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बच्चों में डायरिया क्यों होता है? जानिए दस्त के कारण, लक्षण, घरेलू इलाज और बचाव के उपाय। सही देखभाल से बच्चों को डिहाइड्रेशन और संक्रमण से कैसे बचाएं।
बच्चों में डायरिया, यानी बार-बार पतले या पानी जैसे मल आना, एक आम लेकिन गंभीर समस्या है, जो गर्मियों और बरसात के मौसम में अधिक देखने को मिलती है। यह स्थिति तब खतरनाक बन जाती है जब शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी (डिहाइड्रेशन) होने लगती है। खासतौर पर छोटे बच्चों में यह कमी बहुत तेजी से होती है, जिससे उनकी जान को खतरा तक हो सकता है। ऐसे में ज़रूरी है कि डायरिया के कारण, लक्षण और इलाज की पूरी जानकारी समय रहते ली जाए।
बच्चों में डायरिया के मुख्य कारण
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गंदा पानी और दूषित खाना: बच्चों में डायरिया का सबसे आम कारण गंदे पानी या संक्रमित भोजन का सेवन है। सड़क किनारे का खाना, बिना उबाले पानी या खुला दूध इनफेक्शन फैला सकते हैं।
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हाथ न धोना और साफ-सफाई की कमी: खेलने के बाद या खाना खाने से पहले हाथ न धोना, गंदे बर्तन या बोतलों का उपयोग करना भी संक्रमण का मुख्य कारण बन सकता है।
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कमजोर इम्यून सिस्टम: बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) कमजोर होने के कारण वे जल्दी बैक्टीरिया और वायरस की चपेट में आ जाते हैं।
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लैक्टोज इन्टॉलरेंस और एंटीबायोटिक दवाएं: कुछ बच्चों को दूध पचाने में दिक्कत होती है या नई दवाओं के सेवन से भी डायरिया हो सकता है।
डायरिया के लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
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दिन में 3 से 4 बार से अधिक पतले दस्त
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सुस्ती या कमजोरी
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आंखों का धंसा होना
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पेशाब की मात्रा में कमी
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लगातार उल्टी होना
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खून या बलगम वाले दस्त
इन लक्षणों के दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
बच्चों में डायरिया का इलाज: क्या करें?
1. ओआरएस (ORS) का सेवन कराएं
डायरिया की स्थिति में बच्चे के शरीर से बहुत सारा पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स निकल जाते हैं। इसकी पूर्ति के लिए सबसे कारगर उपाय है ओआरएस का घोल। हर बार दस्त होने के बाद ओआरएस देना जरूरी है।
2. माँ का दूध और तरल पदार्थ दें
छोटे बच्चों को माँ का दूध देना जारी रखें। इसके अलावा नारियल पानी, नींबू-पानी, पतली दाल, चावल का माढ़ आदि तरल चीजें देना लाभकारी होता है।
3. हल्का और सुपाच्य आहार दें
दस्त के दौरान बच्चों को खिचड़ी, दाल-चावल, उबला हुआ केला या सेब की चटनी जैसे हल्के खाद्य पदार्थ दें। तली-भुनी और भारी चीजों से बचाएं।
साफ-सफाई और सावधानी: संक्रमण से बचाव के उपाय
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बच्चों को हाथ धोने की आदत डालें (खाने से पहले और टॉयलेट के बाद)
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उनकी बोतलें, खिलौने और बर्तन रोजाना धोएं
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केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिलाएं
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बाहर का खाना न दें और खुले में खेलने के बाद साफ-सफाई कराएं
नवजात और छोटे बच्चों का रखें विशेष ध्यान
6 महीने से छोटे बच्चों में डायरिया होने पर स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। डिहाइड्रेशन बहुत तेज़ी से बढ़ सकता है, जिससे कमजोरी, वजन कम होना और कुपोषण जैसी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में बिना देरी डॉक्टर से संपर्क करें।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
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जब बच्चा बहुत सुस्त लगे
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आँखें धंसी हुई दिखें
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पेशाब आना बंद हो जाए
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बार-बार उल्टी हो
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खून के साथ दस्त हो
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डायरिया 24 घंटे से अधिक जारी रहे
ये सभी संकेत डिहाइड्रेशन और गंभीर संक्रमण की ओर इशारा कर सकते हैं, जिसके लिए अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत भी पड़ सकती है।