Table of Contents
दिल्ली में भारी मानसून बारिश के बाद सीएम रेखा गुप्ता ने शालीमार विलेज का दौरा किया। पीडब्ल्यूडी मंत्री परवेश साहिब सिंह ने दावा किया कि मिंटो ब्रिज पर ट्रैफिक सामान्य रहा और जलभराव को 30 मिनट में ठीक किया गया।
दिल्ली में मॉनसून की भारी बारिश के बाद जनजीवन प्रभावित हुआ है, जिसके बाद सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को अपने विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले शालीमार विलेज (Shalamar Village) का दौरा किया। उन्होंने जमीन पर उतरकर जलभराव की स्थिति और ड्रेनेज (पानी निकासी) की व्यवस्थाओं का खुद जायजा लिया। इस निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी कीमत पर जलभराव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और पानी की सुचारू निकासी तुरंत सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों का कहना है कि सरकार के सभी संबंधित विभाग और टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ फील्ड में तैनात हैं, ताकि भारी बारिश के कारण आम जनता को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े।
बारिश के बाद की स्थिति की समीक्षा करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री परवेश साहिब सिंह भी पूरी तरह सक्रिय दिखे। उन्होंने आईटीओ (ITO) स्थित पीडब्ल्यूडी के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (Control Room) का औचक दौरा किया। वहां उन्होंने शहरभर में जलभराव को रोकने के लिए की गई डी-वॉटरिंग (पानी निकालने) की व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा की। समीक्षा के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि इस साल की स्थिति पिछले वर्षों की तुलना में काफी बेहतर है। सरकार ने दिल्ली की जनता से वादा किया था कि वे एक ऐसा ड्रेनेज सिस्टम तैयार करेंगे जिससे लोग जलजमाव की चिंता किए बिना बारिश का आनंद ले सकें, और अब उस दिशा में किए गए काम के परिणाम जमीन पर दिखाई दे रहे हैं।
मिंटो ब्रिज की सफलता और ’30 मिनट’ का दावा
लोक निर्माण मंत्री ने दिल्ली के सबसे संवेदनशील माने जाने वाले मिंटो ब्रिज (Minto Bridge) का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में दिल्ली में 100 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इसके बावजूद, मिंटो ब्रिज—जहाँ पहले मामूली बारिश में भी बड़ी-बड़ी बसें और गाड़ियाँ डूब जाती थीं—वहाँ इस बार यातायात पूरी तरह सामान्य रहा और गाड़ियाँ बिना रुके चलती रहीं। परवेश साहिब सिंह ने स्पष्ट किया कि जहां भी पानी जमा हुआ, उसे 30 मिनट के भीतर साफ कर दिया गया। उनके अनुसार, “थोड़ी देर के लिए पानी जमा होना जलभराव (Waterlogging) नहीं कहलाता।” उन्होंने बताया कि सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण (I&FC) विभाग और PWD के अधिकारी मॉनसून का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल
दिल्ली सरकार इस बार जलभराव की समस्या से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक और रियल-टाइम मॉनिटरिंग का सहारा ले रही है। PWD मंत्री ने जानकारी दी कि शहर के ऐसे 45 स्थानों पर, जो अतीत में गंभीर जलभराव के लिए बदनाम थे, 179 विशेष कैमरे स्थापित किए गए हैं। इन कैमरों की मदद से कंट्रोल रूम से हर संवेदनशील इलाके पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अधिकतम मामलों में जलभराव के केवल 10 से 15 मिनट के भीतर पानी को पूरी तरह ड्रेन कर दिया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भारी बारिश के दौरान भी दिल्ली के नागरिक सुरक्षित और बिना किसी डर या रुकावट के अपने गंतव्य तक आ-जा सकें।
आईएमडी (IMD) के आंकड़े और प्रभावित इलाके
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में सुबह 8:30 बजे समाप्त हुए 24 घंटों के भीतर रिकॉर्ड 72.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इस भारी बारिश के कारण शहर के नियंत्रण कक्ष को जलभराव से संबंधित लगभग 40 शिकायतें या कॉल प्राप्त हुए। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, दोपहर तक इनमें से 32 समस्याओं का समाधान कर दिया गया था और शेष पर तेजी से काम चल रहा था। शुरुआती तौर पर मयूर विहार और सीलमपुर गुरुद्वारा रोड जैसे इलाकों से जलभराव की बड़ी शिकायतें आईं, जहां टीमों ने तुरंत पहुंचकर मोर्चा संभाला। इसके अलावा विकास मार्ग, पूर्वी दिल्ली के कई अंदरूनी हिस्सों, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास, मुनिरका, सदर बाजार और द्वारका जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भी सड़कों पर पानी जमा होने के कारण लोगों को आवाजाही में दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिसे साफ करने के लिए नगर निगम और पीडब्ल्यूडी की टीमें लगातार जुटी रहीं।