Share Market Crash: सोमवार को ही शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 900 अंक टूटा, स्मॉलकैप और बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली!

Share Market Crash: सोमवार को ही शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 900 अंक टूटा, स्मॉलकैप और बैंकिंग शेयरों में भारी बिकवाली!

Share Market Falling Today: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार सुबह भारी गिरावट। सेंसेक्स लगभग 900 अंक लुढ़का और निफ्टी के स्मॉलकैप इंडेक्स 2% से ज्यादा टूटे। जानें बड़ी वजहें।

Share Market Falling: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को भारी गिरावट, सेंसेक्स 900 अंक टूटा

भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के लिए हफ्ते का पहला दिन यानी सोमवार बेहद निराशाजनक रहा। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली (Selling Pressure) का माहौल देखने को मिला, जिससे बड़े, मझोले और छोटे सभी प्रकार के शेयरों (Large-caps, Mid-caps, Small-caps) में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों में वैश्विक और घरेलू चिंताओं को लेकर घबराहट साफ देखी जा रही है, जिसके चलते वे लगभग हर सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी घटा रहे हैं।

सुबह करीब 10:02 बजे, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 (Nifty 50) 1.19% की कमजोरी के साथ 23,363 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) करीब 900 अंकों की भारी गिरावट के साथ 74,339 के आसपास आ गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट व्यापक (Broad-based) है, जिसका मतलब है कि बिकवाली किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।

मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर सबसे तगड़ी मार

मुख्य सूचकांकों की तुलना में ब्रॉडर मार्केट यानी मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में और भी ज्यादा बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार में जोखिम से बचने की भावना (Risk-off Sentiment) इतनी मजबूत थी कि छोटे और माइक्रो-कैप शेयरों से निवेशकों ने तेजी से पैसा निकालना शुरू कर दिया।

सुबह के कारोबार में निफ्टी स्मॉलकैप 100 (Nifty Smallcap 100) में 2% से अधिक की गिरावट देखी गई, जबकि निफ्टी माइक्रोकैप 250 (Nifty Microcap 250) लगभग 2.7% तक टूट गया। इसके अलावा, निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 2.18% और निफ्टी मिडस्मॉलकैप 400 में 1.84% की कमजोरी आई। इन आंकड़ों से साफ संकेत मिलता है कि ट्रेडर्स अधिक जोखिम वाले काउंटरों से बहुत आक्रामक तरीके से बाहर निकल रहे हैं (Aggressively Exiting)।

फाइनेंशियल और बैंकिंग शेयरों ने बाजार को नीचे खींचा

भारतीय शेयर बाजार के सबसे भारी-भरकम सेक्टर, यानी बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं (Banking and Financial Services) के शेयरों में आई कमजोरी ने मुख्य सूचकांकों को नीचे धकेलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई।

निफ्टी बैंक (Nifty Bank) इंडेक्स 1.54% की गिरावट के साथ 52,885 के स्तर पर आ गया। इसी तरह निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में भी 1.54% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सरकारी बैंकों (PSU Banks) के शेयरों में बिकवाली का दबाव सबसे ज्यादा देखने को मिला, जिसके कारण निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स 2.4% से ज्यादा टूट गया। बाजार के हैवीवेट्स (Heavyweight Lenders) जैसे एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Bank) और एक्सिस बैंक (Axis Bank) में आई बड़ी कमजोरी ने निफ्टी और सेंसेक्स को संभलने का कोई मौका नहीं दिया।

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल्टी और ऑटो सेक्टर भी पस्त

बढ़ती बाजार अस्थिरता (Volatility) और मुद्रा (Currency) संबंधी चिंताओं के कारण ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील माने जाने वाले सेक्टर्स (Rate-sensitive Sectors) पर भी भारी दबाव देखा गया।

सोमवार को निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Nifty Consumer Durables) इंडेक्स 3% से अधिक की गिरावट के साथ सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले सेक्टर्स में से एक रहा। इसके साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर में भी निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की, जिससे निफ्टी रियल्टी (Nifty Realty) इंडेक्स 2.5% से ज्यादा नीचे आ गया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों (Rising Crude Oil Prices) ने महंगाई और इनपुट कॉस्ट (लागत) बढ़ने की चिंता पैदा कर दी है, जिसके चलते ऑटो सेक्टर भी पस्त नजर आया। निफ्टी ऑटो (Nifty Auto) इंडेक्स में भी लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई।

गिरावट के मुख्य कारण (Key Factors Behind the Crash)

बाजार के जानकारों के मुताबिक, आज की इस भारी गिरावट के पीछे कई प्रमुख घरेलू और वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं:

  • वैश्विक चिंताएं और मुद्रा का दबाव: वैश्विक बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं।
  • कच्चे तेल में तेजी: वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल आने से भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए व्यापार घाटा और महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, जो सीधे तौर पर ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर्स को प्रभावित कर रहा है।
  • जोखिम कम करने की होड़: स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों के ऊंचे वैल्यूएशन को देखते हुए ट्रेडर्स इस समय भारी जोखिम (High Risk) वाले शेयरों से मुनाफावसूली कर कैश होल्डिंग बढ़ाना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं।

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