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आईएमए देहरादून में पहली बार महिला कैडेट्स की पासिंग आउट परेड आयोजित। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दीक्षांत समारोहों की समीक्षा की।
शनिवार, 13 जून 2026, भारतीय सैन्य इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन के रूप में दर्ज हो गया है। आज देश के दो प्रमुख सैन्य संस्थानों, भारतीय सैन्य अकादमी (IMA), देहरादून और वायु सेना अकादमी (AFA), डुंडीगल में भव्य दीक्षांत समारोह आयोजित किए गए। ये समारोह न केवल युवा अधिकारियों के लिए एक नई यात्रा की शुरुआत हैं, बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों की बदलती कार्यसंस्कृति और समावेशी भविष्य का प्रतीक भी हैं।
आईएमए देहरादून: महिला अधिकारियों का ऐतिहासिक पदार्पण
देहरादून स्थित ऐतिहासिक चेतवुड बिल्डिंग ड्रिल स्क्वायर पर आयोजित 158वें नियमित पाठ्यक्रम और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की पासिंग आउट परेड (POP) इस वर्ष विशेष रूप से ऐतिहासिक रही। भारत की राष्ट्रपति और सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर द्रौपदी मुर्मू ने इस परेड की समीक्षा की। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी उपस्थित रहे।
यह परेड आईएमए के 94 वर्षों के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि पहली बार आईएमए से महिला अधिकारियों का एक बैच पास होकर भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त कर रहा है। कुल 515 जेंटलमैन और लेडी कैडेट्स में नौ महिला कैडेट्स शामिल हैं, जिन्होंने जुलाई 2025 में अकादमी में प्रवेश किया था। इन महिला अधिकारियों का अपने पुरुष समकक्षों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर परेड करना, भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और सैन्य नेतृत्व में लैंगिक समावेशिता की दिशा में एक बड़ा कदम है। साथ ही, इस बैच में 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट्स भी शामिल थे, जो अपने-अपने देशों की सेनाओं में योगदान देंगे।
वायु सेना अकादमी: 217वें कोर्स का सफल समापन
दूसरी ओर, तेलंगाना के डुंडीगल स्थित वायु सेना अकादमी में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 217वें कोर्स की संयुक्त स्नातक परेड (CGP) की समीक्षा की। यह परेड भारतीय वायु सेना (IAF) में सक्रिय सेवा के लिए उड़ान कैडेटों के कठिन प्रशिक्षण के सफल समापन का प्रतीक है। रक्षा मंत्री ने ‘पिपिंग एंड कमीशनिंग’ समारोह के दौरान नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
यह संयुक्त स्नातक परेड एक उड़ान कैडेट के लिए केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह वर्षों के कठोर सैन्य प्रशिक्षण, अनुशासन और त्याग का चरमोत्कर्ष है। वायु सेना में शामिल होने वाले इन युवा अधिकारियों के लिए यह एक ऐसा क्षण है जो उन्हें देश की सुरक्षा और संप्रभुता के रक्षक के रूप में स्थापित करता है। रक्षा मंत्री ने इन युवा योद्धाओं के उत्साह को सराहा और उन्हें वायु सेना की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।
सैन्य प्रशिक्षण और सेवा का संकल्प
किसी भी कैडेट के लिए पासिंग आउट परेड (POP) या स्नातक परेड उसके जीवन का सबसे गौरवशाली क्षण होता है। आईएमए और वायु सेना अकादमी में आज जो दृश्य देखने को मिला, वह देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। महीनों और वर्षों की कड़ी मेहनत, मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति की परीक्षा के बाद, जब ये कैडेट वर्दी पहनकर ‘अंतिम पग’ पार करते हैं, तो वे केवल एक अधिकारी नहीं बनते, बल्कि वे देश की सुरक्षा के प्रति एक अटूट प्रतिज्ञा लेते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति ने इन आयोजनों की गरिमा को और बढ़ा दिया। यह दिन यह याद दिलाने के लिए है कि भारत की सुरक्षा की बागडोर संभालने वाले युवा कितने सक्षम और प्रतिबद्ध हैं। विशेष रूप से आईएमए से पहली बार महिला अधिकारियों के कमीशन होने से यह स्पष्ट है कि भारतीय सेना अब नए युग की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है। यह समावेशी दृष्टिकोण न केवल सेना की क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि देश की आधी आबादी के आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।
आज इन सैन्य अकादमियों से पास होकर निकले ये अधिकारी न केवल तकनीकी रूप से दक्ष हैं, बल्कि वे साहस, नैतिकता और देशभक्ति के उन मूल्यों से लैस हैं, जो उन्हें एक सच्चा ‘ऑफिसर और जेंटलमैन’ बनाते हैं। राष्ट्र इन युवा जाबांजों के उज्ज्वल भविष्य और उनकी वीरतापूर्ण सेवा के लिए नतमस्तक है।