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बॉलीवुड अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा ने अपने शुरुआती करियर के संघर्षों और बर्नआउट पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे 20s में लगातार काम और डबल शिफ्ट ने उन्हें थका दिया था।
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बॉलीवुड में एक दौर ऐसा था जब हर दूसरी बड़ी फिल्म में सोनाक्षी सिन्हा का चेहरा नजर आता था। साल 2010 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘दबंग’ से अपने करियर की धमाकेदार शुरुआत करने वाली सोनाक्षी रातों-रात फिल्म इंडस्ट्री की सबसे व्यस्त अभिनेत्रियों में शुमार हो गई थीं। मुख्य भूमिकाएं निभाने से लेकर फिल्मों में स्पेशल अपीयरेंस और डांस नंबर्स तक, सोनाक्षी हर जगह छाई हुई थीं। लेकिन बाहर से जितनी चमक-दमक दिखाई दे रही थी, अंदर से सोनाक्षी उतनी ही थकावट और तनाव से गुजर रही थीं।
हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स के साथ एक विशेष बातचीत में सोनाक्षी सिन्हा ने अपने करियर के उन शुरुआती सालों को याद किया और बताया कि कैसे लगातार काम और व्यस्त शेड्यूल ने उन्हें मानसिक और शारीरिक थकावट (बर्नआउट) के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था।
22 साल की उम्र में शुरू हुआ सफर, पूरा ’20s’ काम की भेंट चढ़ा
सोनाक्षी सिन्हा ने अपने शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने काम करना शुरू किया, तब वह बहुत छोटी थीं। उन्होंने कहा, “मैंने बहुत कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था। जब मैंने शुरुआत की तब मैं 22 साल की थी और 23 साल की उम्र में मेरी पहली फिल्म रिलीज हुई थी। मेरी पूरी 20 से 30 साल की उम्र (20s) सिर्फ और सिर्फ काम की भेंट चढ़ गई। मुझे महसूस होने लगा था कि मैं बर्नआउट हो रही हूँ और अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा काम कर रही हूँ।”
अभिनेत्री ने बताया कि उस दौर में वह बिना रुके चौबीसों घंटे भाग-दौड़ कर रही थीं। खुद के लिए वक्त निकालना तो दूर, दो फिल्मों के बीच थोड़ा सा ब्रेक लेने की फुर्सत भी उनके पास नहीं थी। वह बिना थके एक सेट से सीधे दूसरे सेट पर शूटिंग के लिए पहुंच जाती थीं और एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें फिल्मों के लिए डबल शिफ्ट में काम करना पड़ा।
10 साल में 23 फिल्में: इंडस्ट्री का सबसे व्यस्त चेहरा
सोनाक्षी के इस बयान की तस्दीक उनकी फिल्मोग्राफी भी करती है। ‘दबंग’ (2010) से अपने करियर की शुरुआत करने से लेकर कोविड-19 महामारी (2020) के आने तक, सोनाक्षी ने महज 10 साल के अंतराल में 23 फिल्मों में काम किया। इस व्यस्तता के बीच उन्होंने कई गानों में स्पेशल अपीयरेंस और कैमियो भी किए, जिसने उन्हें उस दशक का बॉलीवुड में सबसे ज्यादा दिखने वाला और लोकप्रिय चेहरा बना दिया था। राउडी राठौर, सन ऑफ सरदार, दबंग 2, लुटेरा, और आर राजकुमार जैसी बैक-टू-बैक फिल्मों ने उनके शेड्यूल को सांस लेने की फुर्सत भी नहीं दी।
30 की उम्र में कदम रखते ही बदला जिंदगी का नजरिया
सोनाक्षी ने साझा किया कि लगातार काम की इस अंधी दौड़ में बदलाव तब आया जब उन्होंने अपने जीवन के तीसरे दशक (30s) में कदम रखा। साल 2017 और 2018 के आसपास उन्हें यह अहसास हुआ कि अब उन्हें अपनी रफ्तार धीमी करने की जरूरत है और काम से परे खुद के लिए भी एक निजी स्पेस बनाना बेहद जरूरी है।
अभिनेत्री ने कहा, “एक वक्त ऐसा आया जब मैंने खुद से कहा, ‘मुझे अपने लिए समय निकालने की जरूरत है। यह समय मुझे एक अभिनेता के रूप में निखरने में तो मदद करेगा ही, साथ ही एक बेहतर इंसान बनने में भी मददगार साबित होगा।’ यही वह मोड़ था जब मैंने अपनी जिंदगी में कुछ बड़े बदलाव करने शुरू किए। इसके बाद काम को देखने का मेरा नजरिया और फिल्मों को चुनने का मेरा तरीका पूरी तरह से बदल गया।”
महामारी के बाद बदली रफ्तार: मात्रा (Quantity) से ज्यादा गुणवत्ता (Quality) पर ध्यान
जिंदगी के नजरिए में आया यह बदलाव कोरोना महामारी के बाद उनकी फिल्मों की सूची में साफ देखा जा सकता है। जहाँ पहले वह साल में 3 से 4 फिल्में कर रही थीं, वहीं महामारी के बाद के पिछले छह सालों में सोनाक्षी ने केवल सात फिल्मों और दो वेब सीरीज में काम किया है।
अब सोनाक्षी सिन्हा का पूरा ध्यान संख्या बढ़ाने के बजाय दमदार और चुनिंदा स्क्रिप्ट्स पर है। हाल ही में वेब सीरीज ‘दहाड़’ और ‘हीरामंडी’ में उनके अभिनय को आलोचकों और दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया है, जो यह साबित करता है कि काम की रफ्तार धीमी करके खुद को वक्त देना उनके करियर और अभिनय क्षमता के लिए एक बेहतरीन फैसला साबित हुआ।