24 जुलाई को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव से सेंसेक्स 770 अंक टूटा तथा निफ्टी 23,700 के नीचे आ गया।
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 24 जुलाई के शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली और दबाव का माहौल देखने को मिला। घरेलू इक्विटी बाजारों ने हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन अपनी गिरावट के सिलसिले को आगे बढ़ाया। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट और अनिश्चितता का माहौल बन गया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सुस्त वैश्विक संकेतों ने निवेशकों की धारणा पर बेहद नकारात्मक असर डाला। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय बाजार का सेंटीमेंट काफी कमजोर हो गया और निवेशकों ने जोखिम भरे शेयरों से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया।
सुबह के सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
कारोबार की शुरुआत के बाद सुबह लगभग 10:00 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 770.68 अंक यानी 1.01% की भारी गिरावट के साथ 75,620.71 के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 भी 212.85 अंक यानी 0.89% टूटकर 23,656.75 के स्तर पर आ गया था। इस भयंकर गिरावट के कारण निफ्टी ने 23,700 का महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और तकनीकी सपोर्ट स्तर तोड़ दिया। बाजार में चौतरफा हो रही बिकवाली ने निवेशकों को हैरान कर दिया, क्योंकि दिन की शुरुआत में ही दिग्गज और बड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिलने लगी थी।
ब्रॉडर मार्केट पर पड़ी मार: मिडकैप और स्मॉलकैप बुरी तरह प्रभावित
शुक्रवार के कारोबारी सत्र में केवल मुख्य सूचकांक ही लाल निशान में नहीं थे, बल्कि व्यापक बाजार (Broader Market) पर बिकवाली की मार और भी ज्यादा भयंकर देखने को मिली। मिड-कैप और स्मॉल-कैप श्रेणी के शेयरों में लार्ज-कैप यानी फ्रंटलाइन इंडेक्स की तुलना में ज्यादा तेज और बड़ी गिरावट दर्ज की गई। मझोली कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाने वाला सूचकांक ‘निफ्टी मिडकैप 100’ सुबह के सत्र में 0.96% तक टूट गया। वहीं, छोटी कंपनियों के सूचकांक ‘निफ्टी स्मॉलकैप 100’ में 1.15% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। छोटे और मध्यम आकार के शेयरों में इस तरह की तेज गिरावट यह स्पष्ट दर्शाती है कि रिटेल (खुदरा) और संस्थागत निवेशकों का भरोसा इस समय काफी कमजोर पड़ा हुआ है और वे सतर्कता बरत रहे हैं।
इंडिया विक्स में उछाल: बाजार में बढ़ी अस्थिरता और डर का माहौल
बाजार में डर और अनिश्चितता के स्तर को मापने वाला सूचकांक ‘इंडिया विक्स’ (India VIX), जिसे अक्सर बाजार का “फीयर गेज” (Fear Gauge) भी कहा जाता है, में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया। सुबह के सत्र के दौरान इंडिया विक्स 7.06% बढ़कर 14.43 के स्तर पर पहुँच गया। विक्स में आया यह तेज उछाल इस बात का स्पष्ट संकेत देता है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार में अस्थिरता और उतार-चढ़ाव काफी बढ़ा हुआ रहेगा। जब भी विक्स में तेजी से बढ़ोतरी होती है, तो यह माना जाता है कि निवेशक बाजार में किसी बड़े जोखिम या अनिश्चितता से घबराए हुए हैं और आने वाले सत्रों में तेज उतार-चढ़ाव की संभावना बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक कारक बने गिरावट की मुख्य वजह
घरेलू शेयर बाजार में आ रही इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां हैं। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव चरम पर है, जिसके कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड तेल (कच्चे तेल) की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बेहद चिंताजनक हैं। इससे देश का आयात बिल बढ़ता है, महंगाई दर ऊपर जाती है और चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इन सभी चिंताओं और सुस्त वैश्विक रुझानों के कारण भारतीय बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव देखा जा रहा है।