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सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा के सिविल अस्पतालों के कायाकल्प के निर्देश दिए हैं। अब सिविल सर्जनों के पास 10 लाख तक की वित्तीय शक्ति होगी और अस्पताल प्राइवेट स्तर की सुविधाएं देंगे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी नायब सिंह सैनी ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में एक बड़ा और साहसी निर्णय लिया है। उन्होंने राज्य के सभी जिला सिविल अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के निर्देश दिए हैं ताकि आम जनता को सरकारी अस्पतालों में प्राइवेट अस्पतालों से भी बेहतर और सुविधाजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
मुख्यमंत्री का बड़ा विजन: ‘सरकारी अस्पताल, प्राइवेट से बेहतर’
हाल ही में चंडीगढ़ में आयोजित एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक में सीएम नायब सिंह सैनी सैनी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अब उपचार के लिए प्राइवेट अस्पतालों की ओर रुख न करना पड़े, इसके लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का कायाकल्प किया जाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
निर्णय के मुख्य बिंदु:
मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP ने स्वास्थ्य सुविधाओं, सरकारी अस्पतालों के आधुनिकीकरण तथा मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की समीक्षा की।
उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों के नागरिक अस्पतालों को इस प्रकार से अपग्रेड किया जाए कि ये आमजन के लिए निजी अस्पतालों से भी अधिक… pic.twitter.com/UXltEmVaQT
— DPR Haryana (@DiprHaryana) June 21, 2026
- वित्तीय शक्तियों में भारी वृद्धि: विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री ने सिविल सर्जनों की वित्तीय शक्तियों को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर सीधे 10 लाख रुपये करने का निर्देश दिया है। इससे अस्पताल के रख-रखाव और छोटी-मोटी मरम्मत के कार्यों के लिए फाइलों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
- अत्याधुनिक निदान सुविधाएं: मुख्यमंत्री ने सुनिश्चित करने को कहा है कि हर जिला अस्पताल में MRI, CT स्कैन, डिजिटल एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हों। अब तक 10 जिलों में यह काम पूरा हो चुका है और शेष में इसे तेजी से पूरा करने का लक्ष्य है।
- निजी क्षेत्र जैसी स्वच्छता और सुरक्षा: अस्पतालों में स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इसे अब पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर संचालित किया जाएगा, ताकि सेवाओं की गुणवत्ता प्राइवेट अस्पतालों के स्तर की हो सके।
- दवाओं की उपलब्धता: सीएम ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने के निर्देश दिए हैं ताकि मरीजों को बाहर से दवा न खरीदनी पड़े। यदि कोई डॉक्टर बाहर की दवा लिखता है, तो उसे पर्ची पर कारण स्पष्ट करना होगा।
मेडिकल कॉलेजों का विस्तार
स्वास्थ्य अवसंरचना को और मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने चल रही मेडिकल कॉलेजों की निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वर्तमान में हरियाणा में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 6 से बढ़कर 17 हो गई है, और MBBS सीटों की संख्या 700 से बढ़कर 2,710 तक पहुंच गई है, जिससे प्रदेश को भविष्य में पर्याप्त संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर मिल सकेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर नागरिक अपने ही जिले में विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सके।” इन सुधारों का सीधा उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, पारदर्शी और आधुनिक बनाना है ताकि हरियाणा का ‘हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर’ देश भर में उदाहरण बन सके।