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जगदलपुर में आयोजित केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के विकास और 2029 से पहले त्वरित न्याय प्रणाली का खाका पेश किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ जंग असल मायने में तभी खत्म मानी जाएगी, जब इस समस्या से पहले प्रभावित रहे क्षेत्रों में विकास का स्तर देश के बाकी हिस्सों के बराबर पहुंच जाएगा। गृह मंत्री ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा के मोर्चे पर मिली जीत के बाद अब इन क्षेत्रों का कायाकल्प करना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर (बस्तर) में आयोजित केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक (26th meeting of the Central Zonal Council) को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि इस बार का यह आयोजन बेहद ऐतिहासिक और विशेष महत्व रखता है। यह पहली बार है जब भारत को इस साल 31 मार्च को पूरी तरह ‘नक्सल मुक्त’ घोषित किए जाने के बाद बस्तर के इलाके में क्षेत्रीय परिषद की इतनी बड़ी बैठक आयोजित की गई है।
इस हाई-प्रोफाइल बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी शामिल हुए। इनके अलावा सदस्य राज्यों और केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा सलाहकार भी इस मंथन का हिस्सा बने।
नक्सलवाद और आपसी विवादों से पूरी तरह मुक्त हुआ सेंट्रल ज़ोन
गृह मंत्री अमित शाह ने देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता में छत्तीसगढ़ के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बेहद खुशी जताते हुए कहा कि पूरा केंद्रीय क्षेत्र (सेंट्रल ज़ोन) अब न केवल नक्सलवाद की काली छाया से बाहर आ चुका है, बल्कि राज्यों के बीच के आपसी विवादों से भी पूरी तरह मुक्त हो चुका है।
बैठक में गृह मंत्री ने कहा:
“यह देश के लिए एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि है। छत्तीसगढ़ भौगोलिक रूप से करीब सात राज्यों को आपस में जोड़ता है, जिससे पूरे सेंट्रल ज़ोन का रणनीतिक महत्व काफी बढ़ जाता है। आज यह पूरा क्षेत्र पूरी तरह से नक्सल-मुक्त और विवाद-मुक्त हो चुका है, जो हम सभी के लिए बेहद गर्व और हर्ष का विषय है।”
उन्होंने इस बड़ी कामयाबी का श्रेय सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों, राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के अदम्य साहस और आपसी तालमेल को दिया। शाह ने केंद्र सरकार की ‘होल ऑफ गवर्नमेंट अप्रोच’ (Whole of Government Approach) की सराहना की, जिसके तहत हिंसा प्रभावित इलाकों को मुक्त कराने के साथ-साथ वहां तुरंत विकास कार्यों को तेज गति से आगे बढ़ाया गया।
सुरक्षा में जीत मिली, पर 5 दशकों के ‘विकास घाटे’ को भरना अभी बाकी
अमित शाह ने साफ किया कि सुरक्षा बलों ने भले ही अपना काम बखूबी पूरा कर दिया हो, लेकिन पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की कमी (Development Deficit) अभी भी सरकार के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है।
उन्होंने आगाह करते हुए कहा, “हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। ये क्षेत्र पिछले लगभग पांच दशकों से विकास की दौड़ में देश के अन्य हिस्सों से पिछड़ रहे थे। हमारा प्रयास तब तक लगातार जारी रहेगा जब तक कि इन सुदूर और आदिवासी बहुल इलाकों को बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के मामले में देश के अग्रणी राज्यों के समकक्ष नहीं ला खड़ा किया जाता।”
शाह ने छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष तारीफ करते हुए कहा कि राज्य नेतृत्व ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ मिलकर बेहद बारीकी और सूझबूझ से काम किया, जिसके कारण कभी हिंसा का गढ़ रहे बस्तर को आज एक शांत और नक्सल-मुक्त क्षेत्र में बदला जा सका है।
जल जीवन मिशन-2 और ग्रामीण सशक्तिकरण पर विशेष ज़ोर
बैठक के दौरान गृह मंत्री ने क्षेत्रीय परिषद के कामकाज में आए बड़े बदलावों के आंकड़े भी सामने रखे। उन्होंने बताया कि साल 2004 से 2014 के बीच जहां इस परिषद की केवल 11 बैठकें हुई थीं, वहीं 2014 से 2026 के बीच रिकॉर्ड 32 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसी तरह स्टैंडिंग कमेटी की बैठकें भी 14 से बढ़कर 35 हो चुकी हैं। इन बैठकों में उठाए गए 1,729 मुद्दों में से लगभग 80 प्रतिशत का सफलतापूर्वक समाधान निकाला जा चुका है।
भविष्य के रोडमैप को लेकर अमित शाह ने सभी सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कुछ बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर तुरंत ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया:
जल जीवन मिशन-2: सभी राज्यों को प्राथमिकता के आधार पर हर ग्रामीण घर तक पाइप के जरिए शुद्ध पेयजल पहुंचाना सुनिश्चित करना होगा।
- कुपोषण के खिलाफ जंग: ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक कल्याण की योजनाओं को मजबूत करने के लिए सभी मुख्यमंत्रियों और मुख्य सचिवों को केंद्र के साथ ‘कंधे से कंधा’ मिलाकर काम करना होगा।
- शिक्षा और वित्तीय समावेशन: स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट (पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या) को कम करना, शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग पहुंच को बढ़ाना अनिवार्य है।
गृह मंत्री ने अपील की कि राज्यों की कम से कम आधी नीतियों का ध्यान ग्रामीण विकास और सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर गांव में कम से कम पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए ताकि ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) आधारित कल्याणकारी योजनाओं का पैसा सीधे और बिना किसी भ्रष्टाचार के गरीबों के खातों में पहुंच सके।
3 साल के भीतर न्याय: नए कानूनों पर कड़ा रुख
बैठक में कानून-व्यवस्था और त्वरित न्याय प्रणाली को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। गृह मंत्री ने POCSO और बलात्कार के मामलों में समय पर डीएनए (DNA) टेस्टिंग सुनिश्चित करने और लंबे समय से लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों (Special Courts) के गठन पर जोर दिया। इसके अलावा, साइबर क्राइम हेल्पलाइन को मजबूत करने और देश में लागू हुए नए आपराधिक न्याय कानूनों को जमीनी स्तर पर बेहतर ढंग से लागू करने के निर्देश दिए।
अमित शाह ने देश के सामने एक बड़ा लक्ष्य रखते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य होना चाहिए कि साल 2029 से पहले देश का कोई भी आपराधिक मामला—चाहे वह सुप्रीम कोर्ट तक ही क्यों न पहुंचे—दर्ज होने के अधिकतम तीन साल के भीतर पूरी तरह से निपटाया जा सके।