72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘श्रीकांत’ ने सर्वश्रेष्ठ हिंदी फिल्म का पुरस्कार जीता है। निर्देशक तुषार हीरानंदानी ने बताया कि कैसे स्टार्स ने फीस कम की और शरद केलकर ने महज 1 रुपये में काम किया।
दृष्टिबाधित उद्योगपति श्रीकांत बोला के जीवन पर आधारित और राजकुमार राव अभिनीत बायोपिक ‘श्रीकांत’ (Srikanth) ने 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ हिंदी फीचर फिल्म (Best Hindi Feature Film) का प्रतिष्ठित खिताब अपने नाम कर लिया है। यह जीत निर्देशक-निर्माता जोड़ी तुषार हीरानंदानी और उनकी पत्नी निधि परमार हीरानंदानी के लिए बेहद खास है, क्योंकि इस फिल्म को सिनेमाघरों तक पहुँचाने का सफर किसी बड़े संघर्ष से कम नहीं था। सीमित बजट से लेकर रिलीज की अनिश्चितताओं तक, पूरी टीम ने हर मोड़ पर चुनौतियों का सामना किया और अंततः देश का सबसे बड़ा सिनेमाई सम्मान हासिल किया।
स्टार्स ने ली फीस में कटौती: शरद केलकर ने महज 1 रुपये में की फिल्म
फिल्म के निर्देशक तुषार हीरानंदानी ने खुलासा किया कि ‘श्रीकांत’ का निर्माण केवल इसलिए संभव हो सका क्योंकि इसके मुख्य कलाकारों ने कहानी पर अटूट विश्वास जताया। राजकुमार राव, ज्योतिका और आलिया एफ (Alaya F) जैसे कलाकारों ने फिल्म के बजट को संतुलित करने के लिए अपनी फीस में भारी कटौती की। कलाकारों ने व्यक्तिगत और मेक-अप जैसे खर्चों में भी कटौती की, जबकि अभिनेता शरद केलकर ने इस प्रेरणादायक फिल्म का हिस्सा बनने के लिए मानदेय के रूप में केवल 1 रुपया स्वीकार किया। निर्माता निधि परमार हीरानंदानी ने टी-सीरीज के प्रमुख भूषण कुमार का आभार जताते हुए कहा कि जब बाजार की स्थिति प्रतिकूल थी, तब भूषण जी ने इस गैर-व्यावसायिक कहानी पर दांव लगाया और मेकर्स के विजन का पूरा साथ दिया।
26 साल बाद ज्योतिका की बॉलीवुड में वापसी: सूर्या ने निभाई अहम भूमिका
दक्षिण भारतीय सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री ज्योतिका ने इस फिल्म के जरिए 26 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हिंदी सिनेमा में वापसी की। ज्योतिका को इस प्रोजेक्ट से जोड़ना मेकर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, क्योंकि लंबे समय तक बॉलीवुड से दूर रहने के कारण वे कार्य संस्कृति और सम्मान को लेकर असमंजस में थीं। हालांकि, ज्योतिका के पति और तमिल सुपरस्टार सूर्या की सलाह तथा निर्देशक तुषार हीरानंदानी के निरंतर प्रयासों ने रंग दिखाया। तुषार ने उनसे कई मुलाकातें कीं और अंततः ज्योतिका को श्रीकांत बोला की शिक्षिका ‘देविका मैम’ के महत्वपूर्ण किरदार के लिए आश्वस्त कर लिया।
सीमित बजट के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर परचम एक मध्यम बजट की फिल्म में बड़े कलाकारों को कास्ट करना और भारत से लेकर विदेशों तक 5 अलग-अलग आउटडोर शेड्यूल की शूटिंग पूरी करना एक बेहद जटिल काम था। लेकिन कलाकारों द्वारा फीस में की गई कटौती, कुशल बजट प्रबंधन और टी-सीरीज के मजबूत सपोर्ट के बल पर मेकर्स ने इस चुनौतीपूर्ण सफर को पूरा किया। फिल्म ‘श्रीकांत’ की यह ऐतिहासिक जीत इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि पटकथा में ईमानदारी हो और नीयत साफ हो, तो सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वस्तरीय और प्रेरणादायक सिनेमा का निर्माण किया जा सकता है।