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फ्रांस के एवियन-लेस-बेंस में 15 से 17 जून 2026 तक आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना है। जानें क्या होगा मुख्य एजेंडा।
वैश्विक कूटनीति के मंच से एक बेहद महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच आगामी जून महीने में एक हाई-प्रोफाइल मुलाकात होने की संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि यह रणनीतिक बैठक न तो भारत में होगी और न ही अमेरिका में, बल्कि इसके लिए फ्रांस की खूबसूरत वादियों को चुना गया है। दरअसल, फ्रांस इस साल होने जा रहे प्रतिष्ठित G-7 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पीएम नरेंद्र मोदी दोनों शिरकत करने जा रहे हैं।
विश्व राजनीति के इन दो दिग्गज नेताओं की इस मुलाक़ात पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इससे पहले 13 फरवरी 2025 को वॉशिंगटन के व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई थी। अब करीब 16 महीनों के लंबे अंतराल के बाद यह पहला मौका होगा जब दोनों नेता किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर आमने-सामने होंगे।
फ्रांस के एवियन-लेस-बेंस में सजेगा G-7 का मंच
इस साल 52वें G-7 शिखर सम्मेलन का आयोजन फ्रांसीसी आल्प्स की पहाड़ियों के बीच बसे बेहद खूबसूरत शहर एवियन-लेस-बेंस (Évian-les-Bains) में होने जा रहा है। व्हाइट हाउस और राजनयिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन 15 जून से 17 जून 2026 तक चलेगा। पहले इस बैठक को 14 जून से शुरू करने की योजना थी, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 80वें जन्मदिन और कुछ अन्य कार्यक्रमों के चलते इसे एक दिन आगे बढ़ा दिया गया।
फ्रांस दूसरी बार एवियन-लेस-बेंस में इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, इससे पहले साल 2003 में यहां G-8 (तब रूस भी शामिल था) की बैठक आयोजित की जा चुकी है। इस बार की बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति के 80वें जन्मदिन के ठीक अगले दिन शुरू हो रही है, जिससे इस आयोजन को लेकर वैश्विक मीडिया में काफी उत्सुकता बनी हुई है।
राष्ट्रपति मैक्रों ने दिया था पीएम मोदी को विशेष आमंत्रण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस दौरा पूरी तरह कंफर्म हो चुका है। इसकी आधिकारिक पृष्ठभूमि इस साल की शुरुआत में ही तैयार हो गई थी। दरअसल, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17 से 19 फरवरी 2026 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर नई दिल्ली आए थे, जहां उन्होंने ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ में भी हिस्सा लिया था। इसी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के साथ-साथ पीएम नरेंद्र मोदी को फ्रांस में आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया था।
इसके बाद मार्च 2026 में भारत में स्थित फ्रांसीसी दूतावास और फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी थी कि भारत इस शिखर सम्मेलन में एक ‘विशिष्ट अतिथि देश’ (Invited Guest) के रूप में शामिल होगा। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उनके फ्रांसीसी समकक्ष के बीच हुई बैठकों में पीएम मोदी की इस भागीदारी का स्वागत किया गया और वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भारत की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना गया।
क्या होगा इस बार की बैठक का मुख्य एजेंडा?
व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा साझा की गई जानकारियों के मुताबिक, इस बार के G-7 सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य कोई वास्तविक या कानूनी रूप से बाध्यकारी समझौता (Signed Deals) करना नहीं है। बल्कि, इसका असली मकसद दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं के बीच महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर एक आम सहमति (Consensus) बनाना है, ताकि भविष्य के समझौतों के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया जा सके।
इस शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य फोकस निम्नलिखित बिंदुओं पर रहने की उम्मीद है:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): अमेरिका में विकसित AI टूल्स और तकनीकों को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने और इसके सुरक्षित इस्तेमाल पर चर्चा।
- व्यापार और अर्थव्यवस्था (Trade): राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा व्यापारिक नीतियों और अमेरिकी निर्यात को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। वे अमेरिकी सहायता को ‘परस्पर लाभकारी व्यापार’ से जोड़ने की रणनीति पर बात कर सकते हैं।
- क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और महत्वपूर्ण खनिजों के बाजार पर चीन के दबदबे को कम करने के उपायों पर सहमति बनाना।
- अपराध और ड्रग तस्करी के खिलाफ लड़ाई: अवैध प्रवासन (Illegal Immigration) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैर पसार रहे नशीले पदार्थों के नेटवर्क को ध्वस्त करना।
- भू-राजनीतिक मुद्दे: मध्य पूर्व के ताजा हालातों और ईरान के मुद्दे पर भी इस बैठक के दौरान गंभीर मंथन होने की पूरी संभावना है।
क्या है G-7 और कौन-कौन से देश शामिल हैं?
ग्रुप ऑफ सेवन यानी G-7 दुनिया की सात सबसे विकसित और प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का एक अनौपचारिक मंच है। यह समूह वैश्विक आर्थिक शासन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा नीतियों जैसे बड़े मुद्दों पर दिशा-निर्देश तय करने में बड़ी भूमिका निभाता है। इस समूह में शामिल देश हैं:
- अमेरिका (USA)
- ब्रिटेन (UK)
- फ्रांस (France)
- जर्मनी (Germany)
- इटली (Italy)
- जापान (Japan)
- कनाडा (Canada)
इन सात देशों के अलावा, यूरोपियन यूनियन (EU) भी इस बैठक में एक स्थायी सदस्य की तरह हिस्सा लेता है, जिसका प्रतिनिधित्व यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष करते हैं। इस साल के सम्मेलन में भारत के साथ-साथ ब्राजील, दक्षिण कोरिया और केन्या जैसे प्रमुख लोकतांत्रिक देशों को भी आमंत्रित किया गया है, जो इस मंच को और अधिक समावेशी बनाता है। वैश्विक कूटनीति के जानकारों का मानना है कि एवियन-लेस-बेंस में होने वाली यह बैठक आने वाले समय में दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होगी।