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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ‘मंदिरों के सोने के बदले गोल्ड बॉन्ड’ वाले दावे को पीआईबी (PIB Fact Check) ने पूरी तरह से फर्जी और भ्रामक बताया है। जानें पूरी सच्चाई।
डिजिटल क्रांति और सोशल मीडिया के इस दौर में जहां सूचनाएं पलक झपकते ही लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच जाती हैं, वहीं इसके साथ ‘फेक न्यूज’ (Fake News) और भ्रामक जानकारियों का खतरा भी तेजी से बढ़ा है। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक ऐसा ही दावा बड़ी तेजी से वायरल हो रहा था, जिसने देश भर के लोगों, विशेषकर धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं के बीच हलचल पैदा कर दी थी। वायरल पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि भारत सरकार देश के प्रसिद्ध मंदिरों के सोने के भंडार (Temple Gold Reserves) के बदले उन्हें सरकारी गोल्ड बॉन्ड (Gold Bonds) जारी करने की एक बड़ी योजना बना रही है।
इस संवेदनशील और व्यापक रूप से शेयर किए जा रहे दावे पर अब भारत सरकार की आधिकारिक मीडिया एजेंसी प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेक यूनिट ने संज्ञान लिया है। पीआईबी ने इस वायरल दावे की गहनता से जांच करने के बाद इसे पूरी तरह से फर्जी, मनगढ़ंत और आधारहीन करार देते हुए खारिज कर दिया है।
पीआईबी (PIB) ने सोशल मीडिया पर किया खंडन: “नहीं लिया ऐसा कोई फैसला”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपने आधिकारिक हैंडल से एक पोस्ट साझा करते हुए प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (PIB Fact Check) ने स्थिति को पूरी तरह से स्पष्ट किया। पीआईबी ने वायरल हो रहे मैसेज के स्क्रीनशॉट पर ‘फेक’ (FAKE) का ठप्पा लगाते हुए जनता को आगाह किया।
एजेंसी ने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि भारत सरकार द्वारा ऐसा कोई भी निर्णय नहीं लिया गया है और न ही इस तरह का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। पीआईबी ने देश के नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की किसी भी भ्रामक और असत्यापित पोस्ट को आगे शेयर न करें, क्योंकि इससे समाज में अनावश्यक भ्रम, भय और असंतोष की स्थिति पैदा हो सकती है।
अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की सलाह
सरकारी फैक्ट-चेक यूनिट ने भ्रामक सूचनाओं के इस दौर में नागरिकों को एक महत्वपूर्ण सलाह भी दी है। एजेंसी ने कहा है कि जब भी सरकार किसी नीति, वित्तीय योजना या किसी बड़े फैसले की घोषणा करती है, तो उसकी जानकारी आधिकारिक सरकारी पोर्टलों, गजट या अधिकृत सोशल मीडिया हैंडल्स के माध्यम से जनता के साथ साझा की जाती है।
पीआईबी ने नागरिकों से आग्रह किया है कि:
- किसी भी संवेदनशील या वित्तीय मामले से जुड़ी खबर पर तुरंत भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
- केवल भारत सरकार के आधिकारिक स्रोतों (Official Sources) और मुख्यधारा के विश्वसनीय समाचार माध्यमों द्वारा दी गई सत्यापित जानकारी पर ही विश्वास करें।
- यदि आपको किसी सरकारी योजना या दावे पर संदेह हो, तो आप सीधे पीआईबी की फैक्ट-चेक टीम को वह संदेश भेजकर उसकी सत्यता की जांच करवा सकते हैं।
क्यों संवेदनशील था यह वायरल दावा?
भारत में मंदिरों और उनके सोने के भंडार का मुद्दा हमेशा से ही बेहद संवेदनशील रहा है। देश के कई बड़े और ऐतिहासिक मंदिरों—जैसे तिरुपति बालाजी, श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर और सिद्धिविनायक मंदिर—के पास सदियों से श्रद्धालुओं द्वारा दान किया गया भारी मात्रा में सोना और आभूषण आरक्षित हैं।
चूंकि यह सीधे तौर पर लोगों की धार्मिक आस्था और स्वायत्तता से जुड़ा विषय है, इसलिए जब भी ‘मंदिरों के सोने के अधिग्रहण’ या ‘गोल्ड बॉन्ड में बदलने’ जैसी कोई भी अपुष्ट या झूठी अफवाह उड़ती है, तो वह बहुत जल्दी वायरल हो जाती है। असामाजिक तत्व और कुछ भ्रामक पेजेस अक्सर अपने फायदे या सनसनी फैलाने के लिए ऐसी खबरों को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हैं, जिस पर समय रहते सरकार का यह स्पष्टीकरण आना बेहद जरूरी था।
जिम्मेदार नागरिक बनें, फेक न्यूज पर लगाएं लगाम
पीआईबी फैक्ट-चेक का यह त्वरित कदम यह साबित करता है कि सरकार सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों को लेकर कितनी सतर्क है। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर हमारा भी यह कर्तव्य है कि हम बिना सोचे-समझे किसी भी ‘फॉरवर्डेड’ मैसेज, वीडियो या पोस्ट को आगे न बढ़ाएं। किसी भी खबर को शेयर करने से पहले एक बार यह जरूर सोचें कि क्या यह जानकारी किसी आधिकारिक स्रोत से प्रमाणित है या नहीं। सजगता ही फेक न्यूज के इस वायरस को रोकने का एकमात्र प्रभावी इलाज है।