों को खारिज किया गया है। दिल्ली के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री और BJP नेता मंजिंदर सिंह सिरसा ने AAP नेताओं सौरभ भारद्वाज और संजीव झा के आरोपों को बेबुनियाद, झूठा और मनगढ़ंत बताया है। उन्होंने दोनों नेताओं को अपने आरोप वापस लेने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिए समय देने की बात कही तथा ऐसा न करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
सिरसा ने आरोप लगाया कि AAP नेता राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के दावे कर रहे हैं। BJP की ओर से भी AAP नेताओं के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताया गया है।
चावल की कीमत को लेकर क्या है विवाद?
AAP के आरोपों के अनुसार, सब्सिडी वाला चावल करीब 23.20 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से उपलब्ध कराया जाना था, जबकि कथित तौर पर इसे करीब 46 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खुले बाजार में बेचने की बात कही गई। AAP का दावा है कि कीमत के इस अंतर से हर सप्ताह बड़ी रकम का कथित नुकसान हो सकता था।
यही कीमतों का अंतर AAP के आरोपों का प्रमुख आधार है। पार्टी का कहना है कि गरीबों के लिए मिलने वाली सब्सिडी का उद्देश्य जरूरतमंदों तक खाद्यान्न पहुंचाना है और यदि इसे किसी अन्य व्यवस्था के जरिए निजी बाजार तक पहुंचाया जाता है, तो इस पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
‘समय रहते सामने आया मामला’
संजीव झा ने दावा किया कि कथित व्यवस्था समय रहते सामने आ गई, वरना यह मामला बहुत बड़े वित्तीय घोटाले में बदल सकता था। उन्होंने विधानसभा में इस पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि AAP की ओर से लगाए गए कथित घोटाले के आरोपों और सरकार के इनकार के बीच वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
चावल मामले पर बढ़ता राजनीतिक टकराव
दिल्ली में चावल वितरण का यह विवाद अब विधानसभा से निकलकर बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप ले चुका है। AAP इसे गरीबों के अधिकार और सरकारी खाद्यान्न व्यवस्था में पारदर्शिता से जोड़ रही है, जबकि BJP सरकार आरोपों को राजनीतिक और तथ्यहीन बता रही है।
विधानसभा में चर्चा की मांग और विपक्षी विधायकों के मार्शल आउट होने से विवाद और बढ़ गया है। आने वाले दिनों में यदि इस मामले पर दस्तावेज और आधिकारिक जवाब सामने आते हैं, तो कथित चावल घोटाले को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल AAP लगातार इस मुद्दे को उठाने और सरकार से जवाब मांगने पर जोर दे रही है, जबकि BJP सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।