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तमिलनाडु में सियासी ड्रामा! अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके बहुमत के आंकड़े 118 से पीछे। वीसीके की डिप्टी सीएम पद की मांग और गायब विधायकों के आरोपों ने शपथ ग्रहण समारोह को रोका।
विजय की सत्ता की दहलीज: तमिलनाडु में सरकार गठन का हाई-वोल्टेज ड्रामा
तमिलनाडु की राजनीति ने शुक्रवार को अपने इतिहास के सबसे नाटकीय घटनाक्रमों में से एक को देखा। अभिनेता से राजनेता बने विजय अपनी पार्टी तमिलगा वेट्टरी कड़गम (TVK) के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी के बेहद करीब पहुंच गए, लेकिन देर रात तक नंबरों के गणित और गठबंधन की बदलती चालों ने इस ‘पॉलिटिकल थ्रिलर’ को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया। जो सुबह एक बड़ी जीत और जश्न की शुरुआत लग रही थी, वह रात होते-होते रिजॉर्ट पॉलिटिक्स, हॉर्स ट्रेडिंग के आरोपों और लापता विधायकों की खबरों में बदल गई।
सत्ता के करीब लेकिन बहुमत से दूर
चुनाव परिणामों में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, विजय ने दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव जीता था, जिसके कारण तकनीकी रूप से उनकी पार्टी की संख्या 107 मानी गई। उन्हें कांग्रेस (5), सीपीआई (2) और सीपीआई(एम) (2) का समर्थन मिला, जिससे उनका आंकड़ा 116 तक पहुंच गया। तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 का जादुई आंकड़ा चाहिए, जिससे विजय मात्र दो कदम दूर रह गए। दिन भर यह चर्चा रही कि वीसीके (VCK) और आईयूएमएल (IUML) का समर्थन उन्हें आसानी से इस आंकड़े के पार ले जाएगा, लेकिन शाम तक राज्यपाल कार्यालय से आई खबरों ने चौंका दिया कि विजय के पास केवल 116 विधायकों के ही हस्ताक्षरित समर्थन पत्र थे।
वीसीके और थोल थिरुमावलवन: सबसे बड़ी पहेली
शुक्रवार की रात का सबसे बड़ा रहस्य विदुथलाई चिरुथाईगल कात्ची (VCK) और उसके प्रमुख थोल थिरुमावलवन रहे। सुबह थिरुमावलवन ने संकेत दिए थे कि वे वामपंथी दलों के साथ खड़े होंगे, लेकिन शाम होते-होते उन्होंने “भ्रामक मीडिया रिपोर्ट्स” का हवाला देते हुए अपना रुख स्पष्ट करने के लिए शनिवार सुबह तक का समय मांग लिया। रिपोर्टों के अनुसार, विजय की टीम ने घंटों तक थिरुमावलवन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वे फोन पर उपलब्ध नहीं थे। बाद में यह बात सामने आई कि वीसीके ने समर्थन के बदले उप-मुख्यमंत्री (Deputy CM) पद की मांग रखी थी, जबकि टीवीके केवल शहरी विकास मंत्रालय देने को तैयार थी। इस सौदेबाजी ने विजय की राह में कांटे बो दिए।
आईयूएमएल का पीछे हटना और डीएमके की घेराबंदी
जहाँ एक ओर वीसीके के साथ बातचीत अटकी हुई थी, वहीं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे द्रमुक (DMK) के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन के साथ ही रहेंगे। उनके इस बयान ने विजय के गठबंधन के विस्तार की संभावनाओं को बड़ा झटका दिया। इसी बीच, राज्य में राजनीतिक हलचल इतनी तेज हो गई कि चर्चाएं यहां तक चलीं कि एआईएडीएमके (AIADMK) प्रमुख ईपीएस और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन किसी “सहमति वाले मुख्यमंत्री” के नाम पर विचार कर रहे हैं, ताकि विजय को सत्ता से दूर रखा जा सके।
‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ और लापता विधायक का ड्रामा
जैसे-जैसे बहुमत का आंकड़ा संदिग्ध हुआ, तमिलनाडु में एक बार फिर विधायकों की खरीद-फरोख्त और उन्हें छिपाने की पुरानी राजनीति लौट आई। एएमएमके (AMMK) प्रमुख टीटीबी दिनाकरण ने सनसनीखेज आरोप लगाया कि उनके मन्नारगुड़ी से विधायक कामराज लापता हैं। उन्होंने दावा किया कि कामराज का फोन छीन लिया गया है और उन्हें अवैध हिरासत में रखा गया है। दिनाकरण ने राज्यपाल से मुलाकात कर जांच की मांग की, जिसके बाद राज्यपाल ने डीजीपी को विधायक की तलाश करने का निर्देश दिया और शनिवार को प्रस्तावित शपथ ग्रहण समारोह की संभावनाओं को फिलहाल स्थगित कर दिया।
जालसाजी के आरोप और वीडियो वॉर
राजनीतिक लड़ाई तब और कड़वी हो गई जब दिनाकरण ने टीवीके पर कामराज के समर्थन पत्र पर “फर्जी हस्ताक्षर” करने का आरोप लगाया। इसके जवाब में, विजय की पार्टी ने एक वीडियो जारी किया जिसमें कथित तौर पर कामराज को समर्थन पत्र पर हस्ताक्षर करते हुए दिखाया गया था। टीवीके का दावा था कि यह सब दिनाकरण की सहमति से हुआ था, जबकि दिनाकरण ने इस वीडियो को सिरे से खारिज करते हुए जालसाजी की शिकायत दर्ज कराई।
वामपंथी दलों का तर्क और भविष्य की राह
इस पूरे ड्रामे के बीच सीपीआई(एम) और सीपीआई ने विजय का पुरजोर समर्थन किया। वामपंथी नेताओं का तर्क था कि भाजपा राज्यपाल कार्यालय के माध्यम से जनादेश के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की जा सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएमके और एआईएडीएमके पर्दे के पीछे से एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं ताकि विजय के नेतृत्व वाली सरकार को रोका जा सके।
शुक्रवार की आधी रात बीतने तक तमिलनाडु की राजनीति एक चौराहे पर खड़ी थी। पनैयूर स्थित विजय के आवास के बाहर जो पटाखे सुबह फूट रहे थे, उनकी गूंज अब अनिश्चितता के सन्नाटे में बदल गई है। विजय सत्ता की दहलीज तक तो पहुंच गए हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर अब उन दो विधायकों के समर्थन और गठबंधन की पेचीदा शर्तों पर टिका है, जो फिलहाल रहस्य बने हुए हैं। शनिवार की सुबह तमिलनाडु के लिए एक नया राजनीतिक सवेरा लाएगी या फिर यह सस्पेंस और गहराएगा, यह देखना बाकी है।