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मकर संक्रांति 2026: 14 जनवरी को मनाई जाएगी। जानें इस दिन स्नान-दान का शुभ मुहूर्त, पर्व का महत्व, पौराणिक कथा और कैसे मनाया जाता है मकर संक्रांति।
मकर संक्रांति 2026 का पर्व 14 जनवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में गोचर और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है और इसे नए साल का पहला पर्व भी माना जाता है। विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है – बिहार और यूपी में इसे मकर संक्रांति या खिचड़ी पर्व, पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, और असम में माघ बिहू या भोगाली बिहू कहा जाता है।
मकर संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त
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पुण्यकाल: दोपहर 02:49 से शाम 05:45
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महापुण्यकाल: दोपहर 02:49 से 03:42
स्नान-दान के लिए पुण्यकाल और महापुण्यकाल को सबसे शुभ समय माना जाता है। इस दौरान लोग पवित्र नदी में स्नान, सूर्य देव को अर्घ्य और दान-पुण्य करते हैं। विशेष रूप से गर्म कपड़े, कंबल, गुड़, तिल और खिचड़ी का दान करने की परंपरा है।
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मकर संक्रांति मनाने का महत्व
मकर संक्रांति धार्मिक, प्राकृतिक और खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह पर्व फसल के मौसम की शुरुआत और शीतकालीन संक्रांति के अंत का प्रतीक है। ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य मकर राशि में गोचर करते हैं, और उत्तरी गोलार्ध में सूर्य की यात्रा की शुरुआत होती है।
इसके अलावा, कई स्थानों पर इसे पतंग महोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जहां लोग घर की छतों पर पतंगबाजी करते हैं।
मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व
मकर संक्रांति का वर्णन महाभारत और पुराणों में मिलता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भीष्म पितामह अर्जुन के बाणों से घायल होने के बावजूद मृत्यु को टालकर सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार करते रहे। इसके अलावा, गंगा जी के सगर तक पहुँचने की कथा भी इस पर्व से जुड़ी हुई है।
मकर संक्रांति का पर्व धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे देशभर में बड़े उत्साह और भक्ति भाव से मनाया जाता है।