प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिटी की सीईओ जेन फ्रेजर से मुलाकात की। चर्चा का मुख्य केंद्र ‘विकसित भारत 2047’, निवेश, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैकल्पिक ऊर्जा रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया बैठक सिटी (Citi) की चेयरपर्सन और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) जेन फ्रेजर के साथ भारत की उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति की छवि को और अधिक सुदृढ़ करने वाली रही है। यह महत्वपूर्ण मुलाकात न केवल दोनों संस्थाओं के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि वैश्विक वित्तीय संस्थान भारत के ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को लेकर कितने आश्वस्त और उत्साहित हैं। इस बैठक में चर्चा के मुख्य केंद्र बिंदु वे रणनीतिक क्षेत्र रहे जो आने वाले दशकों में भारत की विकास दर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सक्षम हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य न केवल अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अपनी भूमिका का विस्तार करना है।
इस उच्च-स्तरीय चर्चा में निवेश और पूंजी प्रवाह (capital flows) पर विशेष जोर दिया गया। सिटी ने भारत में अपने लंबे 125 वर्षों के इतिहास और यहां की आर्थिक परिवर्तनकारी यात्रा में अपनी सक्रिय भागीदारी को साझा किया। यह बैठक इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक निवेशक भारत के सुधार एजेंडे पर भरोसा कर रहे हैं और यहां की विकास गाथा में भागीदार बनने के लिए उत्सुक हैं। चर्चा का एक प्रमुख हिस्सा यह था कि सिटी किस प्रकार वैश्विक निवेशकों को भारत की ओर आकर्षित करने में एक सेतु की भूमिका निभा सकता है। साथ ही, भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार करने में सहायता प्रदान करना भी इस संवाद का महत्वपूर्ण अंग रहा, जिससे भारतीय उद्यम वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी जगह बना सकें।
बैठक का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उभरती हुई तकनीकों और ऊर्जा समाधानों पर विचार-विमर्श था। प्रधानमंत्री मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, विशेष रूप से सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन, को भविष्य के विकास के इंजन के रूप में रेखांकित किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के संबंध में, नियामक पहलुओं (regulatory aspects) और आर्थिक विकास में इसके योगदान पर विस्तृत चर्चा हुई। यह संकेत देता है कि भारत एआई के प्रति एक संतुलित और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण अपना रहा है, जहाँ नवाचार को प्रोत्साहित करते हुए सुरक्षा और नैतिक मानकों का भी ध्यान रखा जाए। वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की प्रतिबद्धता, विशेषकर ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन में, सिटी जैसे वैश्विक संस्थानों के लिए एक बड़े निवेश के अवसर के रूप में उभरी है।
इस पूरी बैठक का आयोजन मुंबई में आयोजित ‘सिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस’ की पृष्ठभूमि में हुआ, जहाँ 1,500 से अधिक क्लाइंट्स और वैश्विक निवेशकों ने भाग लिया। यह सम्मेलन भारत की निवेश संभावनाओं को प्रदर्शित करने का एक वैश्विक मंच बना, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब वैश्विक पूंजी के लिए एक पसंदीदा गंतव्य है। जेन फ्रेजर के साथ यह संवाद केवल एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि यह भारत के भविष्य के रोडमैप पर वैश्विक विश्वास की एक मुहर थी। सिटी इंडिया के प्रमुख के. बालसुब्रमण्यम की उपस्थिति ने भी इस चर्चा को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने की गंभीरता को दर्शाया।
अंततः, यह बैठक भारत की उस आर्थिक रणनीति को बल प्रदान करती है जिसमें सरकार और वैश्विक निजी क्षेत्र मिलकर कार्य कर रहे हैं। जब प्रधानमंत्री मोदी जैसे वैश्विक नेता और जेन फ्रेजर जैसी प्रभावशाली व्यावसायिक हस्तियां एक साथ बैठती हैं, तो यह सीधे तौर पर निवेश के नए द्वार खोलती है और रोजगार सृजन की संभावनाओं को बढ़ाती है। आने वाले वर्षों में, विशेष रूप से जब 2027 में सिटी भारत में अपनी उपस्थिति के 125 वर्ष पूरे करेगा, यह साझेदारी और अधिक फलदायी होने की उम्मीद है। भारत का यह सफर ‘विकसित भारत’ की ओर निरंतर जारी है, और सिटी जैसे वैश्विक सहयोगियों के साथ, यह यात्रा निश्चित रूप से अधिक तीव्र और समावेशी होने वाली है। यह संवाद इस बात का प्रतीक है कि भारत की आर्थिक नीतियां वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने में पूरी तरह से सफल हैं और देश सही दिशा में अपनी ‘अमृत काल’ की यात्रा तय कर रहा है।