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राहुल द्रविड़ ने टी20 क्रिकेट में बल्लेबाजों के बढ़ते दबदबे पर चिंता जताई। उन्होंने सुझाव दिया कि गेंदबाजों को मदद करने के लिए पिचों को अधिक चुनौतीपूर्ण और मददगार बनाना चाहिए।
भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने आधुनिक टी20 क्रिकेट के बदलते स्वरूप पर अपनी महत्वपूर्ण राय साझा की है। द्रविड़ का मानना है कि टी20 प्रारूप जिस तेजी से विकसित हो रहा है, उसमें बल्लेबाजों ने बहुत बड़ी बढ़त बना ली है, जबकि गेंदबाज इस दौड़ में थोड़े पीछे छूट गए हैं। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बल्लेबाजी के मानकों में जो सुधार हुआ है, वह अभूतपूर्व है और अब गेंदबाजों को इस अंतर को पाटने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।
बल्लेबाजी के बढ़ते मानक और गेंदबाजों की चुनौती
पीटीआई (PTI) से बातचीत के दौरान राहुल द्रविड़ ने कहा कि पिछले दो-तीन वर्षों में जिस गुणवत्ता की बल्लेबाजी देखने को मिली है, उसने गेंदबाजों को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है। उन्होंने कहा, “बल्लेबाजी और छक्के मारने की क्षमता के साथ-साथ मैदान के हर कोने में रन बनाने के कौशल में जबरदस्त सुधार हुआ है। गेंदबाजों को अपने कौशल पर लगातार काम करना होगा और नई तकनीकें विकसित करनी होंगी। मुझे यकीन है कि कुछ गेंदबाज अभी भी अपनी पहचान बनाने और खुद को साबित करने में सफल रहेंगे, लेकिन सामूहिक रूप से उन्हें ‘कैचिंग अप’ (बराबरी) करने की जरूरत है।”
गेंदबाज कैसे कम कर सकते हैं यह अंतर?
आजकल टी20 क्रिकेट में 200 से अधिक का स्कोर बनना एक सामान्य बात हो गई है। 2024 टी20 विश्व कप विजेता टीम के मुख्य कोच रहे द्रविड़ का मानना है कि गेंदबाज धीरे-धीरे इस प्रारूप की मांगों के अनुरूप खुद को ढाल लेंगे, लेकिन इसमें समय लगेगा। उन्होंने संतुलन पर जोर देते हुए कहा, “अगर आप वर्तमान स्थिति को देखें, तो आधुनिक टी20 खेल की आवश्यकताओं को गेंदबाजों की तुलना में अधिक बल्लेबाज बेहतर तरीके से पूरा कर पा रहे हैं। यह स्थिति अगले दो या तीन वर्षों में बदल सकती है।”
पिचों के मिजाज में बदलाव की वकालत
द्रविड़ ने क्रिकेट अधिकारियों और क्यूरेटरों से अपील की है कि वे अधिक चुनौतीपूर्ण पिचें तैयार करें ताकि गेंदबाजों को भी मैच में बराबरी का मौका मिले। उन्होंने तर्क दिया कि हम बाउंड्री का आकार और बड़ा नहीं कर सकते क्योंकि मैदानों में अब इसकी जगह नहीं बची है।
द्रविड़ ने सुझाव दिया, “गेंदबाजों को थोड़े समर्थन की आवश्यकता है। इसका सबसे बेहतर तरीका यह है कि ऐसी पिचें बनाई जाएं जिनमें गेंदबाजों के लिए कुछ मदद हो—चाहे वह टर्न लेने वाली ट्रैक हों या फिर अतिरिक्त गति और उछाल वाली पिचें। इससे गेंदबाजों को विकेट लेने और रन रोकने का बेहतर मौका मिलेगा।”
क्या नियमों में बदलाव है समाधान?
जब द्रविड़ से एक ओवर में दो बाउंसर जैसे नियमों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने किसी विशेष नियम पर टिप्पणी करने के बजाय एक व्यापक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि वे ऐसे हर उपाय के पक्ष में हैं जो गेंदबाजों को खेल में वापस लाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में गेंदबाज वापसी करेंगे और अपनी स्विंग व सटीकता से खेल को संतुलित करेंगे।
उन्होंने अंत में एक दिलचस्प तुलना करते हुए कहा, “क्रिकेट में हमेशा यह संतुलन बना रहता है। फिलहाल सफेद गेंद के क्रिकेट में बल्ले का दबदबा दिख रहा है, जबकि लाल गेंद (टेस्ट) क्रिकेट में हम देख रहे हैं कि गेंद अपना प्रभाव दिखा रही है।” द्रविड़ के इस बयान ने टी20 क्रिकेट के भविष्य और बल्ले व गेंद के बीच की जंग को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
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