Table of Contents
कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा। सरकार संसद में चर्चा के लिए तैयार है। भूपेंद्र यादव ने विपक्ष से राजनीति न करने की अपील की।
देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता और NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। शुक्रवार को केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने घोषणा की कि सरकार द्वारा पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast-Track Courts) गठित करने और रोजाना (Day-to-Day) सुनवाई करने का निर्णय देश के युवाओं के भविष्य के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक पहल से न केवल जांच समयबद्ध तरीके से पूरी होगी, बल्कि दोषियों को त्वरित सजा मिलेगी और पीड़ित युवाओं को न्याय हासिल होगा।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और नया मसौदा: त्वरित जांच और सख्त सजा का प्रावधान
कानून मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पेपर लीक की समीक्षा के लिए बैठकों का दौर चला, जिसके बाद यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया।
- रोजाना सुनवाई: अदालतों में लंबित या नए दर्ज होने वाले पेपर लीक संबंधी मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें गठित की जाएँगी, जहाँ दिन-प्रतिदिन के आधार पर सुनवाई होगी।
- समयबद्ध जांच: जांच एजेंसियों के लिए समयसीमा तय की जाएगी ताकि मुकदमों में सालों का बिलंब न हो।
- सख्त कानून का ड्राफ्ट: सरकार एक नया विधेयक (Draft Law) लाने जा रही है, जिसमें पेपर माफियाओं और संलिप्त संस्थाओं के खिलाफ कड़े दंडात्मक प्रावधान शामिल होंगे।
“कल प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया यह निर्णय कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी, एक ऐतिहासिक कदम है। रोजाना सुनवाई, त्वरित सुनवाई और समयबद्ध जांच से युवाओं को तुरंत न्याय मिलेगा।”
— अर्जुन राम मेघवाल (केंद्रीय कानून मंत्री)
सोनम वांगचुक का अनशन समाप्त: सरकार की संवेदनशीलता का परिणाम
कानून मंत्री ने लद्दाख के प्रमुख कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल समाप्त करने पर भी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार शुरू से ही इस संवेदनशील मुद्दे पर छात्रों और नागरिक समाज के साथ निरंतर संवाद कर रही थी।
मेघवाल ने कहा, “सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। सरकार इस पूरे मामले पर बेहद संवेदनशील है और संवाद के दरवाजे हमेशा खुले रखे हैं। आगे भी विभिन्न विषयों पर बातचीत जारी रहने के सकारात्मक संकेत हैं।”
संसद में चर्चा के लिए तैयार सरकार: विपक्ष से कार्यवाही चलने देने की अपील
संसद के चालू सत्र में NEET और पेपर लीक मुद्दे पर जारी राजनीतिक गतिरोध पर बोलते हुए अर्जुन राम मेघवाल ने विपक्षी दलों से संसद चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर सदन में सबसे पहले और विस्तृत चर्चा कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कानून मंत्री ने विपक्षी दलों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा:
“अगर विपक्ष सबसे पहले पेपर लीक पर चर्चा चाहता है, तो हम पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन अब वे नियमों का हवाला दे रहे हैं—राज्यसभा में नियम 267 और लोकसभा में नियम 56 पर अड़े हुए हैं। जब बात चर्चा की है, तो शर्तें क्यों लगाई जा रही हैं? आइए और पूरी समग्रता (Totality) में चर्चा कीजिए कि किन-किन राज्यों में पेपर लीक हुए, क्या कार्रवाइयां हुईं और कौन-कौन शामिल था।”
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव की विपक्ष को सलाह: “छात्रों के भविष्य पर न करें राजनीति”
दूसरी ओर, केंद्रीय पर्यावरण एवं श्रम मंत्री भूपेंद्र यादव ने NEET मुद्दे पर विपक्ष के “आक्रामक रुख” की तीखी आलोचना की। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष को छोटे-मोटे राजनीतिक फायदों के लिए देश के छात्रों के भविष्य से नहीं खेलना चाहिए।
- संसदीय मंच का उपयोग: भूपेंद्र यादव ने कहा कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) के माध्यम से चर्चा की समय-सीमा तय करके संसद के पटल पर विस्तृत बहस की जानी चाहिए।
- गैर-जरूरी राजनीति से परहेज: उन्होंने विपक्षी नेताओं से अपील की कि वे उत्तेजना फैलाने के बजाय देश की शिक्षा प्रणाली और युवाओं के सुरक्षित भविष्य के लिए संसद में एक स्वस्थ और जिम्मेदार चर्चा में भाग लें।
केंद्रीय मंत्रियों के वक्तव्यों से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार एक तरफ फास्ट ट्रैक कोर्ट और कड़े कानूनों के जरिए कानून-व्यवस्था को मजबूत करने में जुटी है, तो दूसरी तरफ संसद में व्यापक बहस के माध्यम से पूरे मामले को देश के सामने रखने की पक्षधर है। अब देखना यह होगा कि क्या विपक्ष संसद में बिना किसी तकनीकी शर्त के चर्चा में शामिल होता है या राजनीतिक गतिरोध बरकरार रहता है।