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29 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार शानदार तेजी के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 889 अंक चढ़ा और निफ्टी 24,250 के पार पहुंच गया। IT, FMCG, मेटल और बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली।
भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार, 29 जुलाई को शानदार तेजी के साथ कारोबार का समापन किया। अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve) की मौद्रिक नीति घोषणा से पहले निवेशकों ने जमकर खरीदारी की, जिससे प्रमुख सूचकांकों में एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। आईटी, एफएमसीजी, मेटल और बैंकिंग शेयरों में मजबूत खरीदारी के चलते बाजार का रुख पूरे दिन सकारात्मक बना रहा।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 888.68 अंक (1.16%) की तेजी के साथ 77,654.60 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 264.85 अंक (1.10%) चढ़कर 24,250.20 के स्तर पर बंद हुआ। यह तेजी ऐसे समय आई जब वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत देखने को मिले, लेकिन घरेलू निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहा।
आईटी, मेटल और FMCG सेक्टर ने संभाली बाजार की कमान
बुधवार की तेजी में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा। निफ्टी आईटी इंडेक्स 2.32% की बढ़त के साथ बंद हुआ। आईटी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों और अमेरिकी फेड के ब्याज दरों को स्थिर रखने की उम्मीद ने इस सेक्टर में खरीदारी को बढ़ावा दिया।
इसके अलावा निफ्टी मेटल इंडेक्स 2.31% और निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.66% की बढ़त के साथ बंद हुए। हेल्थकेयर, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टरों में भी निवेशकों ने अच्छी खरीदारी की, जिससे बाजार की तेजी को व्यापक समर्थन मिला।
इन शेयरों ने किया शानदार प्रदर्शन
सेंसेक्स की कंपनियों में हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL) सबसे बड़ा लाभ कमाने वाला शेयर रहा। कंपनी का शेयर 4.59% की बढ़त के साथ बंद हुआ।
इसके अलावा इन्फोसिस के शेयर में 4.18%, ट्रेंट में 2.74%, टाटा स्टील में 2.55%, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) में 2.51% और भारती एयरटेल में 2.25% की तेजी दर्ज की गई।
बैंकिंग सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे वित्तीय क्षेत्र ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की।
इन शेयरों में रही कमजोरी
हालांकि पूरे बाजार में तेजी का माहौल रहा, लेकिन कुछ प्रमुख शेयर दबाव में भी दिखाई दिए।
अडानी पोर्ट्स सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर रहा और इसमें 3.10% की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा, पावर ग्रिड, बीईएल, एनटीपीसी और टाइटन के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन शेयरों में मुनाफावसूली (Profit Booking) के कारण गिरावट देखने को मिली।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी
बाजार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.48% चढ़कर प्रमुख सूचकांकों से भी बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रहा।
वहीं निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.82% की बढ़त के साथ बंद हुआ। इससे यह संकेत मिला कि निवेशकों का भरोसा केवल ब्लूचिप कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिड और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेश बढ़ रहा है।
India VIX में गिरावट से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
बाजार में तेजी का एक महत्वपूर्ण संकेत इंडिया VIX में आई गिरावट भी रही। इसे बाजार का ‘फियर इंडेक्स’ कहा जाता है क्योंकि यह बाजार में संभावित अस्थिरता को दर्शाता है।
बुधवार को इंडिया VIX 4.41% गिरकर 12.01 पर आ गया। इसका अर्थ है कि निवेशकों को निकट भविष्य में बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना कम दिखाई दे रही है।
कम VIX आमतौर पर सकारात्मक बाजार धारणा का संकेत माना जाता है और इससे निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ता है।
फेडरल रिजर्व के फैसले पर टिकी रही नजर
बाजार की तेजी के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक भी रही। अधिकांश निवेशकों को उम्मीद थी कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा।
इसके साथ ही बाजार की नजर फेड की भविष्य की रणनीति पर भी रही, क्योंकि ब्याज दरों में संभावित बदलाव का असर वैश्विक पूंजी प्रवाह और भारतीय बाजारों पर पड़ सकता है।
कॉरपोरेट नतीजों ने भी दिया बाजार को सहारा
इस दौरान कई कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। मजबूत कॉरपोरेट आय, आईटी कंपनियों में खरीदारी और रुपये की मजबूती ने बाजार को अतिरिक्त समर्थन दिया।
हालांकि एशियाई बाजारों में AI से जुड़े टेक शेयरों में बिकवाली और मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, फिर भी भारतीय बाजार ने घरेलू आर्थिक मजबूती के दम पर बेहतर प्रदर्शन किया।
आगे क्या रहेगी बाजार की दिशा?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की टिप्पणी, वैश्विक आर्थिक संकेतकों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी।
यदि कॉरपोरेट आय मजबूत रहती है और वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में तेजी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है। हालांकि निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन अवश्य करना चाहिए।